‘देवदुर्लभ’...तुम इंतजार करो: कांग्रेस नेता को हाथोहाथ भाजपा प्रदेश प्रवक्ता बनाने पर प्रदेशभर के भाजपाई सकते में
KHULASA FIRST
संवाददाता

राकेश के जरिये भाजपा में दोहराया गया ‘नरेंद्र सलूजा’ एपिसोड
भाजपा के खांटी नेता-कार्यकर्ता पद पाने के लिए कर रहे इंतजार, दल बदलकर आए नेता हाथोहाथ हुए उपकृत
पार्टी न निगम मंडल प्राधिकरण में नियुक्ति कर पा रही, न एल्डरमैन बना रही, मूल कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा
कांग्रेस अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष की खुलकर मुखालिफत करने वाले कांग्रेस नेता राकेश यादव भाजपा को बहुत मुफीद लगे
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
तुम ‘देवदुर्लभ’ हो। तुम दरी ही बिछाओ। तुम ‘अनुशासित सिपाही’ हो, तुम खामोश रहो। जो हो रहा है, उस पर एक ‘हर्फ’ न कहो। तुम ‘सिपाही’ हो, पार्टी के लिए जी-जान से लड़ो-भिड़ो, लेकिन बदले में पार्टी से कोई उम्मीद मत रखो। तुम ‘संगठननिष्ठ’ हो, अपने हिस्से के पद-प्रतिष्ठा पर तुम्हारा कोई हक नहीं।
तुम ‘वफादार’ हो, तुम्हें तुम्हारे हिस्से की उपलब्धि के लिए टकटकी लगाए इंतजार ही करना है। तुम पार्टी के लिए भले ही कितना भी खून-पसीना बहा लो, तुम्हें सरकार व संगठन से मोहताज रहना ही होगा। तुम दल को जीत पर जीत दिला रहे हो, तुम पार्टी के हर अभियान, आंदोलन, प्रशिक्षण शिविर में मुस्तैद हो, लेकिन ये मत भूल जाना कि तुम सत्ता के रहमोकरम पर ही रहोगे। तुम कोई दूसरे दल से आए नेता हो? तुम कोई दलबदलू हो? तुम कोई सत्ता व संगठन को तुरत-फुरत ‘लाभ’ देने की स्थिति में हो?
तुम क्या ‘ठाकरे’ वाली भाजपा के नेता-कार्यकर्ता हो? भूलना नहीं है तुम्हें, तुम ‘सत्ता वाली भाजपा’ के अब नेता-कार्यकर्ता हो। जब सत्ता चाहेगी, तब ही तुम्हें कोई पद मिलेगा। संगठन से न्याय की उम्मीद मत करना। वह भी आजकल सत्ता के ही अधीन रहता है। इसलिए जब सत्ता बोलेगी, तब ही तुम उपकृत हो पाओगे। चाहे फिर तुम इसके कितने ही असल हकदार हो। भूलो नहीं, तुम्हारे हिस्से में सिर्फ इंतजार ही है...!
