कलेक्टर का संवेदनशील और मानवीय चेहरा: जनसुनवाई में नहीं पहुंच पाए थे कुछ लोग; रोके वाहन की ओर बढ़ते कदम, सुनी समस्याएं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के बीच इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा मंगलवार को देखने को मिला। जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जब कलेक्टर एक अन्य बैठक में शामिल होने के लिए कार्यालय से बाहर निकल रहे थे, तभी उनकी नजर कुछ ऐसे लोगों पर पड़ी जो देर से पहुंचने के कारण अपनी शिकायतें और समस्याएं जनसुनवाई में नहीं रख पाए थे। आम तौर पर जनसुनवाई समाप्त होने के बाद आवेदकों को अगले निर्धारित दिन का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्थिति को समझते हुए तत्काल मानवीय पहल दिखाई और अपने वाहन की ओर बढ़ते कदम रोक दिए।
रास्ते में ही सुनी आमजन की परेशानी
कलेक्टर ने देखा कि कुछ आवेदक निराश और चिंतित भाव से कार्यालय परिसर में खड़े हैं। जानकारी लेने पर पता चला कि वे किसी कारणवश देरी से पहुंचे थे और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसके बाद कलेक्टर ने सभी आवेदकों को वहीं रुकने के लिए कहा और उन्हें परिसर में आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई गई शीतल छांव एवं बैठने की व्यवस्था तक ले जाने के निर्देश दिए।
स्वयं लिए आवेदन, अधिकारियों को दिए निर्देश
बैठने की व्यवस्था होने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने एक-एक कर सभी आवेदकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ लोगों की बातें सुनीं और संबंधित मामलों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने स्वयं आवेदकों से आवेदन प्राप्त किए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई तथा त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी नागरिक की समस्या केवल समय निकल जाने के कारण अनसुनी नहीं रहनी चाहिए।
आवेदकों ने जताया आभार
कलेक्टर के इस व्यवहार से आवेदक काफी प्रभावित नजर आए। उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि जनसुनवाई समाप्त होने के बाद भी उनकी बात सुनी जाएगी। कई लोगों ने कलेक्टर की सहजता, संवेदनशीलता और आमजन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की। आवेदकों ने कहा कि इस तरह का व्यवहार प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत करता है।
प्रशासन की जनसेवा का उदाहरण
मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस घटना को प्रशासनिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उनका कहना था कि अधिकारियों का दायित्व केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को समझना और समाधान के लिए तत्पर रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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