देखिए वीडियो: मुख्यमंत्री बोले; काल गणना, विज्ञान और अध्यात्म की धरती यह शहर, सिंहस्थ से पहले मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में होगा विकास
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस पर उज्जैन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए।
इस दौरान उन्होंने उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ शहर में चल रहे विकास कार्यों और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन काल गणना, विज्ञान, अध्यात्म और दर्शन की समृद्ध धरती है और शहर को आधुनिक तकनीक तथा आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
वैदिक घड़ी से प्राचीन काल गणना पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में वैदिक घड़ी के माध्यम से भारतीय काल गणना की प्राचीन परंपरा और उसके वैज्ञानिक महत्व को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन की पहचान केवल धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि काल गणना और विज्ञान की परंपरा से भी जुड़ी रही है।
उन्होंने उज्जैन में आईटी पार्क और डीप-टेक रिसर्च पार्क के माध्यम से तकनीक, नवाचार और व्यापार से जुड़े नए अवसर विकसित करने की बात कही।
इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन क्षेत्र को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री सिंहस्थ-2028 से जुड़े विकास कार्यों को इंदौर-उज्जैन क्षेत्र और आसपास के जिलों से जोड़कर विकसित करने की बात कह चुके हैं।
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क, परिवहन, घाट, पर्यटन और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है।
दो साल बाद उज्जैन में सिंहस्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में करीब दो साल बाद सिंहस्थ-2028 आयोजित होने जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं का सरकार की ओर से अभिनंदन किया।
उन्होंने कहा कि धर्मसभा से जनकल्याण और समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शन मिलेगा। सरकार सिंहस्थ की तैयारियों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।
जून 2026 में आयोजित सिंहस्थ कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान भी बताया था।
सिंहस्थ से दुनिया के सामने आएगी मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान
मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के माध्यम से मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
सरकार की ओर से आयोजन के लिए स्थायी आधारभूत ढांचे और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 के लिए 2027 की दीपावली तक प्रमुख विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य भी सरकार की ओर से पहले बताया जा चुका है।
महाकाल लोक के बाद धार्मिक पर्यटन में वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है। उनके अनुसार, पहले जहां करीब 60-70 लाख श्रद्धालु उज्जैन आते थे, वहीं पिछले वर्ष यह संख्या करीब 8 करोड़ तक पहुंच गई।
हालिया रिपोर्टों में भी मुख्यमंत्री के हवाले से पिछले वर्ष उज्जैन में 8 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही गई है। वहीं, इस वर्ष यह संख्या 12 करोड़ से अधिक होने का अनुमान मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया है।
आस्था के साथ तकनीक पर भी फोकस
उज्जैन में धार्मिक पर्यटन बढ़ने के साथ तकनीक आधारित व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है। महाकाल मंदिर की ‘त्रिनेत्र’ AI आधारित निगरानी प्रणाली को 2026 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है।
इसमें AI कैमरों के जरिए भीड़ प्रबंधन, निगरानी और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इन तकनीकी व्यवस्थाओं को और विस्तार देने की तैयारी भी बताई गई है।
संतों के योगदान को किया याद
समारोह में मुख्यमंत्री ने संत समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज कल्याण और जनसेवा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि के प्राकट्य दिवस पर आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर शहर को आने वाले समय के लिए तैयार किया जा रहा है।
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