मेरे क्षेत्र में अन्याय: ये जुल्म की इंतहा है; क्रोधित-कुपित...‘शिव’
KHULASA FIRST
संवाददाता

अपनी ही सरकार के खिलाफ आधी रात धरने पर बैठे केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान
बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलें नष्ट करने पर भड़के पूर्व मुख्यमंत्री
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
‘मामा’ का धरना, मोहन सरकार के लिए सियासी संदेश था? इस सवाल का जवाब कल से तलाशा जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजनीति में कल जो कुछ बुधनी के कोसमी गांव में हुआ वह महज एक प्रशासनिक अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई नहीं है।
देश के केंद्रीय कृषि मंत्री और साढ़े 17 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराजसिंह चौहान का अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ आधी रात को धरने पर बैठ जाना, राज्य के बदलते सत्ता समीकरणों और गहरे होते आंतरिक अंतर्विरोधों की एक बड़ी बानगी है।
इस असाधारण कदम के पीछे के राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों का विश्लेषण करना बेहद जरूरी है। यह घटना ये भी दर्शाती है कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी पर अब पूर्व मुख्यमंत्री या वरिष्ठ नेताओं की पकड़ वैसी नहीं रह गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपनी नई प्रशासनिक टीम को तरजीह दिए जाने के बाद अधिकारियों में पुराने कद्दावर नेताओं के ‘निर्देशों’ को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। शिवराज का धरना वास्तव में बेलगाम हो चुके प्रशासनिक तंत्र को यह याद दिलाने की कोशिश थी कि प्रदेश की जमीन पर उनका राजनीतिक रसूख आज भी कायम है।
मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में कल रात उस समय हड़कंप मच गया, जब देश के केंद्रीय कृषि मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपनी ही भाजपा सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ आधी रात को धरने पर बैठ गए।
मामला बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव का है, जहां वन विकास निगम और स्थानीय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्षों से रह रहे गरीब आदिवासी परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। इस मसले को उन्होंने अधिकारियों की मनमानी बताया और फूटा गुस्सा।
घटना की सूचना मिलते ही शिवराजसिंह चौहान तुरंत पीड़ित परिवारों के बीच कोसमी गांव पहुंचे। वहां रोते-बिलखते बच्चों और महिलाओं की सिसकियां सुनकर पूर्व मुख्यमंत्री का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
उन्होंने अधिकारियों की इस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए कहा "यह मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा है। मैंने पहले ही जिला प्रशासन और वन विभाग को घर न गिराने की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद यह दमनकारी कदम उठाया गया।’
प्रभावित आदिवासियों ने केंद्रीय मंत्री को आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि अमले ने न केवल उनके मकानों पर बुलडोजर चलाया, बल्कि उनकी मक्का और तुअर (अरहर) की खड़ी फसलों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया। हद तो तब हो गई, जब पीने और सिंचाई के पानी के एकमात्र साधन (कुएं) को भी मिट्टी से पाट दिया गया।
आदिवासियों के ‘मसीहा’ की छवि पर संकट...शिवराज सिंह की राजनीति हमेशा ‘लाड़ली बहनों’, भानजे-भानजियों और खासकर गरीब-आदिवासियों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। बुधनी और विदिशा क्षेत्र उनका वो अभेद्य किला है, जहां की जनता उन्हें सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानती है।
अगर शिवराज अपने ही गृहक्षेत्र में आदिवासियों के आशियाने उजड़ने पर चुप रह जाते, तो उनकी ‘जननायक’ और ‘मामा’ वाली छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचती।
विपक्ष, खासकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को तुरंत लपकते हुए इसे ‘मोहन-मामा की आपसी खींचतान' का नाम दे दिया। ऐसे में अपनी राजनीतिक साख और आदिवासियों के बीच अपनी पकड़ को बचाए रखने के लिए शिवराज के पास आक्रामक होकर अपनी ही सरकार के तंत्र को चुनौती देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।
शिवराज सिंह का मुख्य सचिव को सीधे फोन लगाकर तीखी नाराजगी जताना और मुख्यमंत्री से आमने-सामने बात करने का ऐलान करना साफ संकेत देता है कि मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
वरिष्ठ नेताओं और नए मुख्यमंत्री के बीच की यह दूरी यदि समय रहते नहीं पाटी गई, तो आने वाले दिनों में प्रशासनिक फैसलों पर दिल्ली (केंद्रीय मंत्रियों) और भोपाल (मंत्रालय) का यह टकराव राज्य की राजनीति को और अधिक अस्थिर कर सकता है।
मौके से ही मुख्य सचिव को फोन मुख्यमंत्री से करेंगे बात
हालात को देखते हुए शिवराज ने तत्काल घटनास्थल से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन लगाकर नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने मौके पर किसी वरिष्ठ अधिकारी के मौजूद न होने पर भी तीखा विरोध दर्ज कराया। चौहान ने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे अमानवीय कृत्य को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे चर्चा करेंगे। उन्होंने अफसरों की इस कार्रवाई को सीएम डॉ. मोहन यादव की बदनामी से भी जोड़ा।
देर रात तक जमीन पर बैठकर आदिवासियों को ढाढ़स बंधाते हुए केंद्रीय मंत्री ने सभी पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया कि उन्हें तत्काल राहत राशि दिलाई जाएगी, नष्ट हुई फसलों का मुआवजा मिलेगा और सभी बेघर हुए परिवारों के लिए नए पक्के मकान बनवाए जाएंगे। अपनी ही सरकार के खिलाफ ‘मामाजी’ के इस आक्रामक रुख ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
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