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करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन: जानिये किन्हें किया गिरफ्तार; रिमांड में हो सकते हैं बड़े खुलासे, इतनी संपत्तियां अटैच

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 10:53 am
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करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड और निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को भी हिरासत में लिया है। तीनों आरोपियों को मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया।

वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी साक्ष्य
ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी खजाने से निकाली गई राशि का उपयोग मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। इस मामले में अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है।

कागजों में बने प्रोजेक्ट, करोड़ों का भुगतान
जांच के दौरान सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर ऐसे कार्यों के भुगतान स्वीकृत कराए, जो या तो धरातल पर मौजूद ही नहीं थे या फिर उनकी वास्तविक लागत से कई गुना अधिक राशि दर्शाकर भुगतान निकाला गया।

करोड़ों रुपए का भुगतान किया
ईडी के अनुसार कई परियोजनाओं में करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, लेकिन जब संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया गया तो वहां कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों और जाली बिलों के जरिए निकाला गया।

संपत्तियों की खरीद में लगाया गया घोटाले का पैसा
जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले से अर्जित धनराशि को छिपाने के लिए विभिन्न नामों से संपत्तियां खरीदी गईं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला।

जांच के घेरे में कई अधिकारी और ठेकेदार
सूत्रों के अनुसार जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। नगर निगम के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ठेकेदारों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। ईडी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, कंपनियों और संपत्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

तीन दिन की रिमांड
विशेष अदालत से मिली तीन दिन की रिमांड के दौरान ईडी आरोपियों से पूछताछ कर घोटाले की पूरी परतें खोलने का प्रयास करेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ से धन के प्रवाह, फर्जी कंपनियों, बेनामी संपत्तियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।



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