वीडियो देखिये, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उमंग सिंघार की प्रतिक्रिया: जनादेश से विश्वासघात करने वालों को जवाबदेह बनाना जरूरी; नेता प्रतिपक्ष ने फैसले का किया स्वागत
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़े बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्मला सप्रे के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने के भीतर निर्णय लेने को कहा है।
इस आदेश के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि अदालत का यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की गरिमा को मजबूत करने वाला है।
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में जल्द, निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय लेंगे।
जनादेश के साथ विश्वासघात का मामला उठाया
उमंग सिंघार ने अपने बयान में कहा कि जनता ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जिताकर विधानसभा भेजा था। ऐसे में जनादेश के साथ विश्वासघात करने वालों को दल-बदल कानून के तहत जवाबदेह बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है। कांग्रेस की ओर से इस मामले में लगातार कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है।
क्या है निर्मला सप्रे का दल-बदल विवाद?
निर्मला सप्रे वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं। मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान वह राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी वाले भाजपा के कार्यक्रम में पहुंची थीं। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने उनके भाजपा में शामिल होने का आरोप लगाया और दल-बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की।
उमंग सिंघार ने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी। लंबे समय तक निर्णय नहीं होने पर उन्होंने पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अब विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने में लेना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आने वाले दल-बदल संबंधी मामलों का समय पर निपटारा होना चाहिए। विधानसभा का कार्यकाल शेष होने या तत्काल जल्दबाजी नहीं होने के आधार पर ऐसे मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने या उन्हें अयोग्य घोषित करने का फैसला नहीं सुनाया है। इस मामले में अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष को ही लेना है।
कांग्रेस को फैसले का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब मध्यप्रदेश की राजनीति में निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उमंग सिंघार ने विश्वास जताया है कि विधानसभा अध्यक्ष संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए निष्पक्ष निर्णय लेंगे। अब सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं।
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