पावर का अफसरी लिंक: मैनेजर सरकार पर भारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

कंपनी की जेब में एनवीडीए के अधिकारी
कार्यपालन यंत्री आशीष शिवहरे सवालों के घेरे में
तीन महीने का वेतन भुगतान नहीं, घटिया सामग्री से हजारों करोड़ की परियोजना का किया जा रहा रखरखाव
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना के कर्मचारियों ने मेंटेनेंस संभाल रही पावर लिंकर्स कंपनी, चेन्नई के प्रबंधन और प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज मेहरा के खिलाफ गंभीर शिकायत करते हुए आशंका व्यक्त की है कि परियोजना में कंपनी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हजारों करोड़ों रुपए की इस परियोजना को पैसे की लालच में बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
भारतीय मजदूर संघ ने आरोपों के प्रमाणों के साथ एनवीडीए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को कैटेगरी में खड़ा कर दिया है। संघ ने कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और उसके प्रमाण भी प्रस्तुत किए हैं।
यह अलग बात है कि इस सब पर कलेक्टर खरगोन, श्रम विभाग और एनवीडीए के जिम्मेदार, जवाबदेह अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया है, उल्टा गरीब श्रमिकों, कर्मचारियों को खरगोन, खंडवा से लेकर इंदौर तक के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। ये वो कर्मचारी हैं, जिनके पास घर चलाने के लिए पैसा नहीं है, उनके साथ इस तरह से जिम्मेदार विभाग मनमानी कर रहे हैं।
मजदूर संघ का कहना है कि कंपनी प्रबंधन और इसके मैनेजर सरकार पर भारी हैं, क्योंकि कंपनी ने जिस दिन से इस परियोजना का ठेका लिया है, तब से करीब दो वर्ष से अधिक समय तक प्रोजेक्ट में काम कर रहे कर्मचारियों को ना तो नियुक्ति पत्र दिया, न ही लेबर कानून के हिसाब से भविष्य निधि आदि दी गई। कर्मचारियों को प्रताड़ित करते हुए उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर भी किया गया।
रखरखाव की यह हालत है कि प्रोजेक्ट के उपकरणों में जो गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग होना चाहिए, उसकी जगह बेहद सस्ते और निम्न स्तरीय पार्ट्स लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि ₹20,000 रुपए से अधिक का गुणवत्ता वाला उपकरण नहीं लगाकर तीन से ₹4000 रुपए वाला उपकरण लगाया जा रहा है?
इस काम में परियोजना का विभाग नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण पूरी तरह से आंखें बंद किए हुए प्रतीत होता है। सूत्रों के अनुसार कार्यपालन यंत्री आशीष शिवहरे दो वर्ष से प्रोजेक्ट का कामकाज देख रहे हैं, उनकी भूमिका संदेहास्पद इसलिए भी है, क्योंकि यह शासन के नियमों की बजाय कंपनी के किए धरे कर्मकांडों और गड़बड़ियों पर मौन धारण किए हुए हैं।
खुलासा फर्स्ट में खबर के बाद दिया वेतन... कंपनी की मनमानी पर खुलासा फर्स्ट ने जब खबर प्रकाशित की तो इसके बाद वर्तमान महीने का वेतन तो दे दिया, लेकिन बकाया वेतन की बात कर्मचारियों से नहीं की गई।
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज मेहरा कहते हैं कि किसी का भी वेतन बकाया नहीं है और सभी को नियमित वेतन दिया जा रहा है और भविष्य निधि की सुविधा भी दी जा रही है। ये सारी शिकायतें झूठी हैं और किसी को भी नौकरी से नहीं निकाला गया है।
एनवीडीए के अफसर के संरक्षण के आरोप पर कहते हैं कि शिवहरे तो अभी आए हैं, इससे पहले दूसरे अधिकारी थे। इससे पहले जिन कंपनियों ने काम किए हैं, उसकी जानकारी भी मीडिया को लेनी चाहिए।
उनका कहना है कि पावर लिंकर्स कंपनी के पहले जो कंपनी थी और कार्यपालन यंत्री आशीष शिवहरे के पहले जो अधिकारी थे, इनमें एक नाम व्यास का बताया, उनका भी हिसाब-किताब मालूम करना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि इसके पहले नवयुग कंपनी का ठेका था और उसके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं हुई। कर्मचारियों का कोई शोषण और उनके श्रम का दोहन नहीं किया गया, जैसा पावर लिंकर्स कर रही है।
यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि हो सकता है कंपनी के उच्च प्रबंधन को उनके प्रोजेक्ट प्रबंधकों द्वारा की जा रही मनमानी की जानकारी नहीं हो, क्योंकि उन तक शिकायतें नहीं पहुंची है।
निजी स्वार्थ के लिए कंपनी के स्थानीय अधिकारी और एनवीडीए के संबंधित अधिकारी मिलकर श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं और परियोजना के रखरखाव में बड़ा खेल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख अनुषांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रोजेक्ट की इस कदर दुर्गति की जा रही है कि पंपिंग स्टेशंस पर घटिया क्वालिटी के पार्ट्स या उपकरण लगाए जा रहे हैं।
उन्हें फील्ड में बतौर सबूत देखा जा सकता। इन सामग्री और उपकरणों की जांच और विलंब स्वतंत्र रूप हो तो सारा खेल सामने आ जाएगा। यह परियोजना पूरी तरह एनवीडीए के अधिकारियों के नियंत्रण में है।
कहते हैं कि परियोजना पिछले सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक चुनावी लाभ के लिए बनवाई थी। कुछ समय तक परियोजना का कामकाज ठीक-ठाक रहा।
मजदूर संघ के पदाधिकारी बताते हैं कि बाद में ठेका लेने वाली पावर लिंकर्स कंपनी ने नियमों के विरुद्ध टेंडर की शर्तों के खिलाफ और सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली मनमानी चला रखी है।
