रंगदारी के करोड़ों का राजपाल कनेक्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बिल्डर विवेक दम्मानी से पांच करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में जांच का फोकस धमकी देने वालों नहीं, उन संभावित ठिकानों पर भी है, जहां रकम पहुंचना थी। एसआईटी और क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आर्थिक नेटवर्क की परतें खुलती नजर आ रही हैं।
जांच एजेंसियों की नजर फरार राजपाल व उसके करीबी लोगों के बैंक खातों पर टिकी है। सूत्रों के अनुसार जांचकर्ताओं को आशंका है कि कथित रंगदारी नेटवर्क से जुड़े पैसे का बड़ा हिस्सा राजपाल तक पहुंचा हो सकता है।
इसी संभावना के चलते उसके बैंक खातों, लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है बैंकिंग ट्रेल से कई अहम सुराग हाथ लग सकते हैं।
सूत्रों का दावा है जांच एजेंसियां केवल राजपाल के खातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके करीबी संपर्कों और कथित सहयोगियों के खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। हाल के महीनों में हुए बड़े ट्रांजेक्शन, नकद जमा व संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को विशेष रूप से खंगाला जा रहा है।
जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है संगठित अपराध में अक्सर पैसे की आवाजाही नेटवर्क का सबसे मजबूत सबूत बनती है। यही वजह है कि एसआईटी अब आर्थिक पहलू को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानकर आगे बढ़ रही है।
क्या करोड़ों की रकम तक पहुंच जाएगी जांच?
सूत्रों का कहना है जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बड़ी रकम इधर-उधर होने की आशंका है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस संभावना को गंभीरता से देख रही हैं कि कथित रंगदारी से जुड़े आर्थिक लाभ का हिस्सा अलग-अलग माध्यमों से छिपाने की कोशिश की गई हो।
वित्तीय दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड से इन आशंकाओं की पुष्टि होती है तो मामले में धन शोधन (मनी ट्रेल) और अवैध संपत्ति से जुड़े नए पहलू भी सामने आ सकते हैं।
पूछताछ के बाद बाबा पहुंचा जेल
दूसरी ओर राहुल उर्फ बाबा से पूछताछ में मिले इनपुट पर कई स्थानों पर जांच की जा रही है। देवास से जब्त कार, मोबाइल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क और वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
वही कल राहुल उर्फ बाबा को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है मामला केवल एक कारोबारी को धमकाकर रकम मांगने का नहीं रह गया है।
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है गिरोह का आर्थिक ढांचा क्या था, रकम कहां जमा की जाती थी, कौन प्रबंधन करता था और किनको लाभ पहुंचता था।
फिलहाल एसआईटी की नजर राजपाल और उसके नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल से आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल रंगदारी कांड के कई छिपे चेहरों का खुलासा हो सकता है।
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