आरबीआई ने 4 साल बाद बढ़ाई रेपो रेट: लोन महंगे होने के आसार; जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
होम लोन, कार लोन व पर्सनल लोन वालों को ब्याज का बोझ बढ़ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने चार साल बाद रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की है। रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दी गई है।
आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की तीन दिन चली बैठक के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नई ब्याज दरों का ऐलान किया। आरबीआई ने यह फैसला मुख्य रूप से महंगाई के जोखिम को देखते हुए लिया है।
इसके साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं, देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर लोन पर पड़ेगा
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है।इसका असर बैंक ग्राहकों के लिए नए लोन की ब्याज दरों और रेपो से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा लोन पर पड़ सकता है।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर संबंधित बैंक की ब्याज दर और ग्राहक के लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।
आरबीआई का फोकस अब महंगाई पर
आरबीआई ने अपने मौद्रिक नीति रुख में बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक का संकेत है कि फिलहाल महंगाई के जोखिम को लेकर वह सतर्क है।
ऐसे में आने वाली बैठकों में ब्याज दरों को लेकर फैसला महंगाई, आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, 0.25% की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन पॉलिसी स्टांस में बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार इससे महंगाई को नियंत्रित करना RBI की प्राथमिकता होने का संकेत मिलता है।
कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने आने वाले समय में 0.25% से 0.50% तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
वहीं डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के मुताबिक, आरबीआई महंगाई के जोखिम को लंबे समय तक बने रहने से रोकना चाहता है।
4 सवालों में समझें रेपो रेट का असर
1. रेपो रेट क्या होती है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। RBI की MPC समय-समय पर मौद्रिक नीति की समीक्षा कर रेपो रेट सहित प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला करती है।
2. आरबीआई ने रेपो रेट क्यों बढ़ाई?
रेपो रेट में बढ़ोतरी का प्रमुख उद्देश्य महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना है। ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा हो सकता है। इससे कर्ज की मांग और खर्च पर असर पड़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
3. आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर आपका होम, कार या पर्सनल लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है और वह रेपो रेट से जुड़ा है, तो RBI की बढ़ोतरी का असर आपकी ब्याज दर पर पड़ सकता है।
मौजूदा लोन: ईएमआई बढ़ सकती है या लोन की अवधि बढ़ सकती है।
नया होम लोन: बैंक नई ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे ईएमआई ज्यादा हो सकती है।
कार और पर्सनल लोन: नई ब्याज दरों के कारण कर्ज लेना महंगा हो सकता है।
लोन की पात्रता: ब्याज दर बढ़ने पर समान आय वाले ग्राहक की लोन लेने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, सभी ग्राहकों पर असर एक जैसा नहीं होगा। यह बैंक, लोन के प्रकार, ब्याज दर के प्रकार और लोन एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
4. क्या आगे रेपो रेट घट सकती है?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रेपो रेट आगे निश्चित रूप से घटेगी या बढ़ेगी। आरबीआई महंगाई, जीडीपी ग्रोथ, वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर बैठक में फैसला करता है।
अगर महंगाई का दबाव कम होता है और आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है। वहीं महंगाई का दबाव बढ़ने पर RBI दरों को ऊंचा रख सकता है या जरूरत पड़ने पर और बढ़ोतरी कर सकता है।
नॉलेज बॉक्स: रेपो सिस्टम क्या है?
रेपो यानी रिपर्चेस एग्रीमेंट एक ऐसा वित्तीय लेन-देन है, जिसमें बैंक या वित्तीय संस्थान प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक फंड जुटाते हैं। केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति के जरिए बैंकिंग सिस्टम में नकदी और ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है।
भारत में रेपो रेट आरबीआई की मौद्रिक नीति का एक प्रमुख उपकरण है। इसके जरिए केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
आम आदमी के लिए सीधी बात
रेपो रेट 5.50% होने का मतलब यह हुआ कि आरबीआई से बैंकों के लिए पैसा महंगा हुआ है। इसका असर बैंकिंग ब्याज दरों पर पड़ सकता है और रेपो से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ईएमआई बढ़ सकती है।
वहीं आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया है, लेकिन महंगाई के अनुमान में भी बढ़ोतरी की है। इसलिए आने वाले समय में आरबीआई के फैसले महंगाई और आर्थिक विकास के आंकड़ों पर काफी निर्भर रहेंगे।
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