इस कंपनी को राहत: याचिका संशोधन के लिए इतने दिन की मोहलत; दो सप्ताह में फैसला देने की उम्मीद
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
शराब लाइसेंस नवीनीकरण और आबकारी विभाग की निविदा प्रक्रिया से जुड़े सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण राहत देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को पूरे विवाद की एक साथ सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि लाइसेंस और निविदा से जुड़े सभी मुद्दों पर डिवीजन बेंच ही सुनवाई करेगी, ताकि मामले का एक समेकित और स्पष्ट निर्णय हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी रिट याचिका में संशोधन करने के लिए तीन दिन का समय दिया है और उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट, यदि संभव हो, तो दो सप्ताह के भीतर मामले का निस्तारण करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की दोनों प्रमुख शिकायतें आपस में जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अलग-अलग बेंच में सुनवाई करने के बजाय पूरे मामले पर एक ही डिवीजन बेंच को फैसला करना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सभी पक्ष हाईकोर्ट के समक्ष अपने-अपने तर्क रखने के लिए स्वतंत्र होंगे।
क्या है पूरा मामला
विवाद दो अलग-अलग आदेशों से जुड़ा है। 12 जून 2026 को आबकारी आयुक्त ने शराब दुकानों की निविदा (Notice Inviting Tender - NIT) जारी की, जिसमें आवेदन के लिए वैध शराब लाइसेंस होना अनिवार्य रखा गया।
18 जून 2026 को सोम डिस्टिलरीज के विभिन्न शराब लाइसेंसों के नवीनीकरण के आवेदन निरस्त कर दिए गए। कंपनी ने दोनों आदेशों को एक ही रिट याचिका (क्रमांक 22400/2026) में चुनौती दी थी।
रोस्टर व्यवस्था बनी विवाद की वजह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की रोस्टर व्यवस्था के कारण मामला दो हिस्सों में बंट गया था। निविदा (टेंडर) से जुड़े मामलों की सुनवाई डिवीजन बेंच के पास थी। जबकि लाइसेंस नवीनीकरण से जुड़े मुद्दे सिंगल बेंच को भेज दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने माना कि जब दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, तो उनकी अलग-अलग सुनवाई उचित नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश में किया संशोधन
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 23 जून 2026 के आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि याचिका में मांगी गई राहत क्रमांक 5, 6 और 7 पर भी अब डिवीजन बेंच ही सुनवाई करेगी। इससे पहले इन मुद्दों को सिंगल बेंच के पास भेजा गया था।
पहले हाईकोर्ट ने क्या कहा था
23 जून 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राहत क्रमांक 1 से 4 तक पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता के पास वैध शराब लाइसेंस नहीं था, इसलिए वह निविदा प्रक्रिया में भाग लेने का पात्र नहीं था।
वहीं बाकी मुद्दों को सिंगल बेंच के समक्ष भेज दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को बदलते हुए पूरे मामले की सुनवाई एक ही डिवीजन बेंच के समक्ष करने का निर्देश दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब लाइसेंस नवीनीकरण और आबकारी विभाग की निविदा प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सिद्धांतों पर भी असर डाल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही विवाद से जुड़े मामलों की अलग-अलग बेंच में सुनवाई होने से फैसलों में असंगति की स्थिति बन सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में समेकित सुनवाई न्यायहित में अधिक उपयुक्त है।
अब आगे क्या होगा
सोम डिस्टिलरीज को याचिका में संशोधन के लिए 3 दिन का समय मिलेगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पूरे मामले की एक साथ सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट दो सप्ताह के भीतर फैसला सुनाएगा।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मामले की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है और अब शराब लाइसेंस तथा निविदा से जुड़े सभी विवादों पर एक ही पीठ अंतिम फैसला सुनाएगी।
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