ऑनलाइन बेटिंग के नाम पर लाखों की ठगी: मालवा से जुड़े खातों में पहुंच रही थी रकम?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ऑनलाइन बेटिंग की आड़ में करोड़ों के साइबर फ्रॉड के एक और चौंकाने वाला मामले का खुलासा हुआ है। इस बार खुलासा ऐसे नेटवर्क का हुआ है, जिस पर आरोप है कि पहले लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर वेबसाइट से जोड़ा जाता था, फिर लाखों रुपये जमा कराने के बाद जैसे ही खिलाड़ी जीतने लगता था, उसकी आईडी ब्लॉक कर रकम हड़प ली जाती थी।
शिकायतकर्ता ने साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायत में दो लाख रुपये से अधिक की ठगी का आरोप लगाते हुए उज्जैन और इंदौर से जुड़े बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों की जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार Neosports9.com नाम की वेबसाइट पर एक मोबाइल नंबर के जरिए संपर्क कर बेटिंग कराई गई। करीब एक माह तक अलग-अलग किस्तों में दो लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआत में छोटे-छोटे भुगतान कर भरोसा जीता गया, लेकिन जैसे ही उसके खाते में जीत की राशि बढ़कर करीब 1.04 लाख रुपए हुई, वेबसाइट संचालकों ने उसकी आईडी बंद कर दी और निकासी रोक दी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अंतिम बार करीब 40 हजार रुपये की निकासी हुई थी, लेकिन उसके बाद पूरा खाता बंद कर दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मैच के दौरान वेबसाइट बार-बार हैंग होती थी और ऑड्स लॉक कर दिए जाते थे, जिससे खिलाड़ी अपनी बेट सुरक्षित नहीं कर पाता था और उसे लगातार नुकसान उठाना पड़ता था।
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से लोगों को हराने और उनकी रकम फंसाने के लिए अपनाई जाती थी।
दो लोगों के खाते में कराया भुगतान
साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायत में दावा किया गया है कि भुगतान कथित रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक के खातों में कराया गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक बैंक खाते का संबंध हरिओम विश्वकर्मा और दूसरे का अजहर हुसैन नाम के व्यक्ति से है।
साथ ही कई मोबाइल नंबर भी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से कथित तौर पर संपर्क किया जाता था।
शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसका Acknowledgement No. 33207260055967 है।
शिकायत में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और वेबसाइट संचालकों की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
मामले में अभी पुलिस या साइबर एजेंसियों की ओर से किसी गिरफ्तारी या आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर तकनीकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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