एरोड्रम कांड में अब फुटेज और बयानों की परीक्षा: पुलिसकर्मियों के सस्पेंशन से चार पर कार्रवाई तक कैसे बदली कहानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

भाजपा विधायक के पंडित की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला फिर गरमाया
टीआई लाइन अटैच और चार पुलिसकर्मी निलंबित, एसीपी की जांच में थाने के भीतर का घटनाक्रम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एरोड्रम थाने में भाजपा विधायक गोलु शुक्ला के मंदिर के पुजारी जयदीप दुबे और उनके बहनोई भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष पंकज चौबे से कथित मारपीट का मामला अब सिर्फ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है।
थाने में उस रात क्या हुआ, शिकायत पर कार्रवाई में देरी क्यों हुई और शुरुआती घोषणा के मुकाबले अंतिम कार्रवाई का स्वरूप कैसे बदला, ये सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं। कल जयदीप की तबीयत बिगड़ने और उन्हें निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थाने के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों व शिकायतकर्ताओं के बयान हैं। पुलिस ने एसीपी मल्हारगंज आकाशसिंह जादौन को जांच सौंपी है।
वहीं थाना प्रभारी वेदेंद्रसिंह कुशवाह को लाइन अटैच कर एएसआई मुकेश परमार, हेड कांस्टेबल विजय वर्मा, दिनेश मीणा तथा कांस्टेबल सुरेंद्र देवड़ा को निलंबित किया गया है। अब जांच के निष्कर्ष बताएंगे कि संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही और आगे विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।
सात को सस्पेंड करने की घोषणा, अंतिम कार्रवाई में चार नाम... शुक्रवार देर रात थाने में हुए हंगामे के दौरान एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा ने टीआई समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की बात कही थी।
इसके बाद डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत की ओर से दी गई जानकारी में चार पुलिसकर्मियों के निलंबन और टीआई को लाइन अटैच करने की पुष्टि हुई। दोनों घोषणाओं के बीच अंतर ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
अंतिम रूप से सामने आई कार्रवाई में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, जबकि टीआई को पुलिस लाइन भेजा गया। शुरुआती घोषणा और अंतिम आदेश के बीच बदलाव किस आधार पर हुआ, यह स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक आदेश और विभागीय जांच के निष्कर्ष अहम होंगे। केवल लाइन अटैच होने को निलंबन नहीं माना जा सकता।
जांच की रिपोर्ट तय करेगी आगे की कार्रवाई... एरोड्रम थाने का मामला पुलिस की जवाबदेही और शिकायत दर्ज कराने पहुंचे व्यक्ति के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक ओर जयदीप और उनके परिजन पुलिस पर मारपीट तथा दुर्व्यवहार के आरोप लगा रहे हैं, दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि थाने में विवाद बढ़ने के बाद संबंधित कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
फिलहाल चार पुलिसकर्मियों का निलंबन और टीआई का लाइन अटैचमेंट शुरुआती प्रशासनिक कदम हैं। जांच के अंतिम निष्कर्ष के बिना किसी की भूमिका को दोषसिद्ध मानना उचित नहीं होगा।
अब नजर इस बात पर है कि एसीपी की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और सभी संबंधित लोगों के बयानों से क्या सामने आता है और क्या पुलिस प्रशासन अपनी शुरुआती कार्रवाई के आधार को सार्वजनिक करेगा।
पुलिस की दलील मेडिकल के बाद भी विवाद बढ़ा
डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक जयदीप दुबे ने पड़ोसी से विवाद और मारपीट की शिकायत की थी। पुलिस ने उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए एमवाय अस्पताल भेजा। इसी प्रक्रिया में समय लगा और बाद में थाने में मौजूद लोगों के बीच विवाद बढ़ गया।
पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता और उनके समर्थकों के साथ हुए व्यवहार को देखते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। दूसरी ओर जयदीप दुबे का आरोप है कि वे शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी बात सुनने के बजाय उनसे मारपीट की और घसीटा।
उनके बहनोई पंकज चौबे के साथ भी धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप है। दोनों पक्षों के बयानों में अंतर होने के कारण थाने के अंदर के घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
जयदीप आईसीयू में भर्ती मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
रविवार को सीने में तेज दर्द होने के बाद परिजन जयदीप को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। परिजन ने उनकी तबीयत बिगड़ने को पहले हुई कथित मारपीट से जोड़ा, जबकि डॉक्टरों की ओर से हार्ट अटैक की आशंका जताए जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में इसकी पुष्टि करने वाली अंतिम मेडिकल रिपोर्ट नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी निष्कर्ष मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकता है। जांच के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले किए गए मेडिकल परीक्षण में क्या दर्ज था और बाद में सीने में दर्द की शिकायत के बाद कौन-सी जांच की गई।
पड़ोसी पक्ष की शिकायत का क्या हुआ?... मामले की शुरुआत सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए विवाद से हुई थी। जयदीप ने पड़ोसी पक्ष पर मारपीट का आरोप लगाया, जबकि दूसरे पक्ष ने विवाद की शुरुआत को लेकर अलग दावा किया।
जयदीप की शिकायत पर बालकदास, किशनलाल जाटव और अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने तथा एक आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। अब यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि दूसरे पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की, आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच हुई या नहीं और दोनों पक्षों के बयानों में अंतर को किस तरह परखा जा रहा है।
सीसीटीवी में क्या है दर्ज, जांच का सबसे अहम सवाल
इस मामले में थाने के सीसीटीवी फुटेज को लेकर चर्चा है। शिकायतकर्ता पक्ष ने थाने के भीतर मारपीट का आरोप लगाते हुए फुटेज का हवाला दिया है। पुलिस ने पड़ोसी से हुए विवाद में भी सीसीटीवी के आधार पर एक आरोपी की पहचान किए जाने की जानकारी दी थी।
हालांकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में थाने के सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग की समीक्षा का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि फुटेज में घटनाक्रम किस क्रम में दर्ज हुआ, किसने किसके साथ क्या किया और क्या रिकॉर्डिंग से शिकायतकर्ताओं तथा पुलिसकर्मियों के बयानों की पुष्टि होती है। जांच में वीडियो के साथ ड्यूटी रजिस्टर और संबंधित समय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी का रिकॉर्ड भी अहम हो सकता है।
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