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साइबर ठगी का खुलासा: शेयर ट्रेडिंग का झांसा देकर ठगे 1.49 करोड़; 6 आरोपी गिरफ्तार

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 फ़रवरी 2026, 5:15 pm
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साइबर ठगी का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, मोहला।
शेयर ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर 1.49 करोड़ रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। वहीं पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड और गुजरात में दबिश देकर 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में इस ठगी का नेपाल कनेक्शन भी सामने आया है।

शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा
अंबागढ़ चौकी निवासी कुनाल अग्रवाल ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रार्थी के अनुसार 9 नवंबर से 6 दिसंबर 2025 के बीच अज्ञात लोगों ने मोबाइल नंबरों के जरिए संपर्क कर शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा दिया। विश्वास में लेकर पंजाब नेशनल बैंक और एचडीएफसी बैंक के खातों से कुल 1.49 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में डलवा लिए गए।

पहले पांच खातों में रकम, फिर निकासी
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम पहले 5 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई, फिर अन्य खातों में घुमाकर चेक और एटीएम के जरिए निकाली गई। लोकेशन ट्रैकिंग में संदेहियों की मौजूदगी रुद्रपुर (उधमसिंह नगर), अहमदाबाद, राजकोट और सूरत में मिली।

छह आरोपी गिरफ्तार
दो विशेष पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर रेड कर बैंगलोर, उत्तराखंड और गुजरात से आरोपितों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों में मनोज कुमारजी, सनातन मंडल, योगेंद्र सिंह, युसुफ संधवानी, राहुल गुप्ता और गौतम भाई बागड़ा शामिल हैं। आरोपितों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, 7 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड जब्त किए गए हैं।

नेपाल कनेक्शन की जांच जारी
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों के संपर्क काठमांडू के कुछ व्यक्तियों से होने के संकेत मिले हैं। गिरोह की कार्यप्रणाली, धन प्रवाह और अन्य संभावित पीड़ितों को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

ठगी का तरीका
ऑनलाइन निवेश ठगी में गिरोह पहले सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफार्म के जरिए संपर्क साधता है। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट दिखाकर शुरुआती मुनाफा प्रदर्शित किया जाता है, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़े। जब बड़ी रकम निवेश होती है, तो निकासी के नाम पर टैक्स या प्रोसेसिंग शुल्क मांगा जाता है।

कई मामलों में रकम अलग-अलग खातों में घुमाकर चेक या एटीएम से निकाली जाती है, ताकि ट्रैकिंग कठिन हो। विशेषज्ञों के अनुसार अनजान प्लेटफार्म, गारंटीड रिटर्न और जल्दबाजी के दबाव जैसे संकेतों पर सतर्क रहना जरूरी है।

जांच में तकनीक की अहम भूमिका
साइबर ठगी के मामलों में I4C पोर्टल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंकिंग ट्रांजेक्शन ट्रेल और लोकेशन डेटा से पुलिस को अहम सुराग मिल रहे हैं। इस मामले में भी खातों के बीच ट्रांसफर पैटर्न और निकासी के तरीके से गिरोह तक पहुंच बनाई गई।


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