मुख्यमंत्री के ‘भागे हुए दूल्हे’ वाले तंज के केंद्र में यह नेता: भाजपा में आने के बाद भी अब तक नहीं मिला बड़ा दायित्व; प्रदेश की राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा कांग्रेस पर किए गए ताजा राजनीतिक हमले में जिस "भागे हुए दूल्हे" का जिक्र किया गया, वह कोई और नहीं बल्कि इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी अक्षय कांति बम हैं। दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अक्षय बम को अब तक पार्टी में कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं मिली है।
सीएम ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
इंदौर में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला बोला था। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बरात लेकर निकली थी, लेकिन उसका दूल्हा ही भाग गया और बरात खड़ी रह गई। राजनीतिक गलियारों में इसे अक्षय कांति बम के संदर्भ में देखा गया, जिन्होंने चुनाव मैदान से हटकर भाजपा का दामन थाम लिया था।
लोकसभा चुनाव के बीच बदला था राजनीतिक घटनाक्रम
लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने अक्षय कांति बम को इंदौर सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नामांकन दाखिल करने के बाद चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था। हालांकि नाम वापसी की प्रक्रिया के दौरान अचानक राजनीतिक घटनाक्रम बदल गया। अक्षय बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया और उसी दिन भाजपा नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। उस समय उनकी भाजपा में एंट्री प्रदेश की राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गई थी।
शपथपत्र को लेकर भी हुआ था विवाद
नामांकन वापसी के कुछ समय बाद अक्षय बम द्वारा न्यायालय में दिए गए एक शपथपत्र को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। उस शपथपत्र में उन्होंने कथित रूप से लिखा था कि उन पर चल रहे कानूनी मामलों और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण चुनाव छोड़ने की स्थिति बनी। बाद में इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई और मामला चर्चा का विषय बना रहा।
भाजपा में सक्रिय, लेकिन जिम्मेदारी का इंतजार
भाजपा में शामिल होने के बाद अक्षय बम लगातार पार्टी गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देते रहे हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के करीबी माने जाते हैं। हाल के महीनों में वे कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी नजर आए हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक संगठन या किसी सरकारी निकाय में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है।
पुनर्वास की चर्चाएं तेज
राजनीतिक हलकों में लंबे समय से चर्चा है कि अक्षय बम के राजनीतिक पुनर्वास को लेकर पार्टी स्तर पर विचार चल रहा है। उनके नाम की चर्चा विभिन्न निगम-मंडलों और अन्य संस्थाओं में संभावित नियुक्तियों को लेकर होती रही है।
सूत्रों के अनुसार इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के संचालक मंडल या अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में उनकी नियुक्ति की संभावनाओं को लेकर भी अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
हाल ही में अक्षय बम को एक पुराने आपराधिक मामले में भी राहत मिली है। कानूनी बाधाएं कम होने के बाद अब उनके समर्थकों को उम्मीद है कि पार्टी उन्हें जल्द किसी महत्वपूर्ण भूमिका में जिम्मेदारी दे सकती है। फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान के बाद एक बार फिर अक्षय बम का नाम राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद भी उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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