दिल्ली से मुंबई तक चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल: ज्ञानेश पर क्लेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

गांधी जयंती पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ का नारा, सीईसी के खिलाफ विपक्ष और सीजेपी का देशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन शुरू
ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, विपक्ष बोला- ‘वोट चोरी के सूत्रधार हटाओ’, बीजेपी का पलटवार- ‘यह राहुल बचाओ आंदोलन’
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों के बाद गहराया संकट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले हफ्ते
मुंबई के शिवाजी पार्क से दिल्ली के जंतर-मंतर तक प्रदर्शन, पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई, प्रदर्शन की अनुमति नहीं
वोटर लिस्ट में 11 करोड़ नामों के हेरफेर पर घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त का इंडिया गठबंधन ने मांगा इस्तीफा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी ‘हल्ला बोल’ महज एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था की साख और उसकी अंदरूनी व्यवस्था के खिलाफ खुला ‘अविश्वास प्रस्ताव’ है।
गांधी जयंती के पावन अवसर पर शुरू हुआ यह आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अभूतपूर्व मोड़ लेकर आया है, जहां देश का पूरा विपक्ष चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठा रहा है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खोजी रिपोर्ट ने इस बार विपक्ष को सबसे अचूक हथियार दे दिया है, जिसने आयोग के भीतर की गहरी दरारों को उजागर किया।
जब अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण से जुड़े 14 बड़े नीतिगत फैसलों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं तो इसने विपक्ष के उन आरोपों को ठोस जमीन दे दी जो लंबे समय से वोटों की साजिशन छंटनी की बात कह रहे थे।
करीब 11 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने का यह गंभीर आरोप अब केवल चुनावी हार-जीत का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिक के मताधिकार और लोकतांत्रिक शुचिता पर चोट करता है।
2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाला यह 20 विपक्षी दलों का साझा मोर्चा न केवल सड़कों पर सरकार और आयोग को घेरेगा, बल्कि संसद के भीतर महाभियोग और सुप्रीम कोर्ट के कानूनी चक्रव्यूह के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त की कुर्सी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी करने जा रहा है।
मु ख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी ‘हल्ला बोल’ आंदोलन आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देशभर में शुरू हो गया है।
‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल करीब 20 राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलते हुए दिल्ली सहित देश के तमाम राज्यों में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत कर दी है।
यह आंदोलन 2 से 8 अक्टूबर तक निरंतर चलेगा, जिसके बाद विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग सौंपेगा।
विपक्ष का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर अभियान के तहत देशभर में करीब 11 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से ‘साजिशन’ हटा दिए गए हैं, जिसे विपक्ष ने ‘वोट की खुली डकैती’ करार दिया है।
सरकार के खिलाफ ये ताजा मूवमेंट एक तरह से 6 दिनों का महा-संग्राम है। 2 से 8 अक्टूबर तक हर जिले और राज्य मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन और पुतले फूंके जाएंगे।
इसके बाद महाभियोग की तैयारी भी है। लोकसभा और राज्यसभा के करीब 193 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नए सिरे से नोटिस दिए जा रहे हैं।
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर कर 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए 14 बड़े फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत एक अंग्रेजी अखबार की एक खोजी रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें खुलासा हुआ कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची में सुधार से जुड़े कम से कम 14 बड़े फैसलों पर लिखित रूप से आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर दरकिनार कर दिया।
विपक्ष के तीखे हमलों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी कर आंतरिक फूट की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि संस्था के भीतर अलग-अलग राय होना एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
एसआईआर समेत पिछले एक साल मंक लिए गए सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही पास हुए हैं। वहीं, सत्ताधारी दल भाजपा ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को जानबूझकर ठेस पहुंचाने और देश में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि यह लोकतंत्र को खत्म करने और गरीबों का वोट चुराने का जादुई फॉर्मूला है। चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संस्था नहीं, बल्कि राजनीतिक टूल बन चुका है।
हम चुप बैठकर देश के लोकतंत्र की हत्या नहीं देख सकते। ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना होगा। प. बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बिहार, मध्यप्रदेश और कई अन्य राज्यों में वोट चोरी का बड़ा घोटाला हुआ है।
जब तक हम इस लड़ाई को इसके अंजाम तक नहीं पहुंचा देते इंडिया गठबंधन का यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
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