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प्रसिद्ध चौपाटी में दुकान आवंटन को लेकर विवाद गहराया: व्यापारियों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा; लगाए ऐसे आरोप

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 जून 2026, 11:36 am
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प्रसिद्ध चौपाटी में दुकान आवंटन को लेकर विवाद गहराया

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की प्रसिद्ध सराफा चौपाटी में दुकान आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वर्षों से व्यवसाय कर रहे कई व्यापारियों ने आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और अपारदर्शिता के आरोप लगाते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा दिया है। व्यापारियों का आरोप है कि वास्तविक और पात्र लोगों को सूची से बाहर कर कुछ अन्य लोगों को लाभ पहुंचाया गया है। विवाद के केंद्र में सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता हैं, जिन पर व्यापारियों ने आवंटन प्रक्रिया में मनमानी करने के आरोप लगाए हैं।

वर्षों पुराने व्यापारियों को नहीं मिली जगह
शिकायत करने वाले व्यापारियों का कहना है कि सराफा चौपाटी में 20 से 40 वर्षों से व्यवसाय कर रहे कई परिवारों के पास नगर निगम के पुराने लाइसेंस, पंजीयन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनके नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं किए गए। व्यापारियों का दावा है कि नगर निगम को भेजी गई सूची में ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जिनका चौपाटी के पारंपरिक व्यवसाय से कोई सीधा संबंध नहीं था, जबकि पुराने व्यवसायियों को बाहर कर दिया गया।

सूची में बदलाव के आरोप
पीड़ित व्यापारियों का आरोप है कि प्रारंभिक सूची और अंतिम सूची में कई अंतर पाए गए। कुछ ऐसे नाम, जो पहले पात्रता सूची में शामिल थे, उन्हें अंतिम सूची से हटा दिया गया। वहीं कुछ नए नाम बाद में जोड़ दिए गए। व्यापारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं हुई और न ही प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की स्पष्ट जानकारी दी गई। इससे चौपाटी के पुराने व्यापारियों में असंतोष और नाराजगी बढ़ गई है।

आठ व्यापारियों ने दायर की याचिका
मामले को लेकर आठ व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से दुकान आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और पात्र व्यापारियों को न्याय दिलाने की मांग की है। याचिका में सराफा चौपाटी एसोसिएशन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

अधिकारियों को दिए कई ज्ञापन
व्यापारियों के अनुसार उन्होंने अपनी शिकायतें लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया। इस संबंध में महापौर, मंत्री, नगर निगम आयुक्त, कलेक्टर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए। हालांकि लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकलने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। व्यापारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद उनकी बातों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
आवंटन प्रक्रिया से नाराज व्यापारियों ने अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि चौपाटी की पहचान और परंपरा उन परिवारों से जुड़ी है जो वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहे हैं, इसलिए उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पुनः समीक्षा की मांग
व्यापारियों ने मांग की है कि पात्रता सूची और आवंटन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए। साथ ही ऐसे सभी मामलों की जांच हो जिनमें पात्र लोगों को बाहर कर अन्य व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है और व्यापारी अब अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, यह विवाद शहर की सबसे चर्चित खाद्य चौपाटियों में से एक सराफा चौपाटी की व्यवस्था और प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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