अंतरराष्ट्रीय पोहा दिवस: शहरभर में सुबह से जमी पोहे की महफिलें; इंदौर की जान पोहा, इंदौरी की पहचान पोहा, भिया, पोये ‘खेंचे’ की नी
KHULASA FIRST
संवाददाता

अब सेंव-परमल जैसा ‘सरकारी नाश्ता’ बना पोहा...
बाजार में हर दिन 20 क्विंटल से ज्यादा पोहे खा जाते हैं इंदौर वाले, घर का आंकड़ा बेहिसाब
कभी महाराष्ट्र से जुड़ा था, अब इंदौर व मालवा अंचल की बन गया पहचान, विदेश तक मची धूम
इंदौर में पोहे प्लेट से नहीं, भरपेट भी खाए जाते हैं, एक वक्त के भोजन की छुट्टी कर देता है पोहा
इंदौरी पोहे को मिलता है मस्त जीरावन, कतरे हुए प्याज, अनार के दाने और भाप का साथ
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भिया, आज पोये खेंचे की नी? अरे आज तो जगो-जगो फ्री में बट रे हैं पोये। ए लो, तुमकु पता ई नी? आज वो अपन के पोये का बड्डे है न भिया। वो क्या केते हैं, वर्ल्ड पोहा डे। भिया, अपन ने तो कभी सोचा ई नी था कि अपन के पोये के ऐसे जलवे तू जलाल तू होंगे।
अपन तो बस सुबे-सुबे रोज यू ही हेड़ देते हैं एक-दो पिलेट। आदत है न भिया अपन की। अब इंदौरी जो ठहरे। पोये नी मिले सुबे-सुबे तो मजा ई नी आता। मस्त कतरे हुए प्याज, झन्नाट जीरावन, न भाप पर गरम पोये देखते ही न मुंडे में पानी आ जाता है।
जब तक दो पिलेट नी खेंचो, पोये से मन धापता ई नी। अपन को ये वर्ल्ड डे-वे से कोई लेना-देना नी भिया। अपन की तो जान पोया जन्म लेते ही हो गया था, न मसानघट्टे तक अपन तो पोये ही खेंचेंगे। भिया इसलिए फिर पूच रिया हूं कि आपने आज पोये खेंचे की नी..?? आज तो फोकट में मिल रिये हैं।
मै तो साउथ राजमोहल्ला के बगीचे में सुबे-सुबे ही दो दोने हेड़ आया, न अब राजवाड़े जा रिया हूं। राजवाड़े पर केल्लास जी खिला रिये हैं पोये। वो पुष्यमित्र ने भी पोया पाल्टी रखी है, पर भिया वो दूर है न तो अपन तो इधर ही पोये खेंचेंगे।
पोहे की ये मस्ती इंदौर के सिर पर ऐसे ही चढ़कर बोलती है। पोहे के मामले में मालवे के लोग एक तरह से बावले ही हैं। इसमें इंदौर से उज्जैन, रतलाम, नागदा, उन्हेल, बड़नगर, देवास से लेकर शाजापुर तक सुबह के नाश्ते में पोहे का ही जलवा है।
अब तो निमाड़ में भी पोहे के कड़ाव लगने लगे हैं। इंदौर में तो पोहे की ऐसी दीवानगी है कि एक अनुमान के मुताबिक 20 क्विंटल से ज्यादा पोहे इंदौरी रोज खा लेते हैं।
ये आंकड़ा तो बाजार का है। यानी पोहे के ठिये-ठिकानों का। दुकानों, ठेलों और नामचीन प्रतिष्ठानों का, घर का आंकड़ा तो बेहिसाब है। घर पर पोहे फिर प्लेट का हिसाब नहीं बनता है।
इंदौर में अगर घर मे पोहे बने हैं तो फिर वे थाली या बड़ी डिश में ही पाए जाएंगे। लिहाजा घर में कितनी मात्रा खप जाती है पोहे की, न आज तक हिसाब लगा है, न कभी लग पाएगा।
कभी पोहा महाराष्ट्र की ही पहचान था। इंदौर में भी पोहे का आगमन महाराष्ट्र से ही हुआ। मराठी अस्मिता के प्रतीक होलकर वंश से जुड़े इंदौर का नाता बगल के महाराष्ट्र से, इंदुर के दौर से ही है।
