अफसरों की लापरवाही से सीपी शेखर गार्डन बदहाल: लाखों रुपए खर्च, फिर भी बगीचा उजाड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए पानी की तरह बहाकर तैयार किया गया शहर का सीपी शेखर गार्डन आज अफसरों की घोर लापरवाही और रखरखाव के अभाव में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। तत्कालीन महापौर मालिनी गौड़ के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2019 में इसका कायाकल्प किया गया था। उस समय भारी-भरकम बजट जारी कर इस उद्यान में सुधार किए गए थे, ताकि क्षेत्रीय जनता को एक सर्वसुविधायुक्त गार्डन मिल सके, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है।
यह पूरा इलाका अब असामाजिक तत्वों का अड्डा और कचराघर बनने के कगार पर पहुंच चुका है। इस गार्डन के पुनर्निर्माण के समय स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि उन्हें टहलने के लिए अब अच्छा स्थान मिलेगा, लेकिन निगम के लापरवाह रवैये ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पूरे बगीचे में चारों तरफ गंदगी पसरी पड़ी है।
जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जो निगम की सफाई व्यवस्था का खुलासा खोल रहे हैं। पेड़-पौधों की छंटाई महीनों से नहीं हुई है, जिससे हरी-भरी घास की जगह अब जंगली झाड़ियों ने ले ली है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति यहां बिजली के इंतजामों की है। बिजली के महंगे उपकरण और पैनल बॉक्स खुले पड़े हैं।
तत्कालीन महापौर मालिनी गौड़ के समय साल 2019 में जब गार्डन को संवारा गया था तब यहां बिजली के लैंप लगाए गए थे, ताकि रात के समय पूरा गार्डन रोशनी से जगमगा सके, लेकिन आज निगम की लापरवाही का आलम यह है कि बगीचे से कई जगह से तो ये लैंप ही गायब हो चुके हैं। चोर और असामाजिक तत्व इन्हें निकालकर ले गए। जहां लैंप बचे भी हैं, वहां टूटे पड़े हैं और महीनों से बंद हैं। अंधेरा होते ही पूरा गार्डन असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है।
टूटे और बंद पड़े उपकरण दे रहे बड़े हादसे को आमंत्रण
2019 में हुए जीर्णोद्धार के दौरान इस बगीचे में दिल्ली की तर्ज पर एक विशेष मोदी ट्रैक का निर्माण किया गया था, जिसमें रेत, गिट्टी और मिट्टी सहित विभिन्न तरह की परतों का इस्तेमाल करके एक बेहतरीन एक्यूप्रेशर और वॉकिंग ट्रैक तैयार किया गया था। इस पर सैकड़ों नागरिक टहलने आते थे, लेकिन आज निगम के अधिकारियों की घोर लापरवाही की वजह से रखरखाव के अभाव में यह पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। गिट्टी और रेत बिखर चुकी है, गंदगी पसरी है और ट्रैक पर झाड़ियां उग आई हैं, जिससे इस पर चलना भी दूभर हो गया है।
गार्डन की इस दुर्दशा ने नगर निगम के ढीले रवैया का खुलासा कर दिया है। गार्डन के भीतर बैठने की बेंच तक असामाजिक तत्वों ने तोड़ दी है। साल 2019 में जो महंगे फव्वारे और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाए गए थे, वे अब रखरखाव के अभाव में जंग खाकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। बंद पड़े और टूटे-फूटे बिजली के उपकरण न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी को दर्शाते हैं, बल्कि यहां आने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक बड़ा खतरा भी बने हुए हैं।
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