संघ के कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के डीन की मौजूदगी पर सवाल: इस कांग्रेस नेता ने उठाई जवाबदेही की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डीन डॉ. अरविंद घनगोरिया की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस से जुड़े नेता डॉ. अमीनुल खान सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस मौजूदगी के संदर्भ में प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर सवाल खड़े किए हैं।
डॉ. सूरी की पोस्ट का केंद्र यह सवाल है कि क्या किसी सरकारी संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी की किसी वैचारिक संगठन के कार्यक्रम में मौजूदगी को उसके प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े सवालों से अलग रखकर देखा जाना चाहिए? उन्होंने अपने पोस्ट में संघ की शरण और कथित पापों से मुक्ति की उपमा का इस्तेमाल करते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की है।
‘संघं शरणं गच्छ’ टिप्पणी से शुरू हुआ सवाल
डॉ. अमीनुल खान सूरी ने अपनी पोस्ट की शुरुआत संस्कृत वाक्यांश “संघं शरणं गच्छ, सर्वपापेभ्यो मुक्तो भव!” से की। इसके साथ उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शरण में जाने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनगोरिया पर भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों के बीच उनका संघ के कार्यक्रम में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।
कुर्सी और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक टिप्पणी
डॉ. सूरी ने अपनी टिप्पणी में मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी अधिकारी के पद, कार्यकाल या प्रतिष्ठा पर सवाल उठते हैं, तो कुछ लोग प्रभावशाली संगठनों के करीब पहुंचकर अपनी साख बचाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में किसी वैचारिक या सामाजिक संगठन के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी को लेकर उठने वाले सवालों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
क्या किसी कार्यक्रम में मौजूदगी प्रशासनिक सवालों का जवाब है?
अपनी पोस्ट में डॉ. सूरी ने सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य प्रदेश में ऐसा मंच बन गया है, जहां पहुंचकर लोग अपने कथित पाप धोने और अपनी कुर्सी बचाने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में संघ के कार्यक्रम में डॉ. घनगोरिया की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस छेड़ी है।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग
डॉ. सूरी ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि किसी संगठन की शरण जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया।इस मामले में अभी डॉ. घनगोरिया की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
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