जाओ... माफ किया बच्चो: पीएम का छात्रों से फिर संवाद; सपनों के भारत में साथ-साथ
KHULASA FIRST
संवाददाता

गाली देकर जिन्होंने अपमान किया, प्रधानमंत्री ने उन्हें माफ किया
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के वक्त देश, सेना, प्रधानमंत्री व उनकी मां के प्रति अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर पंतप्रधान ने जताई चिंता
दांत व जीभ का उदाहरण देकर प्रधानमंत्री ने गाली देने वाले युवाओं को गुमराह बताकर माफ किया, बचपन की गलती बताया
छात्र आंदोलन के बाद 5वीं बार प्रधानमंत्री ने ‘जेन-जी’ के साथ वीडियो संदेश के जरिये बनाया संवाद, कहा- सपनों के भारत के लिए हम सब साथ-साथ
पीएम बोले- बेटियों की भाषा से देश को लगा सदमा, ऐसी भाषा हमारी संस्कृति के लिए एक बड़ा झटका
प्रधानमंत्री की समाज से अपील- ये बच्चे गुमराह हैं, इन्हें राह दिखाने का काम हमारा, इन्हें प्रताड़ित करना ठीक नहीं
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
छात्र आंदोलन के दौरान कथित जेन-जी पीढ़ी के व्यवहार पर देश में व्याप्त आक्रोश का अहसास देश की सत्ता को भी आखिरकार हुआ। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल देश, सेना, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व पीएम की स्वर्गीय मां को लेकर हुआ, उसने हर भारतीय को शर्मसार कर दिया।
आंदोलन के नाम पर दूसरे देश के राष्ट्र प्रमुख के खिलाफ भी गंदी भाषा का इस्तेमाल किया गया। छात्रों के नाम पर राजनीति करने वाले नेता व उनके दलों को छोड़ असल देशवासियों का सिर शर्म से झुक गया। सबसे ज्यादा हैरत व पीड़ा देश की बेटियों की भाषा पर हुई।
दुःख हुआ कि ये हमारी बेटियां हैं? वह भी पढ़ी-लिखी? बेटियों की भाषा-भूषा ने भारत की संस्कृति को भी झकझोर दिया। आंदोलन समाप्ति के बाद हर तरफ ‘जेन-जी’ पीढ़ी के इसी व्यवहार की चर्चा थी व आक्रोश भी।
जनसामान्य ऐसे लोगों को बख्शने के मूड में नहीं था। नतीजतन कानून की सख्ती तेज हुई थी, लेकिन शुक्रवार आधी रात प्रधानमंत्री ने देश की चिंता को स्वर देकर ऐसे युवाओं को माफ कर दिया। उनका कहना था कि ये गुमराह बच्चे हैं, हम इन्हें सजा देकर अदालतों के चक्कर नहीं लगवाना चाहते। ये हमारे ही बच्चे हैं। समाज इन्हें राह पर लाए। दांत, जीभ को काट लेते हैं तो दांत नहीं तोड़े जाते। इसलिए समाज इन्हें प्रताड़ित न करे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधी रात जारी वीडियो संदेश देश की नई पीढ़ी, यानी ‘जेन-जी’ (युवाओं) और जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों के संदर्भ में था, जिसमें उन्होंने युवाओं से संवाद करने, उन्हें समझाने और माफ करने की बात कही थी।
प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में जंतर-मंतर पर छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर बात की। उन्होंने युवाओं को माफ करने, उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने और समाज से उन्हें सही रास्ते पर लाने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक नए संदेश के जरिये एक बार फिर युवा पीढ़ी से संवाद स्थापित किया। छात्र आंदोलन के बाद ये उनका 5वां वीडियो संदेश था, जो जेन-जी पीढ़ी को संबोधित था।
इसमें उन्होंने साफ किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उन्हें और उनकी स्वर्गीय मां को भद्दी गालियां दी गईं। बावजूद इसके वह इन गुमराह बच्चों को माफ करना चाहते हैं। गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं। पीएम ने कहा कि हमारी बेटियों के मुंह से ऐसी अभद्र भाषा सुनना देश व समाज के लिए एक सदमा, झटका है।
किसी भी सभ्य समाज में ये शोभा नहीं देता। लेकिन, गलतियां होती हैं और सुधरने का अवसर भी होता है। समय है, हम इन बच्चों को गले लगाकर राह दिखाएं। ये बच्चे गुमराह हैं। गुमराह को राह दिखाने का काम हमारा है। सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना, समाज में प्रताड़ित करना ठीक नहीं। मैं उन्हें माफ करता हूं।
वीडियो संदेश के मुख्य बिंदु...
युवाओं से संवाद: पीएम मोदी ने देर रात सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर युवाओं को ‘फ्रेंड्स’ कहकर संबोधित किया और उनके सकारात्मक सुझावों का धन्यवाद किया।
गलतियों और क्षमा पर जोर: प्रधानमंत्री ने कहा प्रदर्शनों के दौरान कई बार गलत या अस्वीकार्य भाषा का प्रयोग किया जाता है, लेकिन युवा नासमझ या गुमराह हो सकते हैं, इसलिए उन्हें सजा देने के बजाय प्यार से सही रास्ता दिखाना चाहिए।
नाराजगी और सुधार: पीएम ने स्पष्ट किया कि गालियों या विरोध से समस्याओं का समाधान नहीं होता, देश के उज्ज्वल भविष्य और युवाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
अभद्र भाषा पर प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं द्वारा भद्दी गालियां देना सभ्य समाज का हिस्सा नहीं है।
क्षमा और संवेदनशीलता: उन्होंने कहा युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं और इन्हें सुधारने का अवसर मिलना चाहिए, इसलिए वे इन गुमराह युवाओं को माफ करते हैं।
मामले वापस लेना: प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि वे युवाओं को अदालती चक्करों में नहीं फंसाना चाहते और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जा सकता है।
समाज से अपील: समाज से आग्रह किया कि युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें गले लगाएं और सही मार्ग दिखाएं।
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