ऐसी रची लीला.. झूम रहे सब 'मोहन' संग: तीर चला लखन पर शिकार हुए 'असंतुष्ट' योद्धा; मुख्यमंत्री ने फिर लिया बोल्ड और जीरो टॉलरेंस डिसीजन
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ संतोष पाटीदार, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अब गए... तब गए... कुर्सी की पतंग अब कटी...तब कटी.... अब नहीं बचेगी कुर्सी... ऐसे तमाम सारे कयास प्रोपेगेंडा बदनाम करने के सारे कर्मकांड प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ सुनाई पड़ते रहे। इतना होने के बाद भी प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की सेहत पर कोई असर नहीं हुआ। इससे सत्ता संघर्ष में मुख्यमंत्री को कमजोर करने में लगे उनके ही अपने योद्धाओं की छटपटाहट बढ़ती चली गई।
कथित तौर से बार-बार खबरें आई मुख्यमंत्री की सत्ता पलट रही है फिर भी मुख्यमंत्री निश्चिंत रहे और कृष्ण की तरह मोहन लीलाएं रचते रहे। अब उन्होंने एक ऐसी लीला रची है कि सारे ग्वाल उनकी बांसुरी की धुन पर नाचते झूमते रहेंगे। मोहन ने रास ऐसी रचाई कि सरकार में उनके विरोधी असहमें पराजित और निश्चेत नजर आ रहे हैं।
ऐसा क्या हुआ कि कमजोर कहे और समझे जाने वाले मुख्यमंत्री का बलशाली स्वरूप भगत हो गया ? मुख्यमंत्री ने ऐसा कौन सा तीर चलाया कि विरोधियों के सभी ब्रह्मास्त्र बेकार साबित हुए। स्पष्ट है तीर मुख्यमंत्री का चला और कई सारे निशानों को टारगेट कर गया। उनके खिलाफ बताए जाने वाले उनके ही मंत्री विधायक नेता समझ नहीं पा रहे कि मुख्यमंत्री अंगद के पैर की तरह कैसे जमे हुए हैं कि तमाम सारी ताकतों, राजनीतिक तंत्र मंत्र कर्मकांड के बाद भी उनकी कुर्सी और वे दोनों मजबूत बने हुए हैं।
ढाई वर्ष पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए डॉ मोहन यादव को लेकर माना जाता रहा है कि प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में उनके खिलाफ काम करने वाला एक ताकत वर समूह अस्तित्व में आ गया था। बीते कुछ दिनों तक लगातार यह समूह मुख्यमंत्री को टारगेट करने में लगा रहा। ऐसा बार-बार कहा सुना जा रहा था। कृष्ण की तरह मोहन यह विषपान करते रहे, लेकिन चेहरे पर कभी भी शिकन तक नहीं आई। तब भी और अभी तो वह चैन की बांसुरी बजाते रहे और अब इस समय उन्होंने अपने एक मंत्री का ऐसा बैंड बजाया कि बाकी सारे मंत्री मुख्यमंत्री के पाले में उनके साथ नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा पशुपालन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से विभाग वापस लेना मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इस घटनाक्रम और इसके व्यापक राजनीतिक निहितार्थ हैं। खास करके भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सत्ता संघर्ष और मुख्यमंत्री को कमजोर करने की कोशिश आदि कर्मकांडों पर पार्टी आलाकमान कठोर है। यह संदेश एकदम स्पष्ट रूप से हाईकमान ने दे दिया है। समझने वाले समझ गए होंगे नहीं समझने वालों को समय आने पर हो सकता है कीमत चुकानी पड़े। मुख्यमंत्री अब और ज्यादा मजबूत हो गए हैं।
लखन पटेल का उदाहरण देकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी सत्ता को चुनौती देने वालों या काम में ढिलाई बरतने वालों के प्रति कितने सख्त हो सकते हैं। यह 'मजबूती' आने वाले समय में मंत्रिमंडल में और भी बड़े बदलावों की आहट दे रही है। आने वाले समय में मुख्यमंत्री आलाकमान के दिशा निर्देश अनुसार कठोर फैसले ले सकते हैं। लखन पटेल से पशुपालन और डेयरी विभाग वापस लेकर मुख्यमंत्री ने इसे स्वयं अपने पास रख लिया है। लखन पटेल को अब केवल 'आनंद विभाग' की जिम्मेदारी दी गई है।
इस कार्रवाई को भाजपा संगठन द्वारा मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार और संगठन अब मंत्रियों के कामकाज के प्रदर्शन पर कड़ी नजर रख रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश सरकार में मंत्रियों के द्वारा अपनाई जाने वाली "प्रेशर टेकटिक्स" ब्लैकमेलिंग या बदनाम करने की राजनीति अब नहीं चलेगी। उन्होंने यह भी संदेश दे दिया है कि जमीन के खेल, खदानें ठेके टेंडर तबादलों आदि जैसे नियम विरुद्ध कार्यों के लिए उन पर अनावश्यक दबाव प्रभाव नहीं बनाया जा सकता।उन्हें अस्थिर करने वाली सुनियोजित साजिशें अब खुद ब खुद नियंत्रित हो जाएगी। विपक्ष को भी अब भाजपा की अंदरूनी राजनीति के कीचड़ में मुख्यमंत्री को घसीटने का मौका नहीं मिलेगा।
उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि सरकार में भी जोड़-तोड़ और 'जुगाड़' की राजनीति की जगह 'जवाबदेही' की राजनीति लेने की कोशिश हो रही है। लखन पटेल का उदाहरण देकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी सत्ता को चुनौती देने वालों या काम में ढिलाई बरतने वालों के प्रति कितने सख्त हो सकते हैं। यह 'मजबूती' आने वाले समय में मंत्रिमंडल में और भी बड़े बदलावों की आहट दे रही है।
