गोपनीय बैंक दस्तावेज कैसे पहुंचे यू-ट्यूब चैनल तक: इतने लाख की मांग के आरोप में एफआईआर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बैंक लेन-देन, आयकर विवरण और अन्य कथित गोपनीय वित्तीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर 10 लाख रुपए मांगने के आरोप में क्राइम ब्रांच ने भोपाल के एक यू-ट्यूब चैनल के कर्ताधर्ता प्रवेश गौतम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राशि नहीं देने पर उनके और उनकी संस्थाओं के खिलाफ सरकारी विभागों में शिकायतें करने तथा निजी वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2), 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर 22 सितंबर को दर्ज की गई।
10 लाख रुपए मांगने का आरोप
मामले में शिकायत इंदौर निवासी विनय पिंगले और भोपाल निवासी जितिन खंडेलवाल ने की है। शिकायत के मुताबिक पिंगले इंदौर स्थित इनोवेटिव कैड सेंटर के प्रोपराइटर हैं, जबकि खंडेलवाल सिविल इंजीनियर होने के साथ कंपनी में परियोजना समन्वयक हैं।
शिकायत में बताया गया है कि इनोवेटिव कैड सेंटर को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी एजेंसी के रूप में काम मिला है। इसी मामले से डीसीएम टेस्ट लैब्स का भी संबंध बताया गया है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक प्रवेश गौतम ने कथित तौर पर एक मध्यस्थ सुनील आनंद के माध्यम से जितिन खंडेलवाल से 10 लाख रुपए की मांग की।
आरोप है कि रकम नहीं देने पर डीसीएम टेस्ट लैब्स के खिलाफ सरकारी विभागों में शिकायत करने की बात कही गई। शिकायतकर्ताओं ने राशि देने से इनकार कर दिया।
सरकारी विभाग में शिकायत और जांच का भी उल्लेख
शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद 22 सितंबर 2025 को लोक निर्माण विभाग में शिकायत की गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विभागीय जांच में लगाए गए आरोप असत्य पाए गए।
इसके बाद आरोपित की ओर से फेसबुक और वेबसाइट पर संबंधित सामग्री प्रसारित किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
ई-मेल में भेजी गई तीन पेज की प्रश्नावली
शिकायतकर्ताओं ने 22 अगस्त 2026 को भेजे गए एक ई-मेल का भी उल्लेख किया है। इसके मुताबिक ई-मेल का विषय 'डीसीएम टेस्ट लैब्स-इनोवेटिव कैड सेंटर संबंध एवं संदिग्ध वित्तीय लेन-देन' था।
ई-मेल के साथ तीन पेज की प्रश्नावली भेजे जाने की बात कही गई है। इसमें बैंक खातों में हुए लेन-देन, आयकर विवरण और अन्य व्यावसायिक दस्तावेजों से जुड़े सवाल शामिल होने का दावा किया गया है।
यू-ट्यूब वीडियो में गंभीर आरोप लगाने का दावा
शिकायत के अनुसार 6 सितंबर को एक यू-ट्यूब चैनल पर 'मप्र भाजपा सरकार खंडेलवाल परिवार का भ्रष्टाचार...' शीर्षक से करीब 7 मिनट 24 सेकंड का वीडियो प्रसारित किया गया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो में उन्हें भ्रष्टाचार, मनी लांड्रिंग, कूटरचित दस्तावेज और सरकारी व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों से जोड़ा गया। उनका यह भी दावा है कि वीडियो में बैंक खातों, आयकर विवरण और भुगतान से संबंधित जानकारी दिखाई गई।
शिकायत के मुताबिक वीडियो में शिकायतकर्ताओं की तस्वीरें और परिवार से जुड़ी जानकारी भी उनकी अनुमति के बिना प्रसारित की गई।
साथ ही अगली कड़ी में बैंक खातों के दस्तावेज, यूटीआर और नकद निकासी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने तथा वीडियो को विभिन्न सरकारी विभागों तक पहुंचाने की चेतावनी दिए जाने का आरोप है।
गोपनीय दस्तावेज कहां से मिले, पुलिस करेगी जांच
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि वीडियो में दिखाई गई बैंकिंग, आयकर और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।
उनका आरोप है कि इस तरह के दस्तावेज बैंक, कार्यालय के कंप्यूटर, लेखाकार या आयकर पोर्टल जैसे माध्यमों से ही प्राप्त किए जा सकते थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रवेश गौतम या उनके किसी सहयोगी ने इन डिजिटल दस्तावेजों को अनधिकृत तरीके से हासिल किया हो सकता है।
हालांकि, दस्तावेज वास्तव में किस माध्यम से हासिल किए गए और उन्हें किसने उपलब्ध कराया, यह जांच का विषय है।
क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, जबरन वसूली के प्रयास, अड़ताबाजी, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी, चोरी और कथित रूप से गोपनीय डिजिटल दस्तावेज हासिल कर सार्वजनिक करने के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
प्रवेश गौतम को मानहानि का नोटिस, वीडियो हटाने और 5 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग
इधर, मामले में शिकायतकर्ताओं ने प्रवेश गौतम को अधिवक्ता के माध्यम से मानहानि का कानूनी नोटिस भी भेजा है।
नोटिस में 6 सितंबर को यू-ट्यूब और फेसबुक पर प्रसारित वीडियो को हटाने, भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित नहीं करने, सार्वजनिक माफी मांगने और 5 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की गई है।
अधिवक्ता मयंक मुंशी के माध्यम से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में इनोवेटिव कैड सेंटर और डीसीएम टेस्ट लैब्स के कामकाज को लेकर गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए गए।
नोटिस में दावा किया गया है कि दोनों संस्थाओं को भ्रष्टाचार, मनी लांड्रिंग, कूटरचित दस्तावेज, फर्जी रिपोर्ट और शासन के साथ धोखाधड़ी जैसे आरोपों से जोड़ा गया।
नोटिस में संस्थाओं ने अपने पक्ष में रखे दावे
नोटिस में कहा गया है कि इनोवेटिव कैड सेंटर का वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश के शहरी विकास एवं आवास विभाग की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटरिंग एजेंसी के रूप में चयन हुआ था।
नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि सेंटर के खिलाफ किसी शासकीय विभाग या वैधानिक प्राधिकरण की ओर से कोई प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया है।
वहीं, डीसीएम टेस्ट लैब्स को एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला बताया गया है और वीडियो में लगाए गए आरोपों को गलत बताया गया है।
72 घंटे में वीडियो हटाने की मांग
कानूनी नोटिस में प्रवेश गौतम को 72 घंटे के भीतर वीडियो हटाने, उससे जुड़े क्लिप, पोस्ट और अन्य सामग्री हटाने तथा भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित नहीं करने को कहा गया है।
इसके अलावा वीडियो में दिखाई गई वित्तीय और निजी जानकारी के स्रोत का खुलासा करने, सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने और 5 करोड़ रुपए हर्जाने के रूप में देने की मांग की गई है।
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में मांगें पूरी नहीं होने पर शिकायतकर्ता आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगे।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
-10 लाख रुपए की मांग किए जाने के आरोप में क्या तथ्य सामने आते हैं?
-बैंक और आयकर से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर किस माध्यम से हासिल किए गए?
- वीडियो में दिखाई गई वित्तीय जानकारी का स्रोत क्या था?
-क्या किसी डिजिटल सिस्टम या अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई?
-शिकायत और नोटिस में लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं?
-पुलिस की जांच के बाद ही इन आरोपों और डिजिटल दस्तावेजों के स्रोत से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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