हेरफेर कर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप: भू-माफिया के चंगुल में प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर; सैकड़ों भक्तों ने कलेक्टर दफ्तर पर डाला डेरा
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राऊ क्षेत्र स्थित रंगवासा के प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर को बचाने के लिए आज सैकड़ों की संख्या में भक्त और मंदिर समर्थक कड़ाके की धूप से देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठे रहे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर की ज़मीन और वहां तक जाने वाले मुख्य रास्ते को धन बल से नखराली ढाणी के मालिक संजय अग्रवाल द्वारा अवैध रूप से हड़पा जा रहा है।
समर्थकों का सीधा आरोप है कि स्थानीय राजस्व अधिकारियों और पटवारियों ने मिलीभगत कर सरकारी ज़मीन को निजी खसरे में दर्ज कर दिया है, जिसके चलते मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रवि पाटीदार और बाबा भूतनाथ मंडली के युवाओं ने दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि खसरा नंबर 682, जो कि शासकीय तालाब की पाल है, वहां वर्षों से बाबा का मंदिर स्थित है।
आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने संजय अग्रवाल के साथ साठ-गांठ कर खसरा नंबर 682 को दरकिनार कर, मंदिर को वर्ष 2025 में मनमाने तरीके से खसरा नंबर 654-2/3 में दर्ज करवा दिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वर्ष 2006 के टीएनसीपी रिकॉर्ड में संजय अग्रवाल की भूमि पर मंदिर का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन अब सांठ-गांठ कर इसे निजी संपत्ति का रूप देने की कोशिश की जा रही है।
समर्थकों का यह भी कहना है कि 1925 से लेकर 1958-59 तक जो भूमि सरकारी थी, उसकी 1991-92 में अवैध तरीके से रजिस्ट्री कैसे हो गई, यह बड़ा सवाल है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंची प्रशासनिक टीम और तहसीलदार ने मामले की जांच का आश्वासन देकर धरना समाप्त करने की अपील की, लेकिन आक्रोशित युवाओं ने साफ कर दिया कि वे बीते दो वर्षों से केवल कोरे आश्वासन ही सुन रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक मंदिर जाने का रास्ता नहीं खुलता, पुराने ट्रस्ट को भंग कर जाँच नहीं होती और शासकीय भूमि को पुनः सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता, तब तक यह धरना जारी रहेगा।
मौके पर स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और टीआई सतीश पटेल के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन समर्थक अपनी मांगों पर अड़े रहे।
इसी बीच देर रात वहां से गुजर रहे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जब भारी भीड़ और धार्मिक स्थल के समर्थन में तख्तियां देखीं, तो वे रुक गए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों को देखा, जिसमें राजस्व विभाग की कथित बेईमानी और मंदिर को निजी संपत्ति घोषित करने की कोशिशों के सबूत दिए गए।
महापौर ने इसे न्यायिक लड़ाई करार देते हुए कहा कि केवल धरने से समाधान नहीं होगा। उन्होंने मौके से ही कलेक्टर शिवम वर्मा को फोन लगाने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
फिलहाल, राऊ के भक्त इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए देर रात तक कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर डटे रहे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
संबंधित समाचार

3 साल में 45 बसों में आग:64 की मौत; असंवैधानिक स्लीपर कोच बसों में यात्री कर रहे मौत के साथ सफर!

टंकी से पानी की चोरी:चार कर्मचारी बर्खास्त; निगम की बड़ी कार्रवाई, बजरंग नगर में अवैध टैंकर भरते पकड़े गए कर्मी

डबरी में डूबने से दो दोस्तों की मौत:एक दिन पहले घर से निकले थे; गांव में पसरा मातम

देवास नाका पर वॉल्व खराब आठ इलाकों में पानी का संकट:निगम आयुक्त ने मौके पर पहुंचकर सुधार कार्य शुरू करवाया
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!