लेबर नियमों का प्रोजेक्ट के कर्मचारियों के साथ पावर लिंकर्स कंपनी के अधिकारियों द्वारा जो खिलवाड़ किया गया, इसकी शिकायत इस वर्ष मार्च में खरगोन कलेक्टर को की गई। कर्मचारियों ने खरगोन कलेक्टर को सौंपे आवेदन में आरोप लगाया है कि उन्हें काम से बाहर रखने, वेतन भुगतान और कथित आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध जांच कर उन्हें दोबारा काम पर रखने तथा बकाया वेतन दिलाने की मांग की है। नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना के रखरखाव को लेकर पहले भी कुछ शिकायतों में उपकरणों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें वाॅल्व, फ्लैंज, एनआरवी वॉल्व तथा अन्य उपकरणों की गुणवत्ता और स्वीकृत ड्राइंग के अनुरूप कार्य होने की जांच की मांग शामिल है।
भारतीय मजदूर संघ ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि कर्मचारियों की शिकायतों के साथ परियोजना के रखरखाव संबंधी आरोपों की भी पुष्टि होती है, तो मामला केवल श्रमिक हितों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परियोजना के संचालन, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ सकता है।
हालांकि, तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों की पुष्टि सक्षम तकनीकी जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर होना जरूरी है।
यह पूरा खेल बताता है कि पावर लिंकर्स कंपनी के स्थानीय प्रबंधकों और एनवीडीए के अधिकारियों द्वारा किया गया काला पीला परियोजना को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा दे।
ऐसा होने पर सरकार को करोड़ों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। संघ का कहना है कि इतना होने के बाद भी क्या खरगोन कलेक्टर और श्रम विभाग के कमिश्नर कर्मचारियों की शिकायत पर जांच कराएंगे?
क्या बकाया वेतन का भुगतान होगा और प्रभावित कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा? साथ ही, क्या परियोजना के रखरखाव संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी?
संघ का कहना है कि सूचना अधिकार के तहत सारे प्रमाण जुटाए गए हैं, इसलिए जांच में दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जाएगा। वहीं प्रोजेक्ट के प्रबंधक मनोज मेहरा का कहना है कि सारी जानकारियां गलत हैं।
सूचना अधिकार में जानकारी ले लीजिए मालूम हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि विभाग से यानी सरकार से कंपनी को पैसा नहीं मिला अर्थात् उनका कहने का मतलब यह है कि प्रदेश सरकार समय पर कंपनी को भुगतान नहीं कर रही है, इसलिए कंपनी कर्मचारियों को श्रमिकों को वेतन नहीं दे सकती।
भारतीय मजदूर संघ के आरोपों पर एनवीडीए के कार्यपालन यांत्रिक आशीष शिवहरे और मुख्य अभियंता से खुलासा फर्स्ट ने बार-बार मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
उनके मोबाइल नंबर पर विभाग और उनका पक्ष जानने के लिए वॉट्सएप मैसेज भी किए। उन्हें आप आरोपी के प्रमाण भी भेजे गए, शिकायतों की प्रति भेजी गई, लेकिन दो दिन तक लगातार संपर्क करने के बावजूद इन दोनों अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।
मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासन तक पहुंचाई शिकायत
कर्मचारियों ने अपना आवेदन खरगोन कलेक्टर को संबोधित किया है। इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास मंत्री, खंडवा सांसद, बड़वाह विधायक, इंदौर संभागायुक्त, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता और बड़वाह के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भेजे जाने का उल्लेख किया है।
कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए, बकाया भुगतान कराया जाए और प्रभावित कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखने के संबंध में निर्णय लिया जाए।
1 जून 2023 से परियोजना में काम कर रहे
कर्मचारियों के आवेदन के अनुसार, पावर लिंकर्स कंपनी 1 जून 2023 से नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना, बड़वाह में कार्यरत है। कर्मचारियों का आरोप है कि परियोजना में काम करने के दौरान उनसे लंबे समय तक 12 घंटे की ड्यूटी कराई गई।
उनका दावा है कि बोनस, भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआईसी) और ओवरटाइम भुगतान जैसे श्रम संबंधी मामलों में भी अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
जनवरी और फरवरी 2026 के वेतन भुगतान का मुद्दा
शिकायत पत्र के विषय में जनवरी और फरवरी 2026 के वेतन भुगतान का भी उल्लेख है। कर्मचारियों ने अपने आवेदन में बकाया वेतन दिलाने की मांग की है। इससे पहले सामने आई शिकायतों में कर्मचारियों ने कई महीनों के वेतन भुगतान में देरी का आरोप भी लगाया था।
वास्तविक बकाया राशि, भुगतान की अवधि और प्रत्येक कर्मचारी के दावे की पुष्टि वेतन रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड तथा कंपनी के दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
1 मार्च 2026 से काम से बाहर रखने का आरोप
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें 1 मार्च 2026 से अस्थायी रूप से काम से बाहर रखा गया है। आवेदन में कंपनी के प्रबंधक मनोज मेहरा और सह-प्रबंधक चंदन कुमार नाथ का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों को काम से बाहर रखने संबंधी निर्णय मनमाने तरीके से लिए गए।
कर्मचारियों का कहना है कि रोजगार बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है और परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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