इनकी नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त: भर्ती पर उठे सवाल; इनको व्यक्तिगत रूप से तलब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्य प्रदेश में सरकारी वकीलों (लॉ ऑफिसर्स) की नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश तब दिया, जब राज्य सरकार को कई अवसर दिए जाने के बावजूद नियुक्तियों से संबंधित जवाब समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
157 नियुक्तियों की वैधता पर सवाल
मामला हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में 157 सरकारी लॉ ऑफिसर्स की नियुक्तियां नियमों के विपरीत की गईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि कई नियुक्तियां निर्धारित योग्यता और अनुभव के बजाय पक्षपात एवं प्रभाव के आधार पर की गई हैं।
10 वर्ष के अनुभव की शर्त पर विवाद
याचिका में कहा गया है कि सरकारी लॉ ऑफिसर के पद पर नियुक्ति के लिए कम से कम 10 वर्ष का अधिवक्ता के रूप में अनुभव आवश्यक है। इसके बावजूद कई ऐसे वकीलों की नियुक्ति किए जाने का आरोप है, जो इस अनिवार्य पात्रता को पूरा नहीं करते थे। इसी आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
नोटिस स्वीकार नहीं करने का भी आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में जारी नोटिसों को महाधिवक्ता कार्यालय और संबंधित लॉ ऑफिसर्स द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए इसे गंभीरता से लिया।
बार-बार अवसर के बावजूद जवाब नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को पहले भी कई बार जवाब दाखिल करने का अवसर दिया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने महाधिवक्ता को स्वयं उपस्थित होकर पूरे मामले पर अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
10 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि महाधिवक्ता अदालत के समक्ष क्या स्पष्टीकरण देते हैं और सरकार नियुक्तियों में अनियमितता तथा पात्रता संबंधी आरोपों पर क्या पक्ष रखती है। हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।
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