अई जा हो...इंदर राजा: मानसून में बारिश की जगह बह रहा पसीना; रोज उमड़-घुमड़ रहे, पर बरस नहीं रहे बादल
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंद्र देवता की अहिल्या नगरी से जाने क्या नाराजगी? अगल-बगल के गांव-कस्बों-शहरों पर मेहरबानी
मंदसौर-नीमच से लेकर खरगोन महू तक में हो रही झमाझम, इंदौर से रूठी हुई है बारिश
धरती के कंठ में अब तक महज चार, साढ़े चार इंच पानी, इस बार प्री-मानसून गतिविधियों ने भी नहीं दिया साथ
मौसम महकमा रोज बारिश का जताता अंदेशा, रोज जागती उम्मीदें, बस बूंदाबांदी ही आती हिस्से
अब तो पूर्णिमा पर देवी-देवताओं की भी हो गई ‘स्नान यात्रा’, जन-जन का मन कब भीगेगा योगेश्वर?
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हो...अई जा हो इंदर राजा। अईं-वईं डोली रियो, न यांज आना में थारे नखरो आई रियो। अगल-बगल में तो खूब लाड़ लड़ाई रिया हो, न हमारा सेर में आना में तमारे कंठालो आई रियो। न हम कई तमारे जबरन थोड़े ही न्योति रिया? तमारो आने को टेम हुई गयो है। है कि नी? कोई बेवक्त थोड़ी तमारे बुलाना की राग हम अलापी रिया।
आषाढ़ भी आई गयो अब तो। देवी-देवताओं होण की स्नान यात्रा वाली पूनम भी हुई गी। पानी-छीटा के लेण जो जो जरूरी तामझाम तमारे लगें, वा सबका सब तो आई गया। हव्वा भी ऊनि दिशा से ही बे री है, जिनि तरफ से पाणी वाला बद्दल होण आये। समंदर से हवा उठी री है न सिद्धि मालवा की तरफ आई री।
तमारा आना-जाना की बड़ी-बड़ी बात करवा वालो मौसम का लोग होण ने भी कदे को के दियो की पाणी बाबा को मौसम आई गयो। मौसम तो आई गयो, पन पाणी नि बरसी रियो। बद्दल होण रोज आसमान में उमड़ी-घुमड़ी रिया, पन झमाझम बरसी नि रिया।
या बद्दल होण रोज नाटक तो असो करे कि आज सब बेवा ली जाएगा। काला स्याह हुई जाई रिया हैं। गरजे भी घणा, लेकिन बस बूंदाबादी हुई के नि रे जाए। तमारा नखरा में बदन से पसीनों चुई चुई जाय, पन तमारे तरस नि आय? तरसी जाओ हो इंदर राजा। बरसी जाओ हो इंदर राजा। अबे तो अई जा हो इंदर राजा।
बा रिश की खेंच अब बर्दाश्त नहीं हो रही। राज्य में मानसून की आमद के बाद भी मालवा का ये सिरमौर शहर इंदौर रीता-रीता ही है। हलकी-फुलकी बारिश के अलावा अभी तक अहिल्या नगरी के आंचल में कुछ बड़ा जमा नहीं हुआ है, जबकि मंदसौर-नीमच-धार से लेकर खरगोन तक मानसूनी बादलों की जबरदस्त मेहरबानी बनी हुई है। यहां तक कि बगल के महू व उसके आसपास वन अंचल में भी नदियां बह निकली हैं।
इंदौर के हिस्से में महीनेभर के बाद भी मात्र 4.4 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि महज 6 दिन में हमारे बगल के चोरल में 7 इंच बारिश हो गई। बीते साल जून की विदाई के पहले इंदौर के खाते में करीब 10 इंच बारिश जमा हो चुकी थी। इस बार प्री-मानसून कोटे की बारिश से भी शहर महरूम रह गया, जो एक तरह से मानसून की आमद के पूर्व बोनस की बारिश होती है।
आसमानी हलचल रोज तेज व जोरदार बारिश का इशारा करती है। गगन में बादल छाते भी हैं, लेकिन बात बूंदाबांदी या रिमझिम से आगे नहीं बढ़ रही। कुछ देर तो मौसम का मिजाज यूं रहता है कि आज सब गिले-शिकवे दूर हो जाएंगे, लेकिन सड़कें पूरी तरह भीग भी नहीं पातीं और पानी थम जाता है। बीते साल की तरह बस इंदौर व उज्जैन में ही झमाझम का इंतजार हो रहा है।
शेष मालवा अंचल का एक बड़ा हिस्सा तरबतर हो चुका है। राज्य का पूर्वी हिस्सा भी मानसून की मेहरबानी से भीग रहा है, लेकिन बताया जा रहा है कि इसी पूर्वी हिस्से में आकर मानसून अटक गया है तथा 48 घंटे और लगेंगे इसे आगे बढ़ने में।
यानी मुकम्मल बारिश के लिए अभी 2 दिन का और इंतजार। तब तक बारिश के मौसम में पानी की जगह देह से पसीना बरस रहा है। जन-जन की पेशानी पर पानी की चिंता के साथ साथ पसीना दिख रहा है।
2 जुलाई से नया सिस्टम, 48 घंटे अहम
छह दिन से रुका दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर रफ्तार पकड़ने की तैयारी में है। राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र से सोमवार शाम जारी मौसम की रिपोर्ट के अनुसार अगले 48 घंटे मानसून के आगे बढ़ने के लिहाज से निर्णायक बताए गए हैं।
मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के बड़े हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल बन गई हैं। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश में होगा। मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल सूरत-इंदौर-डाल्टनगंज-मोतिहारी से होकर गुजर रही है।
इस हिसाब से प्रदेश में मानसून अभी अमरकंटक के आसपास रुका हुआ है। अगले 48 घंटे अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान मानसून मध्य प्रदेश के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।
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