पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन: संगीत जगत में शोक की लहर; आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना ना करते प्यार जैसे कई गाने मशहूर गाए
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संवाददाता

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना ना करते प्यार जैसे कई गाने मशहूर गाए
खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की मशहूर पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार (31 मई) शाम उनके मुंबई स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं। रिपोर्ट्स में मौत की वजह उम्र से जुड़ी दिक्कतें बताई जा रही हैं। उनकी करीबी दोस्त मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन ने रात करीब 8 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से अपने ही गाए हुए गाने सुन रही थीं। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं। सुमन को 2023 में पद्मभूषण सम्मान मिला था। सुमन की आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर की आवाज से होती थी। फिल्मफेयर की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 11 भाषाओं में 3000 से ज्यादा फिल्मी-नॉन फिल्मी गाने गाए। सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के भवानीपुर (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। शादी से पहले उन्हें सुमन हेमडी के नाम से जाना जाता था। विवाह के बाद उन्होंने सुमन कल्याणपुर नाम से अपनी पहचान बनाई और भारतीय संगीत जगत में अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने अपने गायन करियर की शुरुआत मराठी संगीत से की थी। महान कवि और गीतकार जी.डी. माडगुलकर (गदिमा) के गीतों को स्वर देकर उन्होंने लोकप्रियता हासिल की। मराठी संगीत में उनके गाए गीत ‘निंबोणीच्या झाडामागे’, ‘अरे संसार संसार’, ‘केतकीचा बनी तिथे नाचला मोर’ और ‘रिमझिम झरती श्रावणधारा’ आज भी श्रोताओं की पसंद बने हुए हैं।
मराठी के अलावा सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, गुजराती और बंगाली भाषाओं में भी हजारों गीत गाए। अपनी सुरीली आवाज और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर उन्होंने कई दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। संगीत क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनके निधन पर देशभर के राजनीतिक नेताओं, संगीतकारों और प्रशंसकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनके निधन को भारतीय संगीत के लिए एक बड़ी क्षति बताया, वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी आवाज पीढ़ियों तक गूंजती रहेगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने भी भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
लता मंगेशकर से मिलती थी आवाज
सुमन कल्याणपुर की आवाज लता मंगेशकर से मिलती थी। दोनों के गाने का अंदाज और सुरों पर पकड़ एक जैसी मानी जाती थी। कई बार लोग उनकी और लता की आवाज के बीच धोखा खा जाते थे।
इसी खूबी की वजह से जब 1960 के दशक में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच विवाद हुआ तो सुमन कल्याणपुर संगीतकारों की पसंद बनीं और उन्होंने रफी साहब के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर गाने गाए। इस पर बात करते हुए सुमन कल्याणपुर ने एक इंटरव्यू में कहा, मैं उनसे बहुत प्रभावित थी। कॉलेज के दिनों में मैं उनके गाने सुनती थी। मेरी आवाज पतली और नाजुक थी, मैं क्या कर सकती थी। शुरुआत में रेडियो सेलोन, मेरे गानों को बिना नाम के चलाते थे, जिससे लोगों को ज्यादा भ्रम होता था। कभी-कभी मेरे रिकॉर्ड्स में नाम भी गलत लिखा होता था। एक समय जब एचएमवी ने 50 बेस्ट गानों की रिकॉर्डिंग जारी की, तो उसमें सबसे ज्यादा गाने सुमन के डाले गए। जबकि कैसेट के कवर में सिर्फ मोहम्मद रफी, तलत महमूद और किशोर कुमार की तस्वीर लगाई गई थी।
ऐ मेरे वतन के लोगों गाना आखिरी वक्त में छीना गया
सालों पहले नांदेड़ में आयोजित आषाढी महोत्सव के दौरान सुमन कल्याणपुर ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मशहूर गाना ऐ मेरे वतन के लोगों, उनके लिए लिखा गया था। वो ये गाना तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने वाली थीं। उन्होंने गाने की प्रैक्टिस भी कर ली थी, लेकिन परफॉर्मेंस से ठीक पहले, वो गाना लता मंगेशकर को दे दिया गया। इंटरव्यू में सुमन ने कहा था, जब मैं कार्यक्रम के दौरान गाना गाने के लिए मंच के पास पहुंची तो मुझे रोका गया और कहा गया कि मैं इस गाने की बजाय दूसरा गाना गाऊं। ऐ मेरे वतन लोगों मुझसे छीन लिया गया था यह मेरे लिए बड़ा सदमा था। वह बात आज भी चूभती है।
अमीन सयानी को 45 साल इंतजार कराया
जाने-माने रेडियो अनाउंसर अमीन सयानी 45 सालों तक सुमन से एक इंटरव्यू के लिए समय मांगते रहे, लेकिन सुमन हर बार टाल जाती थीं। आखिर 45 साल के बाद अमीन सयानी का इंतजार 2005 में खत्म हुआ, जब सुमन एक घंटे के इंटरव्यू के लिए राजी हुईं ।
हालांकि उन्होंने इंटरव्यू की मंजूरी सिर्फ इस शर्त पर दी कि कोई उनकी फोटो नहीं खींचेगा और अगर कोई सवाल उन्हें असहज लगा तो वो उसका जवाब नहीं देंगी।
पड़ोसी ने पिता से संगीत सिखाने को कहा
सुमन का रुझान बचपन से ही पेंटिंग और म्यूजिक की तरफ था। उन्होंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया। वे पेंटर बनना चाहती थीं, लेकिन सुमन की आवाज को उनके पड़ोसी और पिता के दोस्त पंडित केशव राव भोले ने परख लिया था। उन्होंने सुमन के पिता से संगीत सिखाने की बात कही। पहले तो सुमन शौकिया ही संगीत सीख रहीं थीं, लेकिन समय के साथ इसमें उनकी रुचि बढ़ने लगी और वो गंभीरता से सीखने लगीं। सुमन ने उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे दिग्गजों से भी संगीत की बारीकियां सीखीं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि
सोमवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुमन सुल्तानपुर को श्रद्धांजलि देते हुए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा-
लोकप्रिय गायिका सुमन कल्याणपुर जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने हमारे सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया। अपने गीतों के माध्यम से उन्होंने संगीत प्रेमियों और भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया। उनके परिवारजनों और चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदनां हैं। ओम शांति।
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