नामांकन के बाद हरदीप पुरी की खामोशी: कांग्रेस ने उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

राज्यसभा की दावेदारी के बीच पुरी से जवाब मांग रहा विपक्ष, मीडिया से दूरी बनी चर्चा का विषय
हेमंत उपाध्याय 99930-99008, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने राज्यसभा के एक उपचुनाव को राष्ट्रीय राजनीति की बहस से जोड़ दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उनके साथ मौजूद रहे। राजनीतिक दृष्टि से यह एक औपचारिक नामांकन कार्यक्रम था, लेकिन इसके साथ जुड़ा विवाद इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम से आगे ले गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा उस बात की रही कि नामांकन के दौरान हरदीप पुरी ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और पत्रकारों से बातचीत नहीं की। एक केंद्रीय मंत्री, जिनकी उम्मीदवारी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, उनका मीडिया के सामने अपनी बात नहीं रखना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
हरदीप पुरी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न एपस्टीन प्रकरण को लेकर है। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों में पुरी के ईमेल संवाद और मुलाकातों के संदर्भ सामने आने के बाद कांग्रेस लगातार स्पष्टीकरण मांग रही है। इस मामले में पुरी पहले अपना पक्ष रख चुके हैं।
फरवरी 2026 में एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें तीन-चार अवसरों पर हुई थीं और उनका संदर्भ अंतरराष्ट्रीय पेशेवर गतिविधियों से जुड़ा था। उन्होंने किसी गलत गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया था। उनका कहना था कि उन्होंने एपस्टीन के निजी द्वीप की यात्रा भी नहीं की।
इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि पुरी ने इस विवाद पर कभी जवाब नहीं दिया। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सवाल दोबारा चर्चा में हैं। ऐसे में भोपाल में नामांकन के अवसर पर यदि वे मीडिया के सामने अपने पुराने स्पष्टीकरण को दोहराते या नए सवालों का जवाब देते, तो राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने आ सकता था।
...लेकिन प्रश्न अपनी जगह कायम
हरदीप पुरी की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया था। कांग्रेस का प्रमुख सवाल पुरी के नाम का अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने और उनके बीच पूर्व में हुए ईमेल संवाद तथा मुलाकातों को लेकर है।
कांग्रेस इन संदर्भों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि ऐसे सवालों के बीच भाजपा ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक संरक्षण देने का काम किया है।
कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी का विरोध करते हुए यह भी सवाल उठाया है कि मध्यप्रदेश से किसी स्थानीय वरिष्ठ नेता को अवसर देने के बजाय दिल्ली के एक केंद्रीय मंत्री को यहां से उम्मीदवार क्यों बनाया गया?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगा है। पटवारी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट का इस्तेमाल केंद्रीय राजनीतिक समीकरणों के लिए किया गया। हालांकि, मुरुगन को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किए जाने का कांग्रेस का आरोप है। इसी तरह एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में नाम या संवाद का उल्लेख अपने आप में किसी आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।
भाजपा का भरोसा, कांग्रेस का विरोध
दूसरी ओर भाजपा ने पुरी की उम्मीदवारी को अनुभव और प्रशासनिक क्षमता से जोड़कर प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके प्रशासनिक अनुभव को मध्य प्रदेश के विकास के लिए उपयोगी बताया है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी बीना रिफाइनरी और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी परियोजनाओं में उनके योगदान का उल्लेख किया। भाजपा का तर्क है कि एक अनुभवी केंद्रीय मंत्री का राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना प्रदेश के हित में हो सकता है।
वहीं कांग्रेस इसे राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उम्मीदवार के चयन से जुड़े सवालों के रूप में देख रही है। यहां एक दिलचस्प राजनीतिक पहलू भी है। पुरी वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होना है।
मध्य प्रदेश की खाली हुई सीट पर उनका नामांकन उन्हें उच्च सदन में प्रतिनिधित्व जारी रखने का अवसर देता है। यह सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। किसी भी बड़े राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए मीडिया केवल खबर प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता तक अपना पक्ष पहुंचाने का महत्वपूर्ण जरिया भी है।
खासकर तब, जब किसी उम्मीदवार को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा हो, तब मीडिया के सवालों का सामना करना राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा माना जाता है। भोपाल में पुरी का मीडिया से बातचीत नहीं करना इसलिए चर्चा में है कि उनके सामने केवल राज्यसभा का नामांकन नहीं, बल्कि एक विवाद से जुड़े सार्वजनिक सवाल भी मौजूद हैं।
इसे किसी निश्चित राजनीतिक मंशा से जोड़ना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को अपनी आलोचना को और धार देने का अवसर दिया है।
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