बढ़ रहे हैं ध्येय पथ पर: आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मैदानी कार्यक्रमों का भव्य समापन; संघ मुखिया नहीं हुए शामिल
KHULASA FIRST
संवाददाता

शताब्दी संकल्प: इंदौर में उमड़ा राष्ट्रभक्ति का महासागर, हजारों स्वयंसेवकों ने लिया ‘पंच परिवर्तन’ का संकल्प
बढ़ रहे हैं ध्येय पथ परकार्य की गति बढ़ी हैसकल सज्जन शक्ति देखो, जुड़ने को आतुर खड़ी है...
डेली कॉलेज परिसर में आयोजित ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ में दिखा अनुशासन और समरसता का अनूठा वैभव
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर की धरा पर हुआ आरएसएस का महा-एकत्रीकरण महज एक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से समाज में बोए गए समरसता के बीजों के वटवृक्ष बनने की कहानी बयां करता है। संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के समापन के लिए जिस तरह से ‘चरैवेति’ (गतिशीलता) शब्द को चुना, वह यह दर्शाता है कि 100 वर्ष पूरे होने के बाद भी संगठन ठहराव का शिकार नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
इस समागम का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि इसमें केवल पारंपरिक स्वयंसेवक ही नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, कॉर्पोरेट और बौद्धिक जगत के हजारों नए चेहरे भी राष्ट्र निर्माण के इस संकल्प में पूर्ण गणवेश में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखाई दिए।
यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सुधार का दायरा अब शाखाओं से निकलकर आधुनिक समाज के ड्राइंग रूम्स और दफ्तरों तक पहुंच चुका है। सह सरकार्यवाह द्वारा रेखांकित ‘पंच परिवर्तन’ का विचार आज के खंडित होते परिवारों और पर्यावरण संकट से जूझती दुनिया के लिए एक संजीवनी की तरह है।
इंदौर ने कल अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का जो मानदंड स्थापित किया है, वह आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगा।
रा ष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के गौरवमयी समापन के अवसर पर मालवा की धरा ऐतिहासिक दृश्यों की साक्षी बनी। इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज परिसर में बुधवार शाम आयोजित भव्य ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ कार्यक्रम में हजारों की संख्या में स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल, सामूहिक योग और राष्ट्रभक्ति के स्वरों से पूरे वातावरण को राष्ट्रमय कर दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने स्वयंसेवकों और प्रबुद्ध समाज को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कुछ समाज-विरोधी शक्तियां भारतीय समाज के मौलिक विचार और ताने-बाने को बदलने का प्रयास कर रही हैं।
इन चुनौतियों का सामना केवल संगठन के एकाकी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की संपूर्ण ‘सज्जन शक्ति’ को साथ लेकर ही किया जा सकता है।
शाम ठीक 4.30 बजे से शुरू हुए इस महा-एकत्रीकरण में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में सामूहिक योग, शारीरिक व्यायाम और आत्मरक्षा के विभिन्न कौशलों का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया।
अब इंदौर में जुटेगा संघ का शीर्ष नेतृत्व, 2 नवंबर से महामंथन
‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ के इस भव्य समापन के बाद अब इंदौर देश की वैचारिक राजनीति और सामाजिक नीतियों का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। आगामी 2, 3 और 4 नवंबर को इंदौर में संघ की सर्वोच्च और महत्वपूर्ण ‘अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल’ की बैठक आयोजित होने जा रही है।
डेली कॉलेज में होने वाली इस त्रिदिवसीय बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत देशभर के 46 प्रांतों और 11 क्षेत्रों के प्रमुख पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही सामग्री, युवाओं में नशीले पदार्थों की बढ़ती लत, विदेशी ताकतों के वैचारिक हस्तक्षेप और संघ के आगामी संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
आरएसएस मुखिया की अनुपस्थिति चर्चा व जिज्ञासा का विषय बनी
ऐतिहासिक ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ कार्यक्रम की अभूतपूर्व सफलता के बीच राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक बात की सबसे ज्यादा चर्चा रही- आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का मंच पर उपस्थित न होना। चूंकि कार्यक्रम के ठीक पहले उनके अचानक मध्य प्रदेश आने और भोपाल पहुंचने की खबरें सामने आई थीं, इसलिए आम जनमानस और मीडिया के एक धड़े में यह कयासबाजी तेज हो गई कि संघ प्रमुख के इंदौर आगमन के कार्यक्रम को क्यों गोपनीय रखा गया या वे ऐनवक्त पर कार्यक्रम में क्यों शामिल नहीं हुए।
खुलासा फर्स्ट ने जब संघ के आधिकारिक सूत्रों और उनके वास्तविक यात्रा कार्यक्रम की पड़ताल की, तो इसके पीछे की पूरी और बेहद स्पष्ट तस्वीर सामने आई। सूत्र बताते हैं कि आठ दिन पहले से तय था कि आरएसएस सुप्रीमो इंदौर में मंचासीन नहीं होंगे। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार किसी भी बात को छिपाने या गोपनीयता बरतने का कोई सवाल ही नहीं था।
वास्तव में ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ मालवा प्रांत के इंदौर विभाग स्तर का एक मैदानी कार्यक्रम था, जिसकी मुख्य वक्ता के रूप में कमान पहले से ही राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह अतुल लिमये को सौंपी गई थी। संघ की कार्यपद्धति के अनुसार हर स्थानीय या प्रांतीय कार्यक्रम में सरसंघचालक का मंच पर रहना अनिवार्य नहीं होता है।
चूंकि यह शताब्दी वर्ष के स्थानीय आयोजनों का जमीनी समापन था, इसलिए इसे स्थानीय और प्रांतीय नेतृत्व के जरिये ही संचालित करने की योजना पूर्व-निर्धारित थी। डॉ. मोहन भागवत के अचानक मध्य प्रदेश आने का मुख्य कारण उनका चार दिवसीय विशेष संगठनात्मक प्रवास था।
बुधवार को वे सुबह अचानक भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने समिधा (संघ कार्यालय) में विभिन्न आनुषंगिक संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण आंतरिक बैठक की। इसके तुरंत बाद दोपहर 2.45 से शाम 4.30 बजे के बीच भोपाल के एमपी नगर में जैन मुनि आचार्य श्री समय सागरजी महाराज से उनकी एक बेहद महत्वपूर्ण और पूर्व-निर्धारित सौजन्य मुलाकात थी। चूंकि इस अध्यात्मिक मुलाकात का समय ठीक वही था, जब इंदौर में ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ की शुरुआत हो रही थी।
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