बोरिंग भी बंद, टैंकरों के सहारे जिंदगी: इस कॉलोनी में दूषित पानी का ऐसा डर; जलकांड का खौफ आज भी लोगों के मन में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा जलकांड की दहशत अभी शहर के लोगों के जेहन से उतरी भी नहीं थी कि अब वार्ड क्रमांक-16 की महावीर कॉलोनी में दूषित पानी का संकट सामने आ गया है।
वर्षों से नर्मदा जलापूर्ति से वंचित यह कॉलोनी बोरिंग और टैंकरों के भरोसे अपनी प्यास बुझा रही थी, लेकिन अब जिस सरकारी बोरिंग पर सैकड़ों परिवार निर्भर थे, उसमें सीवरेज का पानी मिलने की शिकायत के बाद उसे भी बंद कर दिया गया है। नतीजतन पूरा इलाका टैंकरों के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हो गया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि क्षेत्र में दूषित पानी पीने से एक मासूम बच्ची की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि परिजनों को उसे इंदौर के अस्पतालों से होते हुए इलाज के लिए गुजरात के अहमदाबाद ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद इलाके के रहवासियों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं।
35 साल बाद भी नहीं पहुंची नर्मदा की एक बूंद
महावीर कॉलोनी के रहवासी बताते हैं कि नर्मदा जलापूर्ति की सुविधा नहीं मिल सकी। पूरा क्षेत्र सरकारी बोरिंग पर निर्भर है। कई बार बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिल जाता है।
शिकायत करने पर नगर निगम की टीम चैंबर की सफाई कर चली जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों में समस्या फिर खड़ी हो जाती है। हर आठ-दस दिन में गंदे पानी की शिकायत सामने आती है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
बोरिंग के पानी से ही बुझती है प्यास
पीने के लिए सरकारी बोरिंग का पानी ही इस्तेमाल होता है। हाल के दिनों में यह पानी गंदा आने लगा है। घर के निजी बोरिंग में भी कई बार गंदा पानी आने की समस्या रहती है इतने वर्षों में इलाके का विकास तो हुआ, लेकिन नर्मदा जलापूर्ति आज भी सपना बनी हुई है। लोग मजबूरी में बोरिंग और टैंकर के पानी पर निर्भर हैं।
40 कॉलोनियां नर्मदा जलापूर्ति से वंचित
क्षेत्र की पार्षद सोनाली मुकेश धारकर के अनुसार महावीर कॉलोनी पहले बागड़दा पंचायत क्षेत्र का हिस्सा थी। वर्ष 2012 में इसे नगर निगम सीमा में शामिल किया गया, लेकिन अब तक यहां नर्मदा जलापूर्ति नहीं पहुंच सकी है।
अमृत-2 योजना के तहत क्षेत्र में 30 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए मुक्तिधाम के पास भूमि भी चिन्हित कर ली गई है।
टंकी बनने के बाद जलापूर्ति लाइन बिछाई जाएगी, जिससे करीब 30 से 35 कॉलोनियों को लाभ मिलेगा। पूरे वार्ड की लगभग 40 कॉलोनियां आज भी नर्मदा जल से वंचित हैं। यही कारण है कि लोगों को बोरिंग और टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है।
शिकायत के बाद बंद की गई बोरिंग
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एन.के. भास्कर ने स्वीकार किया कि पूरा क्षेत्र नर्मदा जलापूर्ति से वंचित है और फिलहाल बोरिंग तथा टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि सीवर लाइन ओवरफ्लो होने के कारण कई बार ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
बोरिंग में सीवरेज का पानी आने की शिकायत मिलने के बाद उसे तत्काल बंद कर दिया गया है। अब यहां नया बोरिंग कराया जाएगा, ताकि लोगों को फिर से पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही अमृत-2 योजना के अंतर्गत जलापूर्ति लाइन बिछाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
मामले को लेकर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे भी महावीर नगर पहुंचे और रहवासियों से चर्चा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भागीरथपुरा की तरह यहां भी नगर निगम की लापरवाही सामने आई है।
इलाके की एकमात्र सरकारी बोरिंग में ड्रेनेज का पानी मिलकर सप्लाई होता रहा, लेकिन लोगों की शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दावा किया कि जब वे क्षेत्र में पहुंचे तो करीब 20 लोग बीमार मिले।
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