धर्मेन्द्र: फिल्मी और असल जिंदगी का जिंदादिल किरदार
Khulasa First
संवाददाता

अजय बोकिल वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हर दिल अजीज मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र के इस फानी दुनिया से कूच कर जाने की खबर इस बार गलत साबित नहीं हुई। 15 दिन पहले भी ऐसी ही खबर उड़ी थी, लेकिन तब उनके परिवार ने पुष्टि नहीं की थी। धर्मेंद्र को मिला वह जीवनदान अल्प साबित हुआ और सोमवार को इस ‘वीरू’ ने अपने चाहने वालों को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
उनका असली नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था। लेकिन फिल्मों में धर्मेंद्र या धर्मेंदर के रूप में मशहूर हुए। साठ से लेकर नब्बे के दशक तक फिल्मी दुनिया में धर्मेंद्र की मौजूदगी हैंडसम हीरो से लेकर प्राजी तक के किरदारों में रही। कभी वो अन्याय के खिलाफ लड़ते दिखे तो कभी हीरोइन को पटाते दिखे।
धर्मेंद्र की लोकप्रियता का फायदा राजनीतिक पार्टियों ने भी उठाया। वो एक बार सांसद का चुनाव भी जीते। सत्तर का दशक बाॅलीवुड में धर्मेंद्र के कॅरियर का सबसे चमकदार समय था। वैसे यह नाइंसाफी ही है कि सत्यकाम और जैसी फिल्मों में संजीदा अभिनय से लेकर चुपके-चुपके तक बेहतरीन काॅमेडी करने वाले धर्मेंद्र को अभिनय की किताब में कभी सुर्खियां नहीं मिल सकीं। मुमकिन है कि उनका शरीर सौंदर्य और मोहक मुस्कान उनकी एक्टिंग पर सदा हावी रही हो।
धर्मेंद्र के नाम बाॅलीवुड का वैसा कोई युग भले न लिखा गया हो, जैसा कि केएल सहगल, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान आदि के नाम रहा है, लेकिन दशकों तक एक समांतर, प्रभावी और लोकप्रिय मौजूदगी धर्मेंद्र की हमेशा रही है। धर्मेंद्र को महान अभिनेताओ में भले न गिना गया हो, लेकिन वो हरफनमौला एक्टर थे। कुछ किरदार जैसे कि ‘अनुपमा’ का अशोक, बंदिनी का डाॅक्टर, सत्यकाम का सत्यप्रिय और शोले का वीरू, ये चंद नाम हैं, जिनके लिए धर्मेंद्र को हमेशा याद रखा जाएगा।
इन स्थापित मानकों से हटकर धर्मेंद्र को जो बात सबसे अलग साबित करती है, वो उनका हिंदी फिल्मों का सबसे ‘हैंडसम हीरो’ होना और एक आर्य पुरुष की तरह ‘ही मैन’ दिखना। करीब चार दशकों तक महिलाएं धर्मेंद्र इस ‘खूबसूरत मर्दानगी’ की दीवानी थीं।
लेकिन धर्मेंद्र को मिली यह नैसर्गिक विरासत उनके दूसरे गुणों को कई बार हाशिए पर सरका देती है। धर्मेंद्र को इस बात का मलाल हमेशा रहा कि ‘हैंडसम हीरो’ होने के बावजूद उन्हें कभी युगांतरकारी अभिनेता नहीं माना गया।
अच्छा काम करने के बाद भी उन्हें एक्टिंग के अवाॅर्ड नहीं मिले। हालांकि भारत सरकार ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म भूषण से नवाजा था, पर ‘ही मैन’ को एक जिंदादिल और जिंदगी के अंतिम क्षण तक उसे एंज्वाॅय करने की तमन्ना रखने वाले हीरो के रूप में याद किया जाएगा।
बाॅलीवुड के नौ दशकों के इतिहास में करीब आठ दशकों तक कोई न कोई अभिनेता अपने युग प्रतिनिधि चेहरा बनकर उभरता रहा है और एक अर्से तक सूरज की तरह दमकने के बाद वह अपने वजूद को बचाने में लग जाता रहा है। फिर कोई नया चेहरा उसकी जगह ले लेता है। हालांकि बीते एक दशक में बाॅलीवुड में अपने युग का बहुमान्य प्रतिनिधि चेहरा कौन है, तय करना मुश्किल है।
इस मायने में धर्मेन्द्र का, जो पंजाब के एक मध्यामर्गीय परिवार से आए थे, बाॅलीवुड में, देश में नेहरू युग के अंतिम वर्षों में उदय उस पीढ़ी के सपनों का प्रस्फुटन था, जो आजादी के समय बहुत छोटी थी और नए भारत में उसके कुछ रोमांटिक सपने थे। वह बेहतर अवसरों और सुखी जिंदगी की तलाश में संघर्षरत थी। उन सपनों में धर्मेंद्र जैसा सुंदर और मजबूत शरीर वाला हैंडसम, जिंदादिल और नेकी के रास्ते आगे बढ़ने वाला हीरो शामिल था। आजादी के बाद पारंपरिक बेडि़यों को तोड़कर आगे बढ़ने वाली लड़कियों के लिए तो धर्मेंद्र ‘सपनों के राजकुमार’ जैसा ही था।
यही कारण है कि बेहद संवेदनशील और मार्मिक अभिनय करने वाली अभिनेत्री मीनाकुमारी से लेकर ‘ड्रीमगर्ल’ हेमामालिनी तक धर्मेंद्र के मर्दाने और हसीन अंदाज पर फिदा थीं। उस जमाने में बहुत से लोग तो टाॅकीज में सिर्फ धर्मेन्द्र को देखने के लिए जाते थे। यह वो दौर था, जब धर्मेन्द्र की तुलना पर्सनालिटी के लिहाज से हालीवुड अभिनेता जेम्स डीन और पाॅल न्यूमैन से की जाती थी, हालांकि खुद धर्मेंद्र उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते थे।
कई हिट फिल्में, अलग-अलग किरदार, हीरो से लेकर कैरेक्टर रोल तक धर्मेंद्र की अदाकारी ने कई रंग बिखेरे, लेकिन उनका देसीपन सदा कायम रहा। गांव का एक पंजाबी जट्ट उनके भीतर हमेशा जिंदा रहा। उम्र के आखिरी दौर में वो सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहे और अपने फैन्स के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें और विचार साझा करते रहे।
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