हथियार सप्लायर से अंतरजिला नेटवर्क तक एसआईटी को मिल रहे बड़े सुराग: लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर हुआ खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के चर्चित बिल्डर विवेक दम्मानी से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे संगठित अपराध और अंतरजिला नेटवर्क का खुलासा होता जा रहा हैं।
पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को पूछताछ में ऐसे कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला केवल एक बिल्डर को धमकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार हथियार सप्लाई नेटवर्क और अन्य जिलों में कारोबारियों को धमकाने की घटनाओं से भी जुड़े हो सकते हैं।
मामले में गिरफ्तार राहुल उर्फ बाबा से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने उसे पांच दिन की रिमांड पर लिया है और उसके आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
हथियार उपलब्ध कराने में कुलदीप की भूमिका: इसी दौरान पुलिस ने देवास से राहुल के उपयोग में रही एक कार भी जब्त की है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में कुलदीप चौहान का नाम सामने आया है। जांचकर्ताओं का दावा है कि रंगदारी और धमकी देने की घटनाओं में उपयोग किए गए हथियार उपलब्ध कराने में कुलदीप की भूमिका रही है।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहां से आए, कितने हथियार उपलब्ध कराए गए और क्या उनका इस्तेमाल अन्य आपराधिक घटनाओं में भी हुआ है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि हथियार सप्लाई की कड़ी पूरी तरह खुलती है तो कई अन्य अपराधों की गुत्थियां भी सुलझ सकती हैं।
यही वजह है कि पुलिस केवल रंगदारी के मामले तक सीमित न रहकर हथियार नेटवर्क की भी अलग से जांच कर रही है।
आर्थिक पहलुओं की भी जांच
पांच करोड़ की मांग छोटी रकम नहीं है। ऐसे में जांच एजेंसियां जानने का प्रयास कर रही हैं कि यदि रंगदारी की रकम मिल जाती तो उसका उपयोग कहां होना था। क्या यह पैसा आपराधिक गतिविधियों को बढ़ाने, हथियार खरीदने या किसी अन्य नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होना था?
एसआईटी इस मामले में आरोपितों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जुटा रही है। जांचकर्ताओं का मानना है आर्थिक ट्रेल से पूरे नेटवर्क के कई छिपे चेहरे सामने आ सकते हैं।
राहुल उर्फ बाबा से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग के रूप में देवास से कार जब्त की गई है। पुलिस यह जांच कर रही है कि वाहन का उपयोग किन-किन गतिविधियों में किया था।
वाहन की लोकेशन हिस्ट्री, उसमें मौजूद डिजिटल साक्ष्य और उससे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
खरगोन तक पहुंचे तार
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि राहुल उर्फ बाबा का नाम खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र के बायो कॉटन कारोबारी दिलीप राठौर को धमकाने के मामले में भी सामने आया है।
पुलिस के अनुसार जिस हथियार की चर्चा वर्तमान जांच में हो रही है, उसका इस्तेमाल कारोबारी को डराने-धमकाने के लिए किया गया था।
इस खुलासे के बाद जांच का दायरा इंदौर से निकलकर खरगोन और देवास तक पहुंच गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि अलग-अलग जिलों में एक ही समूह या उससे जुड़े लोगों द्वारा धमकी और रंगदारी की घटनाएं की गई हैं तो यह संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
राजपाल और कुलदीप की जानकारी मिली
एसआईटी की जांच में राजपाल और कुलदीप चौहान की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राहुल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस इन दोनों की गतिविधियों, संपर्कों और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि रंगदारी मांगने जैसी घटनाएं अक्सर अकेले नहीं होतीं। इसके पीछे रेकी करने वाले, धमकी पहुंचाने वाले, हथियार उपलब्ध कराने वाले और आर्थिक प्रबंधन देखने वाले अलग-अलग लोग शामिल हो सकते हैं।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने एक नया सवाल भी खड़ा कर दिया है। यदि खरगोन के कारोबारी को भी धमकाया गया था तो क्या यह गैंग सिर्फ विवेक दम्मानी तक सीमित नहीं थी?
क्या अन्य कारोबारी, बिल्डर और निवेशक भी इनके निशाने पर थे? पुलिस इस पहलू पर भी काम कर रही है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपित किन-किन लोगों के संपर्क में थे और भविष्य में किसे निशाना बनाने की योजना थी।
संगठित अपराध की दिशा में बढ़ रही जांच
पुलिस की जांच केवल रंगदारी मांगने की घटना तक सीमित नहीं है। हथियार सप्लाई, विभिन्न जिलों में कारोबारियों को धमकाने के आरोप, फरार सहयोगियों की तलाश और आर्थिक नेटवर्क की पड़ताल ने इस मामले को संगठित अपराध की जांच का रूप दे दिया है।
एसआईटी अधिकारियों का मानना है कि राहुल उर्फ बाबा से पूछताछ के दौरान मिले सुराग आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासों का आधार बन सकते हैं।
यही वजह है कि पुलिस अब इस पूरे प्रकरण को केवल एक रंगदारी कांड नहीं, बल्कि संभावित अंतरजिला आपराधिक नेटवर्क के रूप में देख रही है।
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