कां ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की खुलकर मुखालिफत करने वाले कांग्रेस के ‘सोफेस्टिक नेता’ राकेश यादव रातोरात व हाथोहाथ अब भाजपाई हो गए हैं। न सिर्फ भाजपाई, बल्कि कमलदल के लिए इतने निष्ठावान कि प्रदेश भाजपा ने उन्हें न सिर्फ कमल का दुपट्टा ओढ़ाया, बल्कि पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पद का पट्टा भी पहना दिया। कांग्रेस से बाहर किए गए यादव इतनी जल्दी भाजपाई हो जाएंगे, ये किसी को इल्म नहीं था।
हाल-फिलहाल उनकी पार्टी में कोई उपयोगिता वैसे नजर आ भी नहीं रही थी। न वे कोई कुशल संगठक या राजनीतिक रणनीतिकार थे, जो भाजपा के काम आते। पार्टी के पास यादव जैसे नेताओं की तो बूथ स्तर पर ही भरमार है। इसके बावजूद वे न सिर्फ भाजपाई हो गए, बल्कि वह पद भी पा लिया, जिसके लिए भाजपा में कई नेताओं के बाल काले से सफेद हो गए। प्रदेश भाजपा के इस फैसले से प्रदेशभर के भाजपाई न सिर्फ हैरत में, बल्कि सकते में भी हैं।
राकेश यादव के जरिये भाजपा में एक बार फिर ‘नरेंद्र सलूजा’ एपिसोड दोहराया गया। स्व. सलूजा तो प्रवक्ता पद पर काम कर ही रहे थे और वे मीडिया को अरसे से कांग्रेस की तरफ से ‘मेंटेन’ कर ही रहे थे। कमलनाथ जैसे नेता के वे खास फरमाबरदार थे।
उस समय उनको तोड़कर भाजपा में लाना शिवराज सरकार का रणनीतिक कदम माना गया था। लिहाजा वे पार्टी को प्रदेश प्रवक्ता के रूप में अनमने ही सही, हजम हो गए थे, लेकिन राकेश यादव को लेकर ऐसा कुछ 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पार्टी में नजर नहीं आ रहा।
उलटे उन्हें प्रवक्ता बनाने पर पार्टी हलकों में गहरी निराशा महसूस हुई है। राकेश यादव मूलतः आरटीआई एक्टिविस्ट हैं और इंदौर विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाएं उनकी सक्रियता का अहम केंद्र रही हैं। प्राधिकरण के भाजपाई दौर में भी उनकी रेसकोर्स रोड पर लगभग नियमित ही दस्तक रही है।
उन्हें कांग्रेस में भी ‘अभिजात्य वर्ग का नेता’ ही माना जाता था, जिसका कार्यक्षेत्र जमीन पर कम, ड्रॉइंग रूम व कॉफी हाउस अथवा सोशल मीडिया, बयान, विज्ञप्ति तक था। अब वे सीधे ‘बोलवचन’ के लिए मशहूर भाजपा के ‘माइक’ बना दिए गए और वह भी प्रदेश स्तर पर। इस फैसले को न सिर्फ भाजपा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में हैरत के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी में सालभर से टकटकी लगाए हो रहा इंतजार... मध्य प्रदेश में एक तरफ भाजपा न तो निगम, मंडलों व प्राधिकरणों में नियुक्ति कर पा रही है, न एल्डरमैन बना पा रही। कई मोर्चे भी नूतन नियुक्तियों की बाट जोह रहे हैं। पार्टी स्तर पर हर बार इस मुद्दे पर हलचल तेज होती है और मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। इंदौर इस सबसे गहरे से वाकिफ है। यहां इंदौर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष व बोर्ड की नियुक्तियों को लेकर तो अब खबरें कम, मजाक व चुटकुले ज्यादा चलने लगे हैं।
एल्डरमैन का हाल ये है कि अब कोई बनना ही नहीं चाहता। बने भी क्यों? नगर निगम का अब कार्यकाल बचा ही कितना? ऐसे ही निगम-मंडल व प्राधिकरण के हाल हो चले हैं। सरकार अपना आधा कार्यकाल पूर्ण कर चुकी है, लेकिन इन जगहों पर नियुक्तियों का इंतजार बरकरार है।
अगर नियुक्तियां होती भी हैं, तो अध्यक्ष व बोर्ड को एक कार्यकाल कार्य करने तक की अवधि नहीं मिलना है। चुनावों की घोषणा के साथ ही सब नियुक्तियां स्वतः ही शिथिल हो जाती हैं। ऐसे में जब पार्टी ‘आयातित नेताओं’ के लिए एकाएक लाल कालीन बिछाती है, तो पार्टी हलकों में रोष के साथ-साथ निराशा व अवसाद भी तेजी से घर कर जाता है। हां, इसमें उज्जैन के सनवर पटेल की पुनः वक्फ बोर्ड में तैनाती व राकेश यादव की बेहतरीन ताजपोशी अपवाद हैं।
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