पटेल ब्रिज पर निगम की लापरवाही का तांडवबेकाबू टैंकर ने रौंदे कई वाहन: ब्रेक फेल होने से मची तबाही; चालक फरार, खटारा वाहनों का हुआ खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के व्यस्ततम पटेल रेलवे ओवरब्रिज पर कल दोपहर एक भयावह दुर्घटना हुई, जिसने शहर में हड़कंप मचा दिया। नगर निगम का पानी से भरा एक टैंकर तकनीकी खराबी के चलते अचानक दिशाहीन होकर मुख्य मार्ग पर आ गया।
देखते ही देखते इस बेकाबू टैंकर ने आगे चल रहे चार कारों, दो दोपहिया वाहनों और वहां से गुजर रहे अन्य वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और ब्रिज पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया।
टैंकर के ब्रेक फेल हो गए... घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, टैंकर की रफ्तार काफी अधिक थी और चालक उस पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था। बताया जा रहा है कि टैंकर के ब्रेक फेल हो गए थे, जिसके कारण चालक कुछ भी कर पाने में असमर्थ था। अंततः टैंकर ब्रिज के फुटपाथ से टकराकर रुका, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
दुर्घटना में एक व्यक्ति गंभीर घायल... गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है।
हादसे के तुरंत बाद टैंकर चालक मौके से फरार हो गया। चालक की लापरवाही और निगम के वाहेन की जर्जर स्थिति को लेकर घटनास्थल पर मौजूद भीड़ का गुस्सा भड़क गया।
आक्रोशित लोगों ने टैंकर में की जमकर तोड़फोड़... आक्रोशित लोगों ने टैंकर में जमकर तोड़फोड़ की। इस घटना के कारण जवाहर मार्ग और पटेल ब्रिज पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
सूचना मिलते ही छोटी ग्वालटोली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात सुचारू करवाया और टैंकर को जब्त कर लिया। फिलहाल पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है और मामले की जांच में जुटी है।
वाहनों का नहीं हो रहा रखरखाव... इस दुर्घटना ने नगर निगम के उन दावों के बीच एक बड़ा खुलासा किया है, जिनमें निगम के वाहनों को पूरी तरह फिट बताया जाता है। शहर की सड़कों पर दिन-रात दौड़ रहे निगम के अधिकांश वाहन खटारा हो चुके हैं, जिनका समय पर रखरखाव नहीं किया जाता है।
पटेल ब्रिज पर हुई यह घटना कोई पहली नहीं है, बल्कि निगम की लापरवाही का एक और प्रमाण है। बिना फिटनेस जांच और जर्जर स्थिति के इन वाहनों को सड़कों पर उतारना सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ है।
सवाल यह उठता है कि क्या निगम प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इन वाहनों की मरम्मत और फिटनेस की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
आज यह हादसा निगम की अव्यवस्था और रखरखाव में बरती जा रही गंभीर कोताही को स्पष्ट करता है। शहर के लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि निगम अपने पास मौजूद सभी पुराने और खटारा वाहनों की तत्काल जांच कराए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करे।
पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। क्या टैंकर का मेंटेनेंस रिकॉर्ड अपडेट था? क्या चालक के पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस था? इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और नगर निगम के उच्च अधिकारियों का इस पर क्या पक्ष है, यह जानना अभी बाकी है। पुलिस की जांच का इंतजार है ताकि स्पष्ट हो सके कि इस लापरवाही के लिए असल में कौन जिम्मेदार है।
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