ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार को आखिरी मौका; जवाब नहीं दिया तो कलेक्टर को होना पड़ेगा पेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और शोर नियंत्रण के नियमों के पालन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित समय में जवाब पेश नहीं किया गया तो इंदौर के जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए अब तक की गई कार्रवाई और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी देनी होगी।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने अमिताभ उपाध्याय एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए एक बार फिर समय मांगा गया। कोर्ट ने समय तो दिया, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से अंतिम अवसर बताया।
जवाब नहीं आया तो कलेक्टर को देना होगा कार्रवाई का हिसाब
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में शासन की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया तो जिला दंडाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
उन्हें याचिका में उठाए गए ध्वनि प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर प्रशासन की अब तक की कार्रवाई और आगे की कार्ययोजना के बारे में जानकारी देनी होगी।
इस निर्देश के बाद प्रशासन को यह बताना होगा कि शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई।
2025-26 की कार्रवाई का रिकॉर्ड भी तलब
हाईकोर्ट ने इंदौर जिला कोर्ट से वर्ष 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के तहत हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
रिपोर्ट में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मामलों में संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए जुर्माने और सुनाई गई सजाओं का विवरण शामिल होगा।
कोर्ट के इस निर्देश से यह स्पष्ट होगा कि ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन और न्यायिक स्तर पर कितनी कार्रवाई हुई।
कितने मामलों में जुर्माना लगाया गया और कितने मामलों में सजा सुनाई गई, इसका पूरा रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखा जाएगा।
सिर्फ नियम नहीं, पालन और कार्रवाई भी बतानी होगी
कोर्ट के रुख से साफ है कि प्रशासन को केवल ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा।
उसे यह भी बताना होगा कि इन नियमों का कितना प्रभावी पालन कराया गया, उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में शहर में शोर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट अभिनव धनोड़कर ने पैरवी की। शासन की ओर से शासकीय एडवोकेट प्रद्युम्न किबे तथा अन्य प्रतिवादी की ओर से एडवोकेट ऋषभ सिंह चौहान उपस्थित रहे। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
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