वैश्विक संकट का सीधा असर चार धाम यात्रा पर: बढ़ा गैस-तेल संकट; किल्लत से सिलेंडर महंगा, श्रद्धालुओं को देर से मिल रहा महंगा खाना
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
दुनिया भर में चल रहे युद्ध और उससे उपजे गैस-तेल संकट का असर अब उत्तराखंड की चार धाम यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यात्रा के पीक सीजन में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को प्रभावित कर दिया है, जिससे श्रद्धालुओं को महंगा और देर से खाना मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगे
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण देश में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगे हो गए हैं। हाल ही में इनके दाम में करीब एक हजार रुपये तक की बढ़ोतरी ने होटल और ढाबा संचालकों की लागत अचानक बढ़ा दी है।
लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं
चार धाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। इस बार भी भारी संख्या में यात्री केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर हैं। लेकिन गैस सिलेंडर की कमी के चलते भोजन व्यवस्था चरमरा गई है। कई होटल संचालकों का कहना है कि समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उन्हें इंडेक्शन चूल्हों और वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
खाना बनने में अधिक समय
इंडेक्शन पर खाना बनने में अधिक समय लगने से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं बढ़ती लागत का असर खाने की कीमतों पर भी साफ नजर आ रहा है। जहां पहले साधारण थाली उचित दाम में मिल जाती थी, अब वही महंगी हो गई है।
बिगड़ सकते हैं हालात
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई सुचारू नहीं हुई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। कई छोटे व्यवसायी तो सीमित संसाधनों में काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को अपने मेन्यू में कटौती तक करनी पड़ी है।
सीधा असर पर्यटन पर
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों और कच्चे तेल-गैस की आपूर्ति में बाधा का सीधा असर पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। चारधाम यात्रा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, इस संकट से अछूती नहीं रही है।
यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी
अगर सरकार और सप्लाई एजेंसियां समय रहते ठोस कदम नहीं उठातीं, तो आने वाले दिनों में न सिर्फ यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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