लिहाजा पोहा शुरुआत में मराठी भाषी परिवार की विरासत का हिस्सा रहा। ये एक मराठी भाषी होटल वाले के जरिए ही घर से निकलकर बाजार में आया। प्रशांत उपहार गृह को इस सुस्वादु व्यंजन को इंदौरियों की जुबान से जोड़ने का श्रेय दिया जाता रहा है।
अब इंदौरियों के जुबानी चटखारे की तो बात ही अलहदा है। यूं ही नहीं, इंदौर देशभर में खान-पान की नगरी कहलाता है। लिहाजा आज पोहा न सिर्फ इंदौर, मालवा अंचल बल्कि प्रांत-देश की सरहदें लांघकर अंतरराष्ट्रीय जगत का भी हिस्सा हो चला है। दुनिया के कई मुल्कों में ही नहीं, उनके हवाई अड्डों पर भी इंदौरी पोहा अब उपलब्ध है।
पोहे के स्वाद ने ऐसा जलवा बिखेरा कि अब ये चिकित्सा जगत की डाइट का भी अहम हिस्सा हो गया है। कैसा ही गंभीर मर्द हो, मरीज हो..डॉक्टर नाश्ते में पोहे खाने की सलाह देते हैं।
खाने में हल्का, कम तेल में बनने वाला व भाप पर पकने की पोहे की प्रकृति ने इसे डॉक्टरी डाइट का अहम हिस्सा बना दिया है, लेकिन इंदौरी जुबान तो नित नए प्रयोग के लिए जानी जाती है।
लिहाजा इंदौर के पोहे में कब झन्नाट सेंव, चटाखेदार मसाला जीरावन शामिल हो गया, कुछ पता नहीं।
कब पोहे की कड़ाही अनार के दाने से सजने लगी, कोई नहीं जानता। हरे धनिये से पोहे के पिरामिड का शृंगार भी इंदौर के पोहे की पहचान है। ये पोहे का ही जलवा है कि उसने बिना ब्रांडिंग अपनी जगह व बखत देश ही नहीं, दुनियाभर में बना ली।
यूं ही नहीं देश-दुनिया में अंतरराष्ट्रीय पोहा दिवस मनाया जाता। इसके लिए इंदौर, इंदौरी होना व इंदौरी पोहा होना नितांत जरूरी है। है के नी भिया..??
महापौर बोले -पोहा इंदौर का दिल, सेंव उसकी धड़कन...
विश्व पोहा दिवस पर ‘इंदौरी पोहा, इंदौरी बात महापौर के साथ’ कार्यक्रम का भव्य इंदौर के पश्चिम क्षेत्र स्थित विश्राम बाग पर किया गया। कार्यक्रम में शहर की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक स्वाद और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला।
बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया। कार्यक्रम के दौरान योग मित्र अभियान के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा को लेकर योग के माध्यम से विशेष प्रस्तुति दी गई।
आयोजन में शहर के प्रमुख पोहा निर्माताओं का महापौर द्वारा सम्मान भी किया गया। इस दौरान पोहा व्यवसाय से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे इंदौरी पोहा आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है।
महापौर ने कहा कि इंदौर में पोहा केवल नाश्ते का व्यंजन नहीं, बल्कि शहर की संस्कृति और पहचान है। आज अमेरिका, इंग्लैंड सहित भारत के कई शहरों में इंदौरी पोहे की दुकानें दिखाई देती हैं, इसलिए पोहा इंदौर का दिल है, तो सेंव उसकी धड़कन।
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