कमाई में इस शहर से आगे निकला भोपाल: सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा; महिलाएं स्थायी और सुरक्षित रोजगार को दे रहीं प्राथमिकता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर को कमाई के मामले में राजधानी भोपाल ने पीछे छोड़ दिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) के ताजा सर्वे में सामने आया है कि भोपाल के नियमित कर्मचारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की औसत मासिक आय इंदौर के मुकाबले अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि इंदौर में स्वरोजगार करने वालों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनकी औसत कमाई भोपाल से कम दर्ज की गई है।
4,070 लोगों से जानकारी जुटाई
एनएसओ ने मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर को सर्वे में शामिल किया। इसके तहत इन चारों शहरों के 4,070 लोगों से रोजगार, कार्य अवधि और आय से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
काम के घंटे लगभग बराबर, लेकिन कमाई में बड़ा अंतर
सर्वे के मुताबिक इंदौर में पुरुष औसतन 48.1 घंटे और महिलाएं 40.6 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं। दोनों का संयुक्त औसत 46.1 घंटे है। वहीं भोपाल में पुरुष औसतन 48.9 घंटे और महिलाएं 37.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं। कुल औसत 47 घंटे है। यानी दोनों शहरों के कामकाजी घंटों में बहुत कम अंतर है, लेकिन आय में बड़ा अंतर देखने को मिला।
नियमित नौकरी में भोपाल सबसे आगे
सर्वे के अनुसार नियमित कर्मचारियों की औसत मासिक आय इस प्रकार है।
भोपाल: 34,056 रुपए
ग्वालियर: 22,049 रुपए
जबलपुर: 21,682रुपए
इंदौर: 19,180 रुपए
भोपाल के नियमित कर्मचारी इंदौर के मुकाबले औसतन लगभग 15 हजार रुपए अधिक कमा रहे हैं।
स्वरोजगार में भी भोपाल ने बनाई बढ़त
स्वरोजगार करने वालों की औसत मासिक आय भी भोपाल में सबसे अधिक दर्ज की गई।
भोपाल: 29,524 रुपए
इंदौर: 22,586 रुपए
जबलपुर: 19,522 रुपए
ग्वालियर: 18,730 रुपए
हालांकि, इंदौर में स्वरोजगार से जुड़े लोगों का प्रतिशत 50.4% है, जबकि भोपाल में यह 44.6% है। यानी इंदौर में स्वयं का व्यवसाय करने वाले अधिक हैं, लेकिन उनकी औसत आय भोपाल से कम है।
ग्वालियर और जबलपुर की स्थिति
सर्वे के अनुसार ग्वालियर और जबलपुर रोजगार एवं आय के मामले में भोपाल और इंदौर के बीच की स्थिति में हैं। दोनों शहरों में नियमित नौकरी करने वालों की आय स्वरोजगार करने वालों से अधिक दर्ज की गई।
महिलाओं को नियमित नौकरी ज्यादा पसंद
सर्वे में महिलाओं की रोजगार स्थिति भी सामने आई। इंदौर और भोपाल दोनों शहरों में करीब 59 प्रतिशत महिलाएं नियमित वेतनभोगी नौकरियों में कार्यरत हैं। इससे संकेत मिलता है कि महिलाएं स्वरोजगार की तुलना में स्थायी और सुरक्षित रोजगार को प्राथमिकता दे रही हैं।
काम के घंटों की बात करें तो इंदौर की महिलाएं औसतन 40.6 घंटे और जबलपुर की महिलाएं 40.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं, जो लगभग समान है।
सर्वे क्या बताता है?
एनएसओ के आंकड़े संकेत देते हैं कि केवल व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र होना अधिक आय की गारंटी नहीं है। राजधानी भोपाल में नियमित रोजगार, सरकारी एवं संगठित क्षेत्र की नौकरियों की अधिक उपलब्धता और बेहतर वेतन संरचना के कारण औसत आय इंदौर से अधिक दर्ज की गई है।
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