पर्यटन स्थल बना बदबूदार तालाब: पिपलियापाला में सीवेज का स्वागत द्वार; नगर निगम की सफाई व्यवस्था पानी-पानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पिपलियापाला रीजनल पार्क तालाब में अब गंदगी, झाग और बदबू का नजारा दिखाई देने की शिकायतें सामने आ रही हैं। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल इस पार्क के तालाब में कथित तौर पर सीवेज का पानी पहुंच रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर स्वच्छता के दावों और जमीन पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच यह दूरी किसने पैदा की?
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के मुताबिक तालाब से उठती तेज दुर्गंध और पानी की सतह पर जमा झाग लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। जिस जगह लोग परिवार के साथ सुकून के पल बिताने पहुंचते हैं, वहां नाक पर रूमाल रखने की नौबत आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पर्यटन स्थल की पहचान अगर बदबू से होने लगे तो समझिए कि कहीं न कहीं निगरानी की व्यवस्था को भी सफाई की जरूरत है।
नगर निगम के लिए सवालों का तालाब- शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम के सामने अब कई सवाल हैं। क्या सीवेज लाइन की नियमित जांच हो रही है? क्या गंदे पानी को रोकने और उपचारित करने की व्यवस्था ठीक से हो रही है? अगर तालाब में दूषित पानी पहुंच रहा है तो जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? और अगर जानकारी है, तो कार्रवाई का इंतजार आखिर कब तक?
मछलियों से लेकर भूजल तक खतरे की आशंका- सीवेज के लगातार प्रवाह से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। घुलित ऑक्सीजन का स्तर गिरने से जलीय जीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
आसपास के भूजल पर संभावित असर की जांच भी जरूरी है। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
अब फोटो नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए- नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाब के पानी की जांच, सीवेज के स्रोत की पहचान और संबंधित ट्रीटमेंट व्यवस्था के निरीक्षण की जरूरत है। इसके बाद जिम्मेदारी तय कर समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। आखिर सवाल सीधा है...क्या इंदौर की स्वच्छता का तमगा सिर्फ सड़कों तक सीमित रहेगा या तालाबों की सेहत भी सुधरेगी? क्योंकि बदबू पर पर्दा डालने से तालाब साफ नहीं होता और झाग को नजरअंदाज करने से प्रदूषण खत्म नहीं होता। पिपलियापाला को भाषण नहीं, समाधान चाहिए।
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