फिटनेस व्यवस्था हुई ठप चालकों की ‘चेकिंग’ तेज: सरकारी वेबसाइट पर फिटनेस सुविधा महीनों से बाधित होने का दावा
KHULASA FIRST
संवाददाता

2 हजार रुपए चालान का डर दिखाकर 300-500 रुपए वसूली के आरोप, परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
परिवहन विभाग की फिटनेस व्यवस्था को लेकर ई-रिक्शा चालकों की परेशानी सामने आ रही है। आरोप है कि चार से छह महीनों से मध्यप्रदेश परिवहन विभाग की फिटनेस संबंधी ऑनलाइन व्यवस्था प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही है। इसका खामियाजा पैसेंजर ई-रिक्शा और लोडिंग ई-रिक्शा चालकों को भुगतना पड़ रहा है।
चालकों का आरोप है कि सड़क पर चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस अथवा सामान्य पुलिस के जवान फिटनेस के नाम पर 2 हजार रुपए तक के चालान का डर दिखाते हैं और कुछ मामलों में 300 से 500 रुपए तक की राशि बिना रसीद लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
आरोप यह भी है कि शिकायत करने के बावजूद चालकों को न तो परिवहन कार्यालय में स्पष्ट समाधान मिल रहा है और न ही सड़क पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट है।
कानून में फिटनेस जरूरी, लेकिन व्यवस्था का सवाल
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 56 तथा सीएमवी रूल्स 1989 के नियम 62 से 73 के तहत परिवहन वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र आवश्यक है। सामान्य तौर पर फिटनेस परीक्षण निर्धारित प्राधिकारी अथवा अधिकृत ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से किया जाना है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब फिटनेस प्रक्रिया को लेकर विभागीय स्तर पर ही व्यवस्थागत अड़चनें बनी हुई हैं, तो वाहन चालकों को उसका व्यावहारिक समाधान क्यों नहीं दिया जा रहा।
परिवहन विभाग ने जनवरी में ही शासन को लिखा था पत्र... मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने 8 जनवरी 2026 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर फिटनेस व्यवस्था की व्यावहारिक दिक्कतों से अवगत कराया था।
पत्र में बताया गया था कि 1 जनवरी 2026 के बाद उन जिलों में जहां एटीएस उपलब्ध हैं या सीमावर्ती क्षेत्र में एटीएस संचालित हैं, मैनुअल फिटनेस व्यवस्था बंद करने का प्रावधान लागू किया गया है।
पत्र के अनुसार उस समय प्रदेश के 9 जिलों में 17 एटीएस संचालित थे, जबकि 19 अन्य एटीएस निर्माणाधीन थे और इनके सितंबर 2026 तक पूर्ण होने की संभावना जताई गई थी।
परिवहन विभाग ने अनुरोध किया था कि एटीएस उपलब्ध नहीं होने वाले जिलों में सितंबर 2026 तक परिवहन कार्यालयों के माध्यम से मैनुअल फिटनेस परीक्षण और प्रमाण-पत्र जारी करने की अनुमति दी जाए।
पत्राचार के बाद भी समाधान पर सवाल
विभाग ने अपने पत्र में यह भी बताया था कि मध्यप्रदेश में कई जिलों के बीच दूरी 150 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में फिटनेस के लिए दूसरे जिले में जाना वाहन मालिकों के लिए अतिरिक्त समय और आर्थिक बोझ का कारण बन सकता है।
इसके बावजूद फिटनेस व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर वाहन चालकों की परेशानी बनी रहने के आरोप हैं। अब सवाल यह है कि जब परिवहन विभाग स्वयं जनवरी में फिटनेस व्यवस्था की व्यावहारिक कठिनाइयों को शासन के सामने रख चुका था तो ई-रिक्शा चालकों के लिए स्पष्ट और सुलभ व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
यदि फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य है तो विभाग को उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना होगी और यदि प्रक्रिया में तकनीकी अथवा प्रशासनिक बाधा है तो उसका समाधान भी विभागीय स्तर पर होना चाहिए।
ई-रिक्शा चालक संगठनों की मांग है कि फिटनेस प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं और चेकिंग के दौरान किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली की शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाए।
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