बिना तपाए विदा नौतपा: रोहिणी फिर ‘गली’ हवा-हवाई हुई तपन
KHULASA FIRST
संवाददाता

पलभर में बदल गया इंदौर का मौसम, घुली ठंडक
90 किमी की रफ्तार से चली हवा, अहिल्या नगरी में भी उठा धूल का बवंडर
तहस-नहस हुआ शहर, 100 से ज्यादा पेड़ जड़ों से उखड़े, तूफान-सा नजारा
कुदरत के कहर के सामने एक ही पल में फेल हुआ बिजली महकमा, शहर अंधेरे में डूबा
मौसम विभाग ने आने वाले दो दिन और ऐसे ही आंधी-तूफान वाले बताए, तेज बौछारें भी गिरेंगी
रेगिस्तान जैसे उठे बवंडर में टीन शेड उड़े, सड़कों से लेकर घर-आंगन तक जमा हुआ कचरा
हवा के साथ आई तेज बौछारें भिगो गईं मन-आंगन, ठंडी हवा ने उड़नछू की गर्मी-उमस
केरल के मुहाने पर आकर अटका मानसून, आज-कल में लक्षद्वीप में देगा दस्तक
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट।
सोमवार को तो अपन का इंदौर भी मरुभूमि का जोधपुर-जैसलमेर-बाड़मेर हो गया। ठीक वैसा ही धूल का बवंडर अहिल्या नगरी के आसमान में उठा जैसा राजस्थान के रेगिस्तान से सटे इलाकों में उठता है।
सब कुछ वैसा ही था, जैसा धोरा की धरती पर घटता है। वैसे ही हवा का प्रचंड वेग और वैसे ही दिन में घुप्प अंधेरा कर देने जैसा दृश्य। हवा की रफ्तार भी ऐसी, जैसे सब कुछ अपने साथ उड़ा ले जाएगी। धूल के गुबार भी वैसे ही।
बस, नहीं थे तो इस धूल में रेत के वे कण, जो सुनहरी आभा लिए रहते हैं। इसकी जगह मालवा की काली मिट्टी थी और थे खेतों में जलाई गई पराली की कालिख के कण, लेकिन जो भी था बहुत खुशनुमा था।
पलभर में सब कुछ बदलकर रख दिया। कुदरत का करिश्मा ही कुछ ऐसा हुआ, तपन ठंडक में बदल गई, ताप उड़नछू हो गया। हवा के साथ गर्मी भी एक झटके में हवा-हवाई हो गई। तपने-तपाने के लिए मशहूर नौतपे ने भी तुरंत अपना बोरिया-बिस्तर बांध लिया।
यूं भी उसे मंगलवार को विदा होना ही था, लेकिन कल मौसम के बदले मिजाज ने उसकी रवानगी एक दिन पहले ही कर दी। मंगलवार को नौतपे की मौजूदगी रहेगी तो सही, लेकिन महज औपचारिक, क्योंकि मौसम महकमे ने दो-टूक कह दिया है कि इंदौर में अब पारा 40 से नीचे ही रहना है।
व क्त रहा होगा 3.30 से 4 बजे के बीच का। नौतपे का आठवां दिन था। तपन चरम पर थी। पारे के रूप में नहीं, उमस की शक्ल में। आसमान में सूरज तो दमक रहा था, लेकिन उत्तर-पूर्वी हिस्से में बादल भी उमड़ रहे थे।
बादलों की मौजूदगी में उमस के तेवर बहुत तीखे हो चले थे और ये अहसास हो रहा था कि दिन ढलते-ढलते हलका ही सही, पानी बरस जाएगा।
धूप बदन पर लग नहीं, चेंट रही थी। देह पसीना-पसीना हो रही थी। उम्मीद बस एक ही थी कि अब जून आ गया है तो देर-सवेर प्री-मानसून बारिश होगी।
लेकिन कुदरत तो कुदरत है। वहां देर-सवेर का क्या काम? उसने भगवान भुवन भास्कर के अस्ताचल होने की बाट नहीं जोही। सफेद बादलों को देखते ही देखते स्याह कर दिया।
दमकते दिनकर को बादलों की ओट में कर दिया। आसमान का पूरा उत्तरी हिस्सा स्याह घटाटोप से ढंक गया। अगले ही पल हवा चल पड़ी। पहले मंथर गति से, फिर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि इंदौरी हक्के-बक्के रह गए।
साथ में धूल का बवंडर भी ऐसे उठा, जैसे दो दिन से इंदौर वाले सोशल मीडिया पर राजस्थान के जोधपुर शहर का देख रहे थे। हूबहू वही नजारा पलक झपकते ही बन गया, जो मरुभूमि के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों अक्सर बनता है।
90 किमी से भी ज्यादा की रफ्तार से चली हवा ने एक तरह से पूरे शहर को डरा दिया। कच्चे-पक्के निर्माण डगमगाने लगे। भीमकाय होर्डिंग्स पर लगे पोस्टर-बैनर व प्रचार सामग्री के चिथड़े होने लगे।
टीन की चद्दरें पतंग की मानिंद उड़ चलीं। टेंट-तंबू उखड़ गए। बिजली के पोल जमीन पर आ गए। हवा के साथ शुरुआत में झूमकर नृत्य कर रहे झाड़-पेड़, पवन के इस वेग को सहन नहीं कर पाए औऱ जड़ों से उखड़ गए।
हवा इतनी प्रचंड गति से चल रही थी कि जिनकी जड़ें मजबूत व गहरी थीं, उनके भी उखड़ने का अंदेशा गहरा गया।
जब तक ये आंधी थमी, 150 से ज्यादा पेड़ जमीन पर लेट गए। कुछ मकानों पर गिरे, कुछ बिजली के तारों पर झूल गए। कुछ ने रास्ते रोक दिए। जब तूफान थमा तो शहर का मंजर किसी हलकी-पतली सुनामी के बाद-सा था। सड़कें कचरे से अटी पड़ी थीं।
घर-आंगन तक में कचरा ही कचरा था। दरवाजे-खिड़कियों के बंद रहने के बाद भी घर के अंदर तक धूल ही धूल। हवा के साथ आई तेज बौछारों ने राहत तो दी, लेकिन आधे से ज्यादा शहर अंधेरे में डुबा दिया। बिजली महकमे को आधी रात तक जनसामान्य के ताने सुनना पड़े कि ऐसा कैसा था मानसून पूर्व का मेंटेनेंस?
आने वाले दिन राहतभरे, आज भी आंधी-बारिश के आसार...मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश, विशेषकर इंदौर और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी से राहत मिलने और गरज-चमक के साथ हलकी बारिश या धूलभरी आंधी चलने की संभावना है।
वहीं दक्षिण भारत जैसे केरलम में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मानसून केरलम के मुहाने पर जो आ गया। इंदौर के लिए अगले कुछ दिनों के मौसम का हाल गर्मी से निजात वाला रहेगा।
पारा 35-36 डिग्री तक लुढ़क सकता है। वहीं अधिकतम ये 39-40 डिग्री तक पहुंच सकता है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर गरज के साथ हलकी बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
प्री-मानसून गतिविधियों के कारण चिलचिलाती धूप से राहत मिलेगी। मौसम में बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में हीटवेव (लू) का प्रकोप कम हो गया है और कई जगहों पर आंधी-तूफान के साथ हलकी बारिश होगी। मानसून के आज-कल में लक्षद्वीप में दस्तक देने की खबर भी है।
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