भूमाफियाओं को संरक्षण दे रही है पुलिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नागदा।
डाबरी निवासी राजूबाई पन्नालाल गुर्जर ने 2008 में अपनी खरीदी हुई कृषि भूमि की 2024 में कथित दोहरी बिक्री और फर्जी नामांतरण के मामले में मंडी पुलिस पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए आईजी से शिकायत की है।
पीड़िता के अनुसार दो साल पहले शिकायत पर कार्रवाई की बजाए पुलिस उसे ही बार-बार थाने बुलाकर मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान करती रही। एसपी के निर्देश पर भी जब कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट की शरण में पहुंची।
प्रथम श्रेणी न्यायाधीश सोनम शर्मा ने 23 मई को 10 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। कोर्ट में केस दर्ज होने के बाद पीड़िता ने वरिष्ठ एडवोकेट विजय वर्मा के माध्यम से सोमवार को आईजी के नाम शिकायत सीएसपी विक्रम अहिरवार को सौंप कर मांग की है मंडी थाने के तत्कालीन जांच अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाए ।
पुलिस के रवैए पर अभिभाषक संघ का कड़ा रुख- सोमवार को आईजी के नाम शिकायत सौंपने सीएसपी विक्रम अहिरवार के समक्ष पीड़िता राजूबाई के समर्थन में अभिभाषक संघ भी उतरा।
अध्यक्ष विजय वर्मा ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई ऐसे मामलों का जिक्र किया जिसमें मंडी व बिड़लाग्राम थाना पुलिस कार्रवाई के पर्याप्त आधार होते हुए भी आरोपियों को बचा रही है। कार्रवाई की बजाए पुलिस स्वयं ही सेटिंग में लगी रहती है।
10 आरोपियों में पांच महिलाएं- रामचंद्र पिता बद्री निवासी ग्राम बनबना, लीलाबाई पिता बद्री निवासी ग्राम रुपेटा, सोहनबाई पिता ब्रदीलाल निवासी ग्राम खेड़ी खजूरिया, अंबाराम पिता हरिराम, माधु पिता हरिराम, लालू पिता हरिराम, शोभाराम पिता हरिराम सभी निवासी ग्राम डाबरी, बसंताबाई पति मोहनलाल , निवासी ग्राम कचनारिया, रुकमाबाई पति रणछोड़लाल, निवासी हिड़ी, राजूबाई पति राजाराम निवासी ग्राम हिड़ी।
एक नजर में मामला
पीड़िता का आरोप है भूमि विक्रेताओं ने पहले उसके पक्ष में मुख्त्यारनामा म और रजिस्ट्री निष्पादित की, बाद में उसी भूमि का सौदा किसी अन्य व्यक्ति से कर दिया। ग्राम बनबना स्थित सर्वे नंबर 692/1 एवं 693 की भूमि का सौदा विधिवत दस्तावेजों से किया था।
नामांतरण की प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान आरोपितों ने उक्त भूमि को पुनः किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कर दी। शिकायत नागदा पुलिस से भी की थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आवेदन में संबंधित रजिस्ट्री, स्टाम्प दस्तावेज और अन्य अभिलेख संलग्न कर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज करने की मांग पुलिस से की गई, मगर जब पुलिस ने महीनों कार्रवाई नहीं तो पीड़िता एसपी के पास पहुंची, जहां से मिले निर्देश पर भी कार्रवाई नहीं की मजबूरन उन्हें कोर्ट में मामला ले जाना पड़ा।
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