गरीब कर्मचारियों का वेतन भी खा गई पावर लिंकर कंपनी: तनख्वाह नहीं मिलने से इलाज के लिए तड़पता रहा कर्मचारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

गरीबों पर बर्बरता प्रताड़ना और अत्याचार के आरोप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मालवा के खेतों तक पानी पहुंचाने वाली नर्मदा-मालवा गंभीर लिंक सिंचाई परियोजना के संचालन और रखरखाव में लगे कर्मचारियों को अपने वेतन और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
परियोजना के मेंटेनेंस का काम करने वाली चेन्नई की कंपनी पावर लिंकर लिमिटेड के प्रबंधन पर कर्मचारियों ने वेतन रोकने, 12 घंटे या उससे अधिक काम कराने, ओवरटाइम का भुगतान नहीं करने तथा पीएफ, ईएसआईसी, बोनस और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
भारतीय मजदूर संघ के अनुसार, कई कर्मचारियों का पांच से छह महीने तक का वेतन बकाया है। जनवरी से अप्रैल 2026 के वेतन भुगतान को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सितंबर 2026 का वेतन भी निर्धारित समय तक नहीं मिला।
इन आरोपों के बीच कर्मचारी राधेश्याम दांगी का मामला सामने आया है, जिन्हें हृदय संबंधी परेशानी के इलाज के लिए करीब सात लाख रुपये का कर्ज लेना पड़ा। कर्मचारियों का आरोप है कि आर्थिक संकट के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने उनका बकाया वेतन नहीं दिया।
इलाज के लिए कर्ज, फिर भी वेतन का इंतजार... कर्मचारियों के मुताबिक, राधेश्याम दांगी लंबे समय से परियोजना में काम कर रहे थे। आर्थिक तंगी के बीच उन्हें हृदय संबंधी समस्या हुई। समय पर इलाज कराने के लिए पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण उन्हें करीब सात लाख रुपए का कर्ज लेना पड़ा।
श्रमिकों का आरोप है कि यदि उन्हें समय पर वेतन और ईएसआईसी जैसी सुविधाओं का लाभ मिलता, तो इलाज के लिए इतनी बड़ी रकम उधार लेने की नौबत शायद नहीं आती। उनका कहना है कि बीमारी और आर्थिक संकट के दौरान भी बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया। कर्मचारियों ने प्रबंधन से वेतन और अन्य देय राशि दिलाने की मांग की है।
12 घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम मांगने पर नौकरी जाने का डर... कर्मचारियों की शिकायत के अनुसार, पावर लिंकर के अधीन एक मई 2023 से लगातार 12 घंटे या उससे अधिक समय तक काम कराया जा रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि अतिरिक्त समय के भुगतान की मांग करने पर नौकरी से निकालने या मध्य प्रदेश से बाहर दूसरी साइट पर भेजने की धमकी दी जाती है।
श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नियुक्ति पत्र और वेतन पर्चियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। इन दस्तावेजों की मांग करने पर कथित तौर पर दूसरी कंपनी में काम करने की सलाह देकर मामले को टाल दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उनके वेतन, सेवा अवधि और अन्य वैधानिक लाभों का हिसाब समझने में परेशानी होती है।
वेतन वृद्धि, बोनस और ग्रेच्युटी पर भी सवाल... श्रमिकों ने शिकायत में कहा है कि राज्य शासन द्वारा घोषित वेतन वृद्धि के तहत एक अप्रैल 2024 से प्रतिमाह 2,225 रुपए की बढ़ोतरी का लाभ उन्हें नहीं मिला है। इसके अलावा, एक मई 2023 से बोनस का भुगतान नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। ग्रेच्युटी की पात्रता और भुगतान को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं।
श्रमिकों की मांग है कि संबंधित विभाग कंपनी के वेतन रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर, बैंक भुगतान, बोनस रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच करे, ताकि वास्तविक बकाया राशि का पता चल सके और पात्र कर्मचारियों को उनका हक मिल सके।
पीएफ कटौती में विसंगति की शिकायत... कर्मचारियों ने भविष्य निधि यानी पीएफ की कटौती में भी विसंगतियों का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 12 हजार से 25 हजार रुपए तक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के मामलों में पीएफ कटौती की राशि समान रूप से 960 रुपए दिखाई गई है।
श्रमिकों ने इसकी जांच की मांग करते हुए कहा कि कंपनी के वेतन रजिस्टर, पीएफ चालान और कर्मचारियों के ईपीएफ खातों का मिलान कराया जाए। हालांकि, केवल कटौती की राशि समान होने से अनियमितता साबित नहीं होती।
इसके लिए पात्र वेतन, लागू नियमों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। कर्मचारियों ने पीएफ और ईएसआईसी की सुविधाओं को लेकर भी शिकायत की है। उनका कहना है कि यदि वैधानिक लाभों में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित श्रम विभाग और ईपीएफओ को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ ने उठाई आवाज... शिकायतकर्ताओं के अनुसार, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी पंकज माल्तारे और नरेंद्र पटेल से सहायता मिलने के बाद कर्मचारियों को अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने की उम्मीद जगी। संघ ने कंपनी और शासन-प्रशासन के समक्ष वेतन भुगतान तथा श्रमिक सुविधाओं का मुद्दा उठाया है।
कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधक मनोज मेहरा, परियोजना प्रमुख श्रीवास, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि वेतन और सुविधाओं की मांग करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है।
कंपनी प्रबंधन ने आरोपों को बताया झूठा... इस मामले में पावर लिंकर्स के प्रबंधक मनोज मेहरा से पक्ष जानने पर उन्होंने शिकायतों को झूठा बताते हुए कहा कि सभी कर्मचारियों को वेतन मिल रहा है। हालांकि, बकाया वेतन से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
खुलासा फर्स्ट ने परियोजना प्रमुख श्रीवास से संपर्क करने की कई बार कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री आशीष शिवहरे से भी संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। विभाग के मुख्य अभियंता ने मामले को दिखाने की बात कही।
श्रमिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। अब वेतन भुगतान, वैधानिक सुविधाओं और कथित श्रमिक शोषण के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
करोड़ों के अनुबंध, फिर भी श्रमिकों के बकाया का सवाल
श्रमिकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, परियोजना के रखरखाव से संबंधित पहला अनुबंध छह दिसंबर 2022 को दो वर्ष के लिए करीब 5.90 करोड़ रुपए में हुआ था। दूसरा अनुबंध 14 नवंबर 2025 को तीन वर्ष की अवधि के लिए करीब 9.78 करोड़ रुपए का बताया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2026 में नए अनुबंध के बाद सुविधाओं की मांग करने वाले कुछ श्रमिकों को काम से हटा दिया गया और उनके बकाया वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया।
उनका कहना है कि इस विवाद से संबंधित श्रम विभाग की कार्यवाही खंडवा स्थित श्रम न्यायालय में लंबित है। श्रमिकों ने मांग की है कि अनुबंध की शर्तों, कर्मचारियों के भुगतान और श्रमिक सुविधाओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।
मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधीन संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन और नियमानुसार सुविधाएं मिलनी चाहिए। श्रमिकों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।
उनकी प्रमुख मांगों में बकाया वेतन का भुगतान, एरियर, बोनस और ग्रेच्युटी की पात्रता के अनुसार राशि दिलाना, पीएफ एवं ईएसआईसी रिकॉर्ड की जांच करना तथा नौकरी से हटाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच शामिल है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों की जांच कर श्रमिकों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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