प्यारे मियां की 3 एफआईआर रद्द नहीं होगी: वजह- तारीख, जगह और पीड़िताएं अलग-अलग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भोपाल के चर्चित नाबालिग यौन शोषण प्रकरण में आरोपी प्यारे मियां को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने पलासिया थाने में दर्ज तीन एफआईआर और उनसे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही निरस्त करने की उसकी याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस गजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया दुष्कर्म या यौन हमला सतत अपराध नहीं है। अलग-अलग तारीख, स्थान और पीड़िताओं से संबंधित घटनाओं को अलग अपराध मानकर उन पर अलग-अलग मुकदमे चल सकते हैं।
प्यारे मियां ने दलील दी थी भोपाल और इंदौर की घटनाएं एक ही श्रृंखला का हिस्सा हैं। इनमें अलग-अलग प्राथमिकी और मुकदमे चलाना दोहरे अभियोजन सिद्धांत के विपरीत है। अभियोजन ने विरोध में कहा अलग-अलग तारीखों पर, अलग स्थान और अलग बाल पीड़िताओं से संबंधित आरोप हैं।
हाई कोर्ट ने एफआईआर के तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया इंदौर के तीनों मामले एक घटना या एक अपराध की पुनरावृत्ति नहीं हैं। इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि 2020 में भोपाल में केस दर्ज होने के बाद जांच के दौरान इंदौर में भी तीन नाबालिग बालिकाओं से कथित यौन शोषण की जानकारी सामने आई थी।
इस पर पलासिया थाने में तीन अपराध दर्ज किए गए। उस समय स्थानीय समाचार पत्रों में लालाराम नगर स्थित बंगले, कथित पार्टियों और पीड़िताओं के बयानों के आधार पर पुलिस की जांच को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इन आरोपों को अदालत में साबित हुए तथ्य नहीं, बल्कि प्रकरण की जांच और अभियोजन से जुड़े आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
11 से 31 मई तक की घटनाओं के आरोप- हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, भोपाल के शाहपुरा थाने में 13 जुलाई 2020 को प्यारे मियां और स्वीटी उर्फ हम्टी के खिलाफ पांच बच्चों के कथित यौन शोषण का अपराध दर्ज हुआ था। शिकायत चाइल्डलाइन के माध्यम से सामने आई थी।
आरोप था 11 और 12 जुलाई की घटनाओं के दौरान बच्चों को नशीला पदार्थ देकर शोषण किया गया। जांच के बाद अन्य धाराएं भी जोड़ी गईं और सात लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र पेश किया गया। विशेष अदालत में प्यारे मियां के खिलाफ 25 बिंदुओं पर आरोप तय किए गए थे।
जांच के दौरान पुलिस को इंदौर में भी बाल यौन अपराधों की जानकारी मिली थी। हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार पहले मामले अपराध क्रमांक 357/2020 में एक बाल पीड़िता से संबंधित कथित घटना की अवधि 1 से 31 मई 2020 बताई गई।
घटनास्थल पलासिया स्थित प्यारे मियां के मकान, दूसरा अपराध क्रमांक 358/2020, अन्य बाल पीड़िता से संबंधित 15 जून 2020 का है। तीसरा अपराध क्रमांक 359/2020 तीसरी बाल पीड़िता से संबंधित है। अपराध की अवधि 1 से 30 जून 2020 बताई गई।इन मामलों में भी आरोप पत्र पेश किए गए और संबंधित विशेष अदालतों में आरोप तय किए गए।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?- हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया प्रत्येक अलग अपराध के लिए अलग आरोप और अलग सुनवाई का सिद्धांत है। दुष्कर्म या प्रवेशात्मक यौन हमला ऐसा अपराध नहीं है, जो एक बार शुरू होकर लगातार चलता रहे।
जब कथित घटनाएं अलग तारीख, अलग स्थान और अलग पीड़िताओं से संबंधित हों, तो उन्हें अलग अपराध मानकर मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा एक ही घटना के संबंध में दूसरी एफआईआर दर्ज करने पर रोक से जुड़ा कानूनी सिद्धांत हर मामले में यांत्रिक रूप से लागू नहीं किए जा सकता।
देखना जरूरी है कि क्या सभी एफआईआर वास्तव में एक ही घटना या एक ही लेन-देन से जुड़ी हैं। उक्त एफआईआर इस कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। दोहरे दंड के तर्क पर कहा मुकदमों की सुनवाई पूरी नहीं हुई है।
किसी अपराध के लिए दोबारा दंड का सवाल इस स्तर पर नहीं उठता। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 20(2) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 300 के आधार पर राहत से इनकार किया।
आरोपी की दलील पर राज्य सरकार ने क्या कहा?
प्यारे मियां की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक सिंह और निमिषा दुबे ने पक्ष रखा जांच के दौरान ही इंदौर की घटनाओं की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में एक घटनाक्रम से जुड़े मामलों में अलग-अलग मुकदमे चलाने से दोहरे अभियोजन का प्रश्न उठता है।
राज्य की ओर से अधिवक्ता हेमंत शर्मा का कहना था आरोप अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर हुई घटनाओं तथा अलग-अलग बाल पीड़िताओं से संबंधित हैं। इन्हें एक ही अपराध मानकर सभी एफआईआर रद्द नहीं की जा सकतीं।
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