असंतुष्टों को दिया संदेश मोहन बेमिसाल: भोपाल प्रवास से शाह का बड़ा राजनीतिक संदेश 'मुख्यमंत्री को कमजोर नहीं, मजबूत करो'
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरह प्रदेश के आधारभूत विकास के लिए कठिन और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लेकर अपने मजबूत शासक होने की छाप छोड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुग्ध उत्पादन के बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को सामने रखा।
उन्होंने संघ परिवार और भारतीय किसान संघ के साथ कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्राथमिकता में रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रासायनिक खाद और जहरीली कीटनाशक दवाइयों से राष्ट्र बीमार हो रहा है, साथ ही खेती-किसानी पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में आर्थिक समस्याओं को दूर करने और भारत की विदेशों पर निर्भरता को कम करने में प्रदेश में गोपालन के साथ दूध की श्वेत क्रांति बेहद कारगर साबित हो सकती है।
गोपालन आधारित खेती का मॉडल...संघ परिवार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और भारतीय किसान संघ के गोपालन आधारित खेती के मॉडल को आकार देने के साथ ही भाजपा के राजनीतिक धरातल को मजबूत करने के लिए सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने का दांव भी मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ खेला है।
राजनीतिक दल सहकारिता के माध्यम से देश में अपना नेटवर्क मजबूत करते रहे हैं। इस राजनीतिक विधा में कांग्रेस माहिर रही है। भाजपा को इस रहस्य को समझने में समय लगा।
एक तीर से कई निशाने साधे
मुख्यमंत्री ने सहकारिता को सामाजिक और आर्थिक उत्थान के साथ-साथ राजनीतिक धरातल मजबूत करने का माध्यम भी बनाया है। एक चतुर, कुशल और मजबूत मुख्यमंत्री की तरह मोहन यादव ने एक साथ एक तीर से बड़े और चुनौतीपूर्ण कई निशाने साधे हैं।
प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भर भारत अभियान, जो राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी है, उसमें दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ गोपालन और गो-आधारित कृषि की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही इस अभियान के जरिए संघ के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महत्वपूर्ण प्रकल्प गोपालन के माध्यम से गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को स्थापित करने के साथ दुग्ध उत्पादन समितियों के जरिए भाजपा का नेटवर्क प्रदेश में मजबूत होगा।
‘अमित शाह ने मोहन यादव के नेतृत्व को ताकत दी’
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इस तरह अमित शाह ने मोहन यादव को अभी हटाने की बहस पर विराम लगाते हुए उनके नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से ताकत दी है। अब विरोधी गुटों के लिए संदेश है कि मुख्यमंत्री को कमजोर करने के बजाय सरकार के प्रदर्शन को मजबूत करें।
इससे भी बड़ा संकेत यह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अब धीरे-धीरे शुरू हो चुकी है। स्थानीय निकाय चुनाव 2027 और विधानसभा चुनाव 2028 के पहले भाजपा मध्यप्रदेश में नेतृत्व को बार-बार बदलने की बजाय स्थिरता का संदेश देना चाहेगी।
दिलचस्प बात यह है कि जुलाई 2026 के एक राजनीतिक विश्लेषण में भी यह आकलन सामने आया था कि मोहन यादव की चुनावी सफलता उनकी पार्टी के भीतर स्थिति को मजबूत करेगी और असफलता पुराने नेताओं को उनके खिलाफ सक्रिय कर सकती है।
भाजपा में मुख्यमंत्री का भविष्य केवल किसी एक नेता या अमित शाह के बयान से तय करना जल्दबाजी होगी। इसमें कोई दो मत नहीं कि परिस्थितियां पूरी तरह मुख्यमंत्री के लिए अनुकूल हैं, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि संगठन, चुनावी प्रदर्शन, केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और 2027-28 की राजनीतिक परिस्थितियां भी प्रदेश के नेतृत्व की स्थिरता में निर्णायक होंगी।
पुराने और प्रभावशाली नेताओं को संकेत
मुख्यमंत्री के समर्थक कहते हैं कि मध्यप्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री के अलावा कई वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरे हैं। इसीलिए जब केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करता है, उनके लक्ष्य को सार्वजनिक रूप से अपना लक्ष्य बताता है और केंद्रीय सहायता का आश्वासन देता है, तो इसका राजनीतिक अर्थ यह भी होता है कि मुख्यमंत्री को कमजोर करने वाली समानांतर शक्ति-केंद्र की राजनीति के प्रति केंद्रीय नेतृत्व गंभीर नहीं है। ‘दिल्ली मुख्यमंत्री के साथ’—अमित शाह का भोपाल दौरा इस राजनीतिक संदेश को और मजबूत करता दिखाई दिया।
लेकिन परिणाम भी जरूरी..शाह का संदेश केवल राजनीतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सुशासन और परिणाममूलक सरकार होना भी जरूरी है। इस मामले में मुख्यमंत्री अपने आपको साबित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित योजनाओं में 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध संग्रहण का लक्ष्य, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सहकारिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था-इन सबको मुख्यमंत्री के नेतृत्व से जोड़ दिया गया है।
केंद्र ने उज्जैन में 255 करोड़ रुपए के डेयरी प्लांट सहित कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। अमित शाह के भोपाल दौरे को केवल गोपालक सम्मेलन या डेयरी परियोजनाओं तक सीमित करके देखना अधूरा होगा। राजनीतिक दृष्टि से उनके वक्तव्य और मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ दिखाई गई सार्वजनिक एकजुटता का एक स्पष्ट संदेश निकलता है।
अमित शाह ने भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे आश्वस्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को अगले तीन वर्षों में 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य हासिल कराने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी और वे मुख्यमंत्री के साथ ‘कंधे से कंधा मिलाकर’ खड़े रहेंगे।
यह सामान्य शासकीय सहयोग वाला बयान जरूर है, लेकिन राजनीतिक मंच पर मुख्यमंत्री के सामने केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा इस तरह व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले लक्ष्य को अपना समर्थन देना महत्वपूर्ण है।
यही कारण है कि अमित शाह का भोपाल दौरा केवल डेयरी विकास, गोपालन और सहकारिता के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसके पीछे मध्यप्रदेश भाजपा की राजनीति, नेतृत्व की स्थिरता और आने वाले चुनावों की रणनीति का संकेत भी पढ़ा जा रहा है।
मोहन की ढाल बने अमित शाह अपने भोपाल प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भाजपा के असंतुष्टों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह से संदेश दे गए। संदेश साफ है- मुख्यमंत्री को कमजोर नहीं, मजबूत करो।
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