अवैध खनन माफिया पर प्रशासन का शिकंजा: 80 हजार घनमीटर से अधिक मुरम की अवैध खुदाई साबित; जेल की सुरक्षा से भी किया खिलवाड़, 26 करोड़ से अधिक अर्थदंड
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में अवैध खनन माफिया के खिलाफ प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है, जिसने साफ कर दिया है कि अब सरकारी संसाधनों की लूट और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के लिए कोई राहत नहीं होगी।
अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य द्वारा न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो अलग-अलग मामलों में अवैध मुरम खनन को प्रमाणित मानते हुए संबंधित भूमिस्वामियों, कॉलोनाइजरों और मशीन मालिकों पर 26 करोड़ 40 लाख 53 हजार 500 रुपए से अधिक का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
इस कार्रवाई ने यह भी साबित कर दिया कि अवैध खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि पर्यावरण, शासन व्यवस्था और संवेदनशील सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा पर भी सीधा हमला है। विशेष रूप से रिंगनोदिया में केंद्रीय जेल की सीमा तक अवैध उत्खनन किए जाने का तथ्य सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में माना।
प्रशासन ने दस्तावेजों से खोली माफिया की परतें... पूरे प्रकरण में सहायक खनिज अधिकारी की रिपोर्ट, स्थल पंचनामा, फोटोग्राफ, राजस्व अभिलेख, परिवहन अनुमति, न्यायालयीन सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज और पक्षकारों के तर्कों का विस्तृत परीक्षण किया गया।
इसके बाद न्यायालय अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने स्पष्ट निष्कर्ष निकाला कि स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक मुरम का खनन किया गया तथा इसके लिए कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं थी।
यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रशासन ने केवल मौके की कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि तकनीकी और कानूनी आधार पर पूरे मामले को मजबूत बनाकर अंतिम निर्णय तक पहुंचाया।
पहला मामला...
30 हजार घनमीटर मुरम की अनुमति निकाली 80 हजार घनमीटर से ज्यादा
ग्राम रिंगनोदिया, तहसील सांवेर स्थित सर्वे क्रमांक 213/1/1 रकबा 4.171 हेक्टेयर की भूमि पर भूमि समतलीकरण के नाम पर केवल 30 हजार घनमीटर मुरम निकालने की छह माह की अनुमति दी गई थी। जांच में 80,204.811 घनमीटर मुरम निकालने का खुलासा हुआ।
यानी स्वीकृत मात्रा से लगभग 50 हजार घनमीटर से अधिक अतिरिक्त खनन किया गया। न्यायालय अपर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में खनन बिना वैध अनुमति के किया जाना पूरी तरह प्रमाणित है।
कॉलोनी विकास की अनुमति का भी किया दुरुपयोग... जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भूमि स्वामी की सहमति और ऑथराइजेशन लेटर के आधार पर कॉलोनाइजर द्वारा खनन कराया गया। कॉलोनी विकास अनुज्ञा क्रमांक 282/2023 दिनांक 03 जुलाई 2023 की शर्त क्रमांक 24 में स्पष्ट उल्लेख था कि समतलीकरण के दौरान खनिज नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। न्यायालय ने माना कि भूमिस्वामी और डेवलपर दोनों की आपसी साठगांठ के बिना इतना बड़ा अवैध खनन संभव नहीं था।
24 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड अर्थदंड
मामले में भूमि स्वामी सतीश चौधरी तथा वाइब्रेंट वृक्ष डेवलपर्स के पार्टनर अमित पारिख को दोषी मानते हुए प्रस्तावित 12.03 करोड़ रुपए की शास्ति को दोगुना कर 24 करोड़ 6 लाख 16 हजार 460 रुपए का अर्थदंड लगाया गया।
साथ ही आदेश दिया कि राशि तत्काल खनिज विभाग के निर्धारित मद में जमा कर चालान प्रस्तुत किया जाए। यदि राशि जमा नहीं होती है, तो मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 के नियम 22 के तहत भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूली की जाएगी।
जेल की सुरक्षा तक से किया खिलवाड़
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू केंद्रीय जेल की सुरक्षा से जुड़ा मिला। 14 अगस्त 2023 को जारी अनुमति की शर्त क्रमांक 6 में स्पष्ट लिखा गया था कि जेल की सीमा से 20 मीटर दूरी छोड़कर ही खनन किया जाएगा, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि खुदाई जेल की सीमा से मात्र 10.60 मीटर तक पहुंच गई थी।
न्यायालय ने माना कि यह केवल अनुमति का उल्लंघन नहीं, बल्कि संवेदनशील सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही और बदनीयती का परिचायक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का खनन जेल परिसर की संरचनात्मक सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता था।
दूसरा मामला...
बड़े पैमाने पर खनन: सक्षम प्राधिकारी या पुलिस को शिकायत नहीं दी गई
ग्राम माचला, तहसील राऊ स्थित सर्वे क्रमांक 248/49 रकबा 1.336 हेक्टेयर में 7811.671 घनमीटर मुरम का बिना अनुमति खनन किया गया।
नहीं चली भूमिस्वामियों की दलील... न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट कहा कि भूमि गोपीचंद और चंपाबाई के नाम दर्ज है। ऐसी स्थिति में यहां हो रही अवैध गतिविधि की सूचना देना और उसे रोकना भूमिस्वामी का कानूनी दायित्व था।
इतने बड़े पैमाने पर खनन होने के बावजूद किसी भी सक्षम प्राधिकारी या पुलिस को शिकायत नहीं दी गई। न्यायालय ने इसे मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि मौन सहमति माना।
मशीन मालिक भी गिरफ्त में... खनन में प्रयुक्त एक्सकेवेटर मशीनों की भूमिका भी सामने आई। जांच में पाया गया कि मशीनों का उपयोग सीधे अवैध खनन में किया गया। इसी आधार पर वाहन मालिक राजेश जिराती और सुधीर चौधरी को भी दोषी माना गया। न्यायालय ने कहा कि मशीन उपलब्ध कराना भी अवैध खनन में प्रत्यक्ष भागीदारी है।
कानून की नजर में भूमिस्वामी भी जिम्मेदार... इन आदेशों का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि केवल ठेकेदार या मशीन संचालक ही नहीं, बल्कि भूमिस्वामी भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
यदि उनकी जमीन पर अवैध खनन होता है और वे इसकी सूचना नहीं देते, तो उन्हें भी बराबर का उत्तरदायी माना जाएगा। यह सिद्धांत भविष्य में अवैध खनन के मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
सुपुर्दगी निरस्त 2.34 करोड़ का अर्थदंड
मामले में भूमिस्वामी गोपीचंद, चंपाबाई तथा मशीन मालिक राजेश जिराती और सुधीर चौधरी पर 2 करोड़ 34 लाख 37 हजार 40 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके साथ मशीनों की पूर्व में दी गई सुपुर्दगी भी निरस्त कर दी गई।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश- नहीं चलेगी खनिज संपदा की लूट
इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग अब अवैध खनन के मामलों में केवल वाहन पकड़ने या एफआईआर तक सीमित नहीं रहेंगे। पूरे आर्थिक नुकसान का आकलन कर दोषियों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
यह कार्रवाई उन लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो भूमि समतलीकरण, कॉलोनी विकास या अन्य कार्यों की आड़ में खनिज संपदा का अवैध दोहन करते हैं।
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