वीडियो देखिये, पूर्वी रिंग रोड के विरोध में फिर सड़कों पर उतरे किसान: गैस सिलेंडर, चूल्हा और राशन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे; बोले- समाधान नहीं, तो अनिश्चितकालीन धरना
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रस्तावित पूर्वी (ईस्टर्न) रिंग रोड परियोजना को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार सुबह सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। किसान अपने साथ घरेलू गैस सिलेंडर, चूल्हा, कंडे, आटा, राशन और बिस्तर लेकर पहुंचे, जिससे साफ संकेत दिया कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद किसान कलेक्ट्रेट परिसर के पास निर्धारित धरना स्थल पर बैठ गए और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। इंदौर कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान किसान बेहोश हो गया।
कपड़े उतारकर जताया विरोध
आंदोलन के दौरान किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कलेक्ट्रेट के बाहर कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। कई किसानों ने सड़क पर बैठकर चक्का जाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। किसानों का कहना है कि पूर्व में भी प्रशासन ने बातचीत और समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण वे फिर से आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं।
धरना स्थल पर ही गुजारेंगे रात
प्रदर्शनकारी किसान ट्रॉलियों में खाना बनाने का सामान, गैस टंकी और अन्य जरूरी सामग्री लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक वे धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले दस दिन में समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसके बाद भी परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है।
44 गांवों के हजारों परिवार प्रभावित
किसानों के अनुसार प्रस्तावित ईस्टर्न रिंग रोड का मार्ग देवास रोड से होते हुए सांवेर, कनाड़िया, बिचौली, महू सहित कई क्षेत्रों से गुजर रहा है। इस परियोजना से लगभग 44 गांवों के दो हजार से अधिक किसान परिवार प्रभावित होंगे।
आंदोलनकारियों का दावा है कि परियोजना के लिए करीब 800 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जहां किसान साल में तीन से चार फसलें लेते हैं। उनका कहना है कि यह जमीन उनकी आजीविका का मुख्य आधार है।
चार गुना मुआवजा भी मंजूर नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की घोषणा की गई है। इसके बावजूद किसान संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि आर्थिक मुआवजा उनकी पैतृक और उपजाऊ जमीन का विकल्प नहीं हो सकता। उनका तर्क है कि जमीन चली जाने के बाद खेती और उससे जुड़े रोजगार भी समाप्त हो जाएंगे।
एलाइनमेंट बदलने की मांग
आंदोलन कर रहे किसानों की मुख्य मांग रिंग रोड के एलाइनमेंट में बदलाव की है। उनका कहना है कि सड़क को कुछ दूरी पर ऐसे क्षेत्र से निकाला जा सकता है जहां सरकारी और बंजर भूमि अधिक उपलब्ध है। किसानों के मुताबिक यदि रूट बदला जाता है तो उपजाऊ कृषि भूमि बच जाएगी और उन क्षेत्रों को भी सड़क सुविधा मिल सकेगी जहां अभी बुनियादी सड़क नेटवर्क नहीं है। उनका दावा है कि इससे सरकार और किसानों दोनों का हित सुरक्षित रहेगा।
प्रशासन और किसानों के बीच गतिरोध
धरने में संतोष पाटीदार, मनोज पटेल, जितेंद्र पाटीदार, बंटी गुर्जर, विष्णु चौधरी, आनंदीराव और दिनेश सरदार सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हैं। आंदोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों से बातचीत के प्रयास जारी हैं।
हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक एलाइनमेंट में बदलाव या उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पूर्वी रिंग रोड परियोजना को इंदौर के भविष्य के यातायात और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन किसानों के विरोध ने इस परियोजना को एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है।
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