दुष्कर्म के बाद हाथ डालकर बच्चेदानी निकाल दी थी: आरोपी को क्या सजा मिली; कोर्ट ने हैवानियत के इस मामले में क्या टिप्पणी की
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, खंडवा।
बहुचर्चित गैंगरेप और हत्या मामले में विशेष अपर सत्र न्यायालय, हरसूद ने मुख्य आरोपी हरिराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि सह-आरोपी सुनील को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। आरोपी ने न केवल हैवानियत की हदें पार करते हुए महिला के साथ दरिंदगी की थी, बल्कि महिला के प्राइवेट पार्ट में हाथ डालकर बच्चेदानी तक बाहर निकाल दी थी। इसके बाद अत्यधिक खून बहने से महिला की मौत हो गई थी।
अदालत ने फैसले में यह कहा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत जघन्य और अमानवीय है। यदि ऐसे मामलों में कठोर दंड नहीं दिया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है।
सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि हरिराम पहली बार अपराध में लिप्त पाया गया है, वह आर्थिक रूप से कमजोर है और उसके परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है। इसलिए उसे नरमी बरती जाए।वहीं विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि यह सामान्य अपराध नहीं, बल्कि अत्यंत क्रूर कृत्य है। ऐसे मामलों में कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी के कृत्य को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या था मामला
23 मई 2025 की रात आदिवासी बाहुल्य खालवा क्षेत्र में एक महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। वह गांव में एक वैवाहिक कार्यक्रम से लौट रही थी। जांच में सामने आया कि आरोपी नशे की हालत में थे। महिला की गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौत हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर हरिराम और सुनील को गिरफ्तार किया था। करीब दो महीने की जांच के बाद 94 पृष्ठों का विस्तृत चालान अदालत में पेश किया गया।
32 गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य
मामले में 11 अगस्त 2025 से सुनवाई शुरू हुई। कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता के परिजन, पड़ोसी, पुलिसकर्मी और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर शामिल थे। अदालत में प्रस्तुत प्रमुख साक्ष्यों में—घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज, खून से सनी वस्तुएं और जब्त सामग्री, डीएनए व फॉरेंसिक रिपोर्ट। उल्लेखनीय है कि मुख्य आरोपी का बेटा भी इस मामले में सरकारी गवाह बना।
सह-आरोपी क्यों हुआ बरी
सह-आरोपी सुनील को अदालत ने बरी कर दिया। उसकी डीएनए रिपोर्ट निगेटिव पाई गई और उसके खिलाफ प्रत्यक्ष वैज्ञानिक साक्ष्य पर्याप्त नहीं मिले। बचाव पक्ष का कहना था कि वह शराब पीने के बाद वहां से चला गया था।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि दंड का उद्देश्य केवल आरोपी का सुधार नहीं, बल्कि समाज में निवारक संदेश देना भी है। इतने गंभीर अपराध में नरमी बरतना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। इस फैसले के साथ लंबे समय से चर्चित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हुआ।
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