वैभव सूर्यवंशी के मन और तन की मजबूती पर स्टडी करेगा आईआईएम: मनोविज्ञानी भी शामिल होंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

क्रिकेटर की कलाइयों में कितना दम
खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदौर राजस्थान रायल्स के 15 वर्षीय खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी पर रिसर्च करेगा। छात्र इस बात का पता लगाएंगे कि वैभव की कलाइयों में आखिर कितना दम है कि उसने आईपीएल में सर्वाधिक 72 छक्के लगाए।
तन से ज्यादा मन की मजबूती पर भी स्टडी की जाएगी। इसमें मनोविज्ञानियों के साथ प्रबंधन विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
आईपीएल में वैभव सूर्यवंशी ने सबसे कम उम्र के बल्लेबाज की हैसियत से राजस्थान रॉयल्स की ओर से अपनी कलाईयों का इतना बेहतरीन उपयोग किया कि पूरी टीम ही उन पर निर्भर हो गई।
प्लेऑफ के मैच में उन्होंने 96 रन बतौर ओपनर बनाए, हालांकि जवाब में गुजरात टाइटन्स के कप्तान शुभमन गिल ने शतक लगाकर उनकी जीत को जीत से रोक दिया। वैभव की तारीफ क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, महेंद्रसिंह धोनी भी जमकर कर चुके हैं।
वैभव ने एक सीजन में सर्वाधिक 72 छक्के मारकर क्रिस गेल का 59 छक्कों का 14 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया। वैभव को वंडर बॉय कहा जा रहा है। ऐसे ही धुरंधर बल्लेबाज के मन और तन की मजबूती पर अब आईआईएम इंदौर स्टडी करेगा।
डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने कहा- यह स्टडी वैभव की उपलब्धियों का विश्लेषण करने के साथ उन सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक व संस्थागत कारकों को भी गहराई से समझेगी जो कम उम्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को आकार देते हैं।
वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत
प्रो. राय ने कहा कि आईआईएम का मानना है कि वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत है। इसके पीछे व्यक्तिगत क्षमता के अलावा कड़ी मेहनत, परिवार का त्याग, समर्पण, मेंटर का योगदान भी अहम है।
उन्होंने कहा कि प्रतिभा उपहार हो सकती है, पर उसे स्थायी उत्कृष्टता में बदलने के लिए सही मूल्य, संतुलित सोच, मजबूत समर्थन तंत्र व दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी है। मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा कहती हैं कि वैभव पर स्टडी भविष्य के प्रबंधकों व नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
5’7 हाइट और 55 किलो वजन के वैभव अपनी जबर्दस्त बैट स्पीड और टाइमिंग के दम पर गेंद को बाउंड्री पार भेजते हैं। बचपन के कोच मनीष ओझा द्वारा तराशे गए वैभव की तकनीक और बैट स्पीड पर अब राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा काम कर रहे हैं।
कोच विक्रम राठौर भी इनके बैलेंस के कायल हैं। महज 0.3 सेकंड के डिसीजन टाइम के कारण गेंदबाजों को सेट होने का मौका नहीं मिलता। राहुल द्रविड़ ने जब इन्हें संभलकर खेलने को कहा, तो इनका बेबाक जवाब था- सर, गेंदबाज मुझे देखे। आउट होने के डर से मुक्त इनका शेप प्रेशर में भी नहीं बिगड़ता।
रॉय बोले- कॉरपोरेट जगत को टैलेंट का नया मॉडल मिलेगा
रॉय ने कहा कि स्टडी में ‘डार्क साइड’ पर भी फोकस होगा। कम उम्र में प्रसिद्धि, करोड़ों के ऑफर व सोशल मीडिया का दबाव टैलेंट को विचलित कर देता है। कई बच्चे मानसिक थकान व अपेक्षाओं के बोझ के कारण पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाते।
उन्होंने कहा कि कोशिश ऐसे सहयोगी तंत्र का ब्लूप्रिंट बनाने की है, जो प्रतिभा को हालिया उपलब्धियों तक सीमित न रखे। इससे कॉरपोरेट जगत को भी ‘टैलेंट मैनेजमेंट’ का नया मॉडल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस उम्र में जिस आत्मविश्वास, कौशल व परिपक्वता के साथ वैभव खेल रहे हैं, वह असाधारण प्रतिभा ही कर सकती है। ऐसे में समझना जरूरी है कि ऐसे टैलेंट को लंबे वक्त तक कैसे संभालें और वह औरों को कैसे प्रेरित करे।
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