बुरा जो देखन मैं चला विपक्ष से बड़ा न कोई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच तीखा वाकयुद्ध लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों पक्षों की ओर से की जा रही व्यक्तिगत टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को और अधिक गरमा दिया है।
विपक्ष की स्थिति कमजोर है और इसी की छटपटाहट में विपक्ष के नेता मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से टारगेट करने लगे हैं। यहां तक कि उनके परिवार तक पर टीका-टिप्पणी की जाने लगी है।
अशोभनीय तरीके से मुख्यमंत्री पद का उपहास करना विपक्षी नेताओं का फ्रस्ट्रेशन ही कहा जाएगा, जो विपक्ष की भूमिका में लगातार विफल साबित हो रहे हैं, इसीलिए मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करने लगे।
यह भी कहा जा रहा है कि विपक्ष के नेता मुख्यमंत्री से नाराज भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के मन की बात भी व्यक्त करते हैं, यानी प्रायोजित आरोप-प्रत्यारोप कार्यक्रम चलता रहता है, जिससे जनता का कुछ लेनादेना नहीं रहता।
मुख्यमंत्री वैसे शांत, सरल और गंभीर नेता हैं, जो बहुत कुछ करना चाहते हैं। लाग-लपेट वाले भाषणों से दूर अपने कार्यों से वे खुद को साबित करते हैं।
शायद यही विपक्ष को और भाजपा में मुख्यमंत्री से नाराज नेताओं को रास नहीं आ रहा। इसीलिए मुख्यमंत्री का अब व्यक्तिगत रूप से मजाक उड़ाने की घिनौनी राजनीति की जा रही है।
राजनीतिक संदर्भ में यदि कोई प्रतिद्वंद्वी नेता किसी नेता के लिए हलके शब्दों का उपयोग करता है और उपहास उड़ाता है, तो उसका उद्देश्य व्यक्तिगत और चर्चा में बने रहने की टेक्टिक्स (जुगत) ज्यादा है। आज की मुद्दाविहीन राजनीतिक नौटंकी में यही सब कुछ करने की होड़ मची है।
आमतौर पर किसी नेता की राजनीतिक विश्वसनीयता, गंभीरता या जनाधार पर सवाल उठाना होता है तो गरिमा को ध्यान में रखते हुए कटाक्ष किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके उलट है।
मुख्यमंत्री को टारगेट कर नीचा दिखाने के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग और व्यक्तिगत हमले विपक्ष द्वारा किए जाते हैं। यह बताता है कि विपक्ष की नीयत ठीक नहीं है।
सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह, लेकिन व्यक्तिगत दुराग्रह विपक्ष को शोभा नहीं देता।
जहां तक विपक्षी नेता का प्रश्न है, वे मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और पूर्व मंत्री रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें आक्रामक विपक्षी नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सरकार और मुख्यमंत्री पर अत्यधिक व्यक्तिगत हमले करने का आरोप लगाते हैं।
विपक्ष के नेता हर किसी पर हावी होने की पाखंडी राजनीति के चक्कर में अपनी असल राजनीतिक पहचान खोते जा रहे हैं। उनकी जुबान नियंत्रित तो है नहीं, इस पर नीम चढ़े करेले की तरह वे हलके स्तर की राजनीति पर उतारू हो जाते हैं।
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