मुख्यमंत्री का यह कदम यह संदेश देने में सफल रहा है कि सरकार की बागडोर अब पूरी तरह से 'प्रदर्शन-आधारित' है। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल में और भी बड़े बदलाव होने की अटकलें तेज हैं। यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव अब किसी भी विभाग में प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। मध्य प्रदेश सरकार में होने वाले इस तरह के बड़े फेरबदल दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व की जानकारी और दिशा-निर्देशों के अनुरूप होते हैं। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को केंद्रीय नेतृत्व का पूर्ण समर्थन और संरक्षण है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी कार्यशैली में 'गुड गवर्नेंस' (सुशासन) प्राथमिकता पर है। यह उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकार की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री की प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लखन पटेल से विभाग वापस लेना यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर का मंत्री हो। मुख्यमंत्री का यह कदम उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करता है जो सीधे तौर पर शासन की कमान संभालने में सक्षम है।
दिल्ली की निगरानी और 'चेतावनी' का संदेश
इस कार्रवाई के पीछे दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) के प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लगातार दिल्ली पहुँच रहा है, और मुख्यमंत्री मोहन यादव उसी के अनुरूप निर्णय ले रहे हैं।
संगठनात्मक ताकत भी मुख्यमंत्री के साथ
मुख्यमंत्री ने स्वयं स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल जैसे बड़े फैसले केंद्र और राज्य इकाई मिलकर लेते हैं। नाराज मंत्रियों पर असर इसका सीधा असर हुआ है। इस घटना ने उन मंत्रियों और विधायकों को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री से असंतुष्ट हैं या अपने प्रभाव क्षेत्र को लेकर पार्टी लाइन से अलग राय रखते हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि संगठन की अनदेखी या प्रदर्शन में कमी का परिणाम मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता या विभाग में कटौती हो सकता है।
पार्टी के भीतर की खींचतान और कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच सामंजस्य की कमी की खबरें अक्सर चर्चाओं में रहती हैं। विपक्ष भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जमीन सौदों जैसे मामलों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ऐसे में मोहन यादव का यह कदम 'डैमेज कंट्रोल' और 'अनुशासन' बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि सरकार पर उनका और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का नियंत्रण पूरी तरह प्रभावी है। मंत्रियों के लिए अब केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जनता की उम्मीदों और सरकार के लक्ष्यों पर खरा उतरना होगा, अन्यथा उन्हें भविष्य में और भी कड़े फैसलों का सामना करना पड़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री की प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लखन पटेल से विभाग वापस लेना यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर का मंत्री हो। मुख्यमंत्री का यह कदम उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करता है जो सीधे तौर पर शासन की कमान संभालने में सक्षम है।
दिल्ली की निगरानी और 'चेतावनी' का संदेश
इस कार्रवाई के पीछे दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) के प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लगातार दिल्ली पहुँच रहा है, और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उसी के अनुरूप निर्णय ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल जैसे बड़े फैसले केंद्र और राज्य इकाई मिलकर लेते हैं।
नाराज मंत्रियों पर नकेल
इस घटना ने उन मंत्रियों और विधायकों को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री से असंतुष्ट हैं या अपने प्रभाव क्षेत्र को लेकर पार्टी लाइन से अलग राय रखते हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि संगठन की अनदेखी या प्रदर्शन में कमी का परिणाम मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता या विभाग में कटौती हो सकती है।
पार्टी के भीतर की खींचतान और कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच सामंजस्य की कमी की खबरें अक्सर चर्चाओं में रहती हैं। विपक्ष भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जमीन सौदों जैसे मामलों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ऐसे में डॉ मोहन यादव का यह कदम 'डैमेज कंट्रोल' और 'अनुशासन' बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि सरकार पर उनका और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का नियंत्रण पूरी तरह प्रभावी है। मंत्रियों के लिए अब केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जनता की उम्मीदों और सरकार के लक्ष्यों पर खरा उतरना होगा, अन्यथा उन्हें भविष्य में और भी कड़े फैसलों का सामना करना पड़ सकता है।
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