नया फरमान...अब गृहग्राम और ससुराल में नहीं रह सकेंगे पंचायत सचिव: रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बनने पर भी होगा ट्रांसफर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नई तबादला नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इतना ही नहीं, यदि किसी पंचायत में सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुना जाता है तो संबंधित सचिव का वहां से स्थानांतरण अनिवार्य होगा।
निर्देश जारी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर इस नीति का प्रभाव पड़ेगा।
15 जून तक होंगे तबादले
9 जून को जारी आदेश के अनुसार जिला स्तर पर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण 15 जून तक किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद लागू होंगे। विभागीय निर्देशों के मुताबिक स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में जिला और अंतरजिला दोनों स्तरों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया तय की गई है।
सरकार को क्यों करनी पड़ी सख्ती?
विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष 1994 से 1996 के बीच ग्राम पंचायतों में हुई नियुक्तियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का चयन हुआ था, जिनका संबंध सरपंच, उपसरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली परिवारों से था। समय-समय पर हुई जांचों में यह सामने आया कि कई मामलों में जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक गड़बड़ियां हुईं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने नई तबादला नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ये प्रावधान जोड़े हैं।
इन मामलों में ट्रांसफर होगा अनिवार्य
नई नीति के तहत निम्न परिस्थितियों में पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य किया गया है। इसके अनुसार यदि सचिव का रिश्तेदार ग्राम पंचायत का सरपंच या उपसरपंच चुना जाता है।सचिव अपने पैतृक गांव या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता से हटाया जाएगा। यदि ऐसे सचिवों की संख्या अधिक हुई तो सबसे लंबे समय से पदस्थ सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा।
प्रतिबंध अवधि में भी हो सकेंगे तबादले
सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों में स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान भी सचिवों के तबादले की अनुमति दी है। इनमें भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले। लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई। लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या अन्य जांच एजेंसियों से जुड़े प्रकरण। शासन स्तर से प्राप्त विशेष प्रशासनिक निर्देश। ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे।
महिला सचिवों को विशेष राहत
नई नीति में महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा दी गई है। विवाहित महिला सचिव अपने पति के जिले में संविलियन (ट्रांसफर) के लिए आवेदन कर सकेंगी। विधवा और तलाकशुदा महिला सचिव अपने माता-पिता के निवास वाले जिले में स्थानांतरण का लाभ ले सकेंगी। अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार मिलेगा और संविलियन के बाद संबंधित सचिव का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि नई तबादला नीति से पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, स्थानीय प्रभाव कम होगा और सचिवों तथा जनप्रतिनिधियों के बीच संभावित हितों के टकराव को रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस नीति का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो पंचायत स्तर पर होने वाली अनियमितताओं और मिलीभगत के मामलों में कमी आ सकती है।
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