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जल का हलाहल: जहरीले जल पर घूंट गटकने को मजबूर मेयर; जलसंकट पर महापौर को मिला मुख्यमंत्री का साथ

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 12:58 pm
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जल का हलाहल

कांग्रेस की जहरीले जल की रिपोर्ट को संबंधित वार्ड-इलाके में ही गलत साबित करने की हुई शुरुआत

महापौर जलप्रदाय के समय पर सीधे नल से आते जल को पीकर बता रहे ‘गुणवत्ता’

इंदौर में जल पर घिरी निगम परिषद के बचाव में विधायक, सांसद, मंत्री की गैरहाजिरी संगठन में हुई नोटिस

मुख्यमंत्री के कांग्रेस पर हमलावर होते ही थम गया इंदौर में जलसंकट का शोर, आंदोलन का दौर

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार जहरीले जल का ‘हलाहल’ महापौर पुष्यमित्र भार्गव को ही गटकना पड़ा। जल वैसे तो कभी ‘हलाहल’ यानी जहर होता नहीं। माई नर्मदाजी का तो हरगिज नहीं हो सकता, लेकिन इंदौर में ये ही नर्मदाजी का नीर, निर्मल न होकर हलाहल हो गया।

प्रतिपक्ष ने सरेआम ये साबित भी किया कि अहिल्या नगरी के बाशिंदे जो जल पी रहे हैं, वह 90 फीसदी तक जहरीला है। प्रतिपक्ष ने इस दावे को एक रिपोर्ट के जरिये सच साबित करने की कोशिश की।

नतीजे में इंदौर की ‘नगर सरकार’ ही नहीं, प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार तक ये ‘जल के हलाहल’ की लहरें पहुंची। सरकार व संगठन को उम्मीद तो अपने ‘भाजपाई इंदौर’ से ही थी कि इतने सारे विधायक हैं, दो-दो सांसद हैं, दो कद्दावर मंत्री हैं, हारे-जीते नेताओं की भीड़ है, लाल-पीली बत्ती की आस में दौड़ लगाते नेता हैं, लिहाजा सब इस जल के हलाहल के विपक्षी हल्ले से निपट लेंगे, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।

स्थानीय सत्तारूढ़ दल के कुल में घुली कलह के कारण नीम सन्नाटा पसरा हुआ था। ले-देकर नगर निगम, उसका अमला-अफसर और निगम मुखिया ही इस हलाहल के सामने थे। शहर जल में हलाहल की ‘रिपोर्ट’ से सहम गया था।

लिहाजा स्वयं ‘सरकार’ को सामने आना पड़ा। और देख लीजिए, जिस दिन से ‘सरकार’ प्रतिपक्ष पर हमलावर हुई, उस दिन से शहर में जलसंकट का शोर व आंदोलनों का दौर थम-सा गया।

शहर के जलसंकट पर महापौर को अपने ही दल के इंदौरी नेताओं व जनप्रतिनिधियों का साथ भले नहीं मिला, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री का साथ जरूर मिल गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर पहले तो संकट के समाधान पर ठोस पहल की और बाद में कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को जल पर मचाए जा रहे शोर के चलते आड़े हाथों लिया।

सीएम ने शहर के जलप्रदाय सिस्टम की कमान राजधानी के हाथों में दी और जिम्मेदारी शहर के साथ-साथ भोपाली अफसरों को भी सौंप दी। स्वयं द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की ताकीद के साथ सीएम ने साफ कर दिया कि जलसंकट के नाम पर पार्टी की बदनामी नहीं होने दी जाएगी और न इंदौर को ‘जगहंसाई’ का सेंटर बनने देंगे।

विधायकों, सांसदों व मंत्रियों की खामोशी को सीएम ने मुखर होकर आईना भी दिखा दिया कि जल समस्या से निदान सामूहिक प्रयासों का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री के साथ ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को नई ऊर्जा व संबल दिया। लिहाजा वे भी निकल गए ‘हलाहल’ गटकने। जी हां, मेयर ने उन वार्डों व इलाकों का दौरा शुरू कर दिया, जहां के जल को कांग्रेस की जांच रिपोर्ट में 90 फीसदी तक जहरीला करार दिया गया था।

मेयर ने तय किया कि वे इन सभी इलाकों में जलप्रदाय के समय ही आने वाले जल को सीधे पीकर दिखाएंगे और कांग्रेस अध्यक्ष के उस दावे को खारिज करेंगे, जिसमें कहा गया था कि पीने के पानी से शहरवासी बीमार हो रहे हैं।

मेयर ने इसकी शुरुआत उसी सुदामा नगर से की, जहां का सबसे ज्यादा हल्ला ‘जहरीले जल की रिपोर्ट’ पर था और जो स्वयं महापौर का गृह क्षेत्र है।

जहरीला पानी बताने वाले जीतू पटवारी को महापौर ने सुदामा नगर में सार्वजनिक रूप से पानी पीकर जवाब दिया। मेयर कैंप ने इस कवायद को जीतू पटवारी की रिपोर्ट की पोल खोल अभियान नाम दिया। महापौर ने पटवारी के दावों को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए सुदामा नगर क्षेत्र में लोगों के घर पहुंचकर नल का पानी पीया।

गौरतलब है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस वार्ता कर दावा किया था कि इंदौर शहर का लगभग 90 प्रतिशत पानी जहरीला है। उन्होंने विशेष रूप से सुदामा नगर क्षेत्र के पानी को पीने योग्य नहीं बताते हुए कहा था कि यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। पटवारी ने यह दावा एक कथित जांच रिपोर्ट के आधार पर किया था।

कांग्रेस के दावे की होगी जांच, पटवारी शेष रिपोर्ट भी पेश करें : मेयर
इसी रिपोर्ट और दावों को गलत साबित करने के लिए दो दिन पहले महापौर सुदामा नगर के उन घरों में पहुंचे, जिनका उल्लेख रिपोर्ट में किया गया था।

यहां उन्होंने रहवासियों के बीच सार्वजनिक रूप से नल का पानी पीकर यह संदेश दिया कि पानी पूरी तरह सुरक्षित और पीने योग्य है।

महापौर का कहना है कि पटवारी जिस सुदामा नगर क्षेत्र के पानी को जहरीला बता रहे थे, उसी पानी को मैंने लोगों के बीच सार्वजनिक रूप से पीया।

जिस स्थान से उन्होंने सैंपल लिया था, वहीं का पानी मैंने पीया और पिछले कई महीनों से यहां के रहवासी भी यही पानी पी रहे हैं। कोई बीमार नहीं है।

न मैं बीमार हुआ। उन्होंने कहा जीतू पटवारी ने 240 सैंपल लेने का दावा किया था, लेकिन सार्वजनिक रूप से केवल 130 लोगों की सूची जारी की गई।

यदि बाकी नाम भी उपलब्ध कराए जाएं तो उन स्थानों की भी जांच कराई जाएगी। कांग्रेस को देश के सबसे साफ शहर को यूं बदनाम नहीं करना चाहिए।

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