करोड़ों का कोई दावेदार नहीं: इतने लाख खातों की राशि अब भी अनक्लेम्ड
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, विदिशा।
आमतौर पर लोग छोटी रकम के लिए भी बैंक और लेन-देन का हिसाब रखने में सावधानी बरतते हैं, लेकिन विदिशा जिले में 1 लाख 42 हजार से ज्यादा बैंक खातों में करीब 42 करोड़ रुपए ऐसी जमा राशि है, जिसका वर्षों से कोई दावेदार सामने नहीं आया है।
दस साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय पड़े बैंक खातों की यह राशि जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष (DEAF Fund) में चली गई है।
केंद्र सरकार की पहल के बाद पिछले वर्ष इन अनक्लेम्ड डिपॉजिट को वास्तविक खाताधारकों या उनके वैध उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बावजूद जिले में अब तक करीब 5 करोड़ रुपए ही 93 खातों में वापस किए जा सके हैं।
1.42 लाख खातों में जमा है रकम
जिले के विभिन्न बैंकों में ऐसे 1,42,339 खाते चिह्नित किए गए हैं, जिनमें वर्षों से लेन-देन नहीं हुआ है और जमा राशि अनक्लेम्ड श्रेणी में चली गई है।
इन खातों में कुल करीब 47 करोड़ रुपए की राशि बताई गई थी। अभियान के दौरान करीब 5 करोड़ रुपए खाताधारकों या संबंधित संस्थाओं को लौटाए जा चुके हैं। इसके बाद भी लगभग 42 करोड़ रुपए की राशि का दावा बाकी है।
पिछले वर्ष केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने इसकी साप्ताहिक समीक्षा भी की थी। शुरुआत में सरकारी विभागों और संस्थाओं से जुड़े खातों की राशि वापस कराने में कुछ सफलता मिली, लेकिन बाद में अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई।
93 खातों में लौटाए गए करीब 5 करोड़
अनक्लेम्ड राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 93 खातों से करीब 5 करोड़ रुपए वापस किए जा चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या सरकारी विभागों और संस्थाओं से जुड़े खातों की बताई जा रही है।
ऐसे खातों में संबंधित संस्था और खाता संचालन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध होने के कारण खाताधारक की पहचान अपेक्षाकृत आसान रही। जिला पंचायत सहित कुछ अन्य सरकारी संस्थाओं के खातों में वर्षों से लाखों रुपए जमा थे, जिन्हें प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कराया गया।
6,020 खाते सरकारी संस्थाओं से जुड़े
बैंक सूत्रों के मुताबिक, कुल 1.42 लाख अनक्लेम्ड खातों में से करीब 6,020 खाते सरकारी विभागों के अधीन आने वाली संस्थाओं और समितियों से जुड़े हैं। इन खातों में करीब 5 करोड़ रुपए जमा बताए जा रहे हैं।
इनमें कई ऐसी समितियां शामिल हैं जो अब अस्तित्व में नहीं हैं। ग्राम पंचायतों और स्कूलों में बनी समितियों के खाते भी इनमें शामिल हैं।
कई मामलों में खाता संचालित करने वाले व्यक्ति सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका निधन हो गया है। कुछ संस्थाओं के बंद होने के बाद उनके बैंक खातों में जमा राशि का कोई दावेदार सामने नहीं आया।
निजी खाताधारकों को ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती
लीड बैंक अधिकारी वीएस बघेल के मुताबिक, सरकारी संस्थाओं से जुड़े खातों की राशि लौटाने में अपेक्षाकृत कम परेशानी है, लेकिन निजी खाताधारकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती है।
उन्होंने बताया कि कई बैंक खाते दशकों पुराने हैं। इनमें खाताधारक का पूरा नाम, पिता का नाम या स्पष्ट पता दर्ज नहीं है। कई खातों में सिर्फ गांव या शहर का नाम ही दर्ज है। बैंकों ने पंचायतों के माध्यम से भी पुराने खाताधारकों को तलाशने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
कई खाताधारकों की हो चुकी है मृत्यु
पुराने खातों के कई खाताधारकों की मृत्यु भी हो चुकी है। ऐसे मामलों में उनके परिवार के सदस्यों को बैंक खाते या जमा राशि की जानकारी नहीं होने के कारण राशि पर दावा नहीं किया जा रहा है।
यही वजह है कि करोड़ों रुपए की रकम बैंकिंग व्यवस्था में होने के बावजूद उसके वास्तविक मालिक तक नहीं पहुंच पा रही है।
घर बैठे ऐसे खोजें पुरानी बैंक जमा राशि
यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर किसी बैंक में पुराना और निष्क्रिय खाता या अनक्लेम्ड जमा राशि हो सकती है, तो इसकी जानकारी आरबीआई के UDGAM पोर्टल के माध्यम से खोजी जा सकती है।
पोर्टल पर नाम और जरूरी विवरण के आधार पर अनक्लेम्ड जमा राशि की जानकारी खोजी जा सकती है। संबंधित बैंक की जानकारी मिलने के बाद खाताधारक या उसका वैध उत्तराधिकारी बैंक से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ राशि पर दावा कर सकता है।
करोड़ों की राशि तक पहुंचने की जरूरत
विदिशा में अनक्लेम्ड जमा राशि का बड़ा हिस्सा लंबे समय से बैंकों और DEAF Fund में पड़ा है। सरकारी संस्थाओं से जुड़े कुछ खातों में प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन निजी खाताधारकों और उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचना अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ऐसे में प्रशासन और बैंकों के सामने सिर्फ राशि लौटाने की नहीं, बल्कि इन 1.42 लाख खातों के वास्तविक खाताधारकों और उनके वैध उत्तराधिकारियों को खोजने की चुनौती भी